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ये कहानी है 21 साल की

3 वर्ष पहले
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16 की उम्र में बनीं कराटे प्लेयर, लड़कियों को छेड़खानी से बचने देने लगीं ट्रेनिंग पांच साल में 7 हजार से ज्यादा को बनाया आत्मनिर्भर, दर्जनों ने जीते गोल्ड मेडल

ये कहानी है 21 साल की बरखा राजपूत की। छोटी सी उम्र में ही कराटे प्लेयर बन गई और पांच साल से हर वर्ग के लोगों को कराटे सिखा रही है। ज्यादातर लड़कियों को मनचलों से बचने के लिए कराटे की ट्रेनिंग दे रही है। आज 7 हजार लोगों को कराटे प्रशिक्षण दे चुकी है।

विंदेश श्रीवास्तव . रायपुर

अभनपुर के पास रहने वाली बरखा अक्सर अपने आसपास होने वाली लड़कियों से छेड़खानी पर नजर रखती थी। लिहाजा लड़कियां उन लड़कों से लड़ नहीं पाती थी। इसलिए बरखा की सोच आई कि कराटे की प्लेयर बनकर ऐसी लड़कियों को ट्रेनिंग दी जाए, जो मनचलों के अातंक से परेशान है। लिहाजा उनकी ये जिद बन गई और 17 साल में ही प्लेयर बनने के लिए ट्रेनिंग लेने नासिक चली गई। वहां से लौटने के बाद बच्चे से लेकर सीनियर सिटीजन को कराटे ट्रेनिंग दे रही है। अभी तक 7 हजार से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दे चुकी है।

घर वाले डरते थे, ऐसी फील्ड में जाने से किया था मना

छोटी सी उम्र में बरखा को घर से बाहर भेजने और कराटे प्लेयर बनने से रोका करते थे। घर वालों की सोच थी कि छोटी उम्र में कैसे ट्रेनिंग ले पाएगी। हालांकि उसने नासिक में ट्रेनिंग ली। इतना ही नहीं, घर परिवार के लोगों भी थोड़ा डरे हुए रहते थे, लेकिन आज उसकी काबिलियत को देखकर परिवार का हर कोई व्यक्ति उसे सलाम करता है।

निर्भया कांड के बाद युवतियों को ट्रेनिंग देने का बढ़ा हौसला

दिल्ली में निर्भया कांड के बाद लड़कियां असुरक्षित महसूस करने लगी। इसी दौरान बरखा ने सबसे ज्यादा ट्रेनिंग देने का फैसला किया। इसके बाद वह हर रोज अपने घर के आसपास वाले बच्चों को देने लगी। बरखा बतातीं है कि उसकी ट्रेनिंग क्लास में सबसे ज्यादा लड़कियां ही शामिल होती। प्रदेश के हर जिलों में हर महीने ट्रेनिंग देने पहुंचती है। साथ ही दूसरे राज्य महाराष्ट्र, असम समेत कई राज्यों में पहुंचकर ट्रेनिंग दे रही है।

इन्हें मिला ट्रेनिंग के बाद गोल्ड मेडल

पांच साल तक ट्रेनिंग मिलने के बाद बरखा से सीखे हुए कई प्रतिभागियों ने स्पर्धा में हिस्सा लिया। इन दौरान तमाम राज्यों और जिला स्तरीय प्रतियोगी में गोल्ड मेडल हासिल किए। आरंग के आकाश पाटले, कुसुम चंद्राकर,अर्चना, योगेश मिर्री धमतरी की रानी साहू को कराटे प्लेयर होने के नाते पुरस्कार भी मिल चुके है। इसके अलावा कई और प्रतिभागियों को मेडल मिल चुके है।

हर वर्ग को दे रहीं कराटे ट्रेनिंग

बरखा राजपूत, कराटे मास्टर, अभनपुर

16 साल की उम्र में नासिक ट्रेनिंग के लिए गई। वहां से लौटने के बाद सभी वर्ग के लोगों को ट्रेनिंग दे रही है। कई बार ऐसा हुआ कि घर वाले ऐसा काम करने से मना कर दिए, लेकिन आज कई जगहों से ट्रेनिंग देने के लिए बुलाते है।

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