हबीब के रंग, बिरजू महाराज की नृत्यकला का साक्षी मंदिर
शहर का गांधी मैदान, जहां आज भी रंग मंदिर मौजूद है। इसके इतिहास की बात करें तो 1960 के दशक में प्रदेश का पहला रंगमंच भातखंडे ललित कला शिक्षा समिति ने निर्माण कराया। समिति के लोग बताते हैं कि इस मंच पर 1960 के दशक में कला का प्रदर्शन करना गौरव की बात थी। समिति ने भी कलाकारों को कला और कौशल को पेश करने का मौका दिया। इस मंच पर देश और प्रदेश के नामचीन संगीत के फनकारों और थिएटर कर्मियों ने शोहरत बटोरी। साथ ही राज्य बनने के बाद भी स्कूल-कॉलेजो के एनुअल फंग्शन इसी मंच पर हुआ करते थे। यहां प्रस्तुति देने थिएटर कर्मी दूसरे राज्यों से आ चुके हैं।
हबीब तनवीर समेत बड़ी हस्तियों ने दी प्रस्तुति
प्रदेश के जाने-माने रंगकर्मी हबीब तनवीर ही नहीं, देशभर में अपनी धमक रखने वाली नादिरा बब्बर, सितारा देवी, बिरजू महाराज जैसे नामचीन कलाकारों ने भी रंग मंदिर में अपने कला और संगीत से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। इतना ही नहीं शहर में उन दिनों संचालित 10 से ज्यादा संस्थाओं की ओर नाट्य,संगीत और सुगम संगीत की बेजोड़ प्रस्तुति इसी मंच से दी जाती रही। देश के बड़े कर्मचारी यूनियन रंग मंदिर में सम्मेलन का आयोजन करने को बड़ी उपलब्धि मानते थे।
हो चुके 3 हजार से ज्यादा प्रोग्राम
60 के दशक में बनने के बाद शहर ही नहीं प्रदेश का इकलौता मंच होने के कारण यहां 2010 के बीच 3 हजार से ज्यादा प्रोग्राम हो चुके हैं। इसमें प्रदेश के कलाकारों के अलावा देश के दूसरे शहरों के भी नामचीन आर्टिस्टों ने आकर गीत-गजलों और सुरमयी आयोजनों के जरिए लोगों को मंत्रमुग्ध किया। इप्टा,अग्रग्रामी,नाट्य अकाडमी से जुड़े बड़े ऑटिस्टों ने परफॉरमेंस दिए हैं।
कलाकारों के लिए बना था पहला मंच
उत्तमचंद जैन, अध्यक्ष, भातखंडे ललित कला शिक्षा समिति, रायपुर इसे बनवाया ही इसी उद्देश्य से गया था कि कलाकारों को एक अच्छा मंच दिया जा सके। 60 के दशक का पहले ऑडिटोरियम होने की वजह से इस पर प्रोग्राम करना उन दिनों गर्व की बात होती थी। यहां 3 हजार से ज्यादा प्रोग्राम हो चुके हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन के कई लाइव प्रोग्राम भी यहां हुए हैं। देश की नामचीन कलाकारों ने यहां परफॉरमेंस दिए हैं।
सुगम-संगीत, शाम-ए-गजल
पुराने ऑटिस्टों का कहना है कि रंग मंदिर बनने के दो दशक बाद तक आकाशवाणी और दूरदर्शन ने भी कई प्रोग्रामों का इस मंच से लाइव किया। इतना ही नहीं 60 से 80 के दशक तक तो शामे गजल और सुगम संगीत जैसे चर्चित और लोगप्रिय प्रोग्राम की प्रस्तुति यहीं से कराई जाती रही। इसकी वजह से भी रंग मंदिर काफी लोकप्रिय रहा।