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राज्य में 58 फीसदी आरक्षण, सुनवाई अब की जाएगी जुलाई के तीसरे सप्ताह में

3 वर्ष पहले
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बिलासपुर | राज्य की आरक्षण नीति में बदलाव के खिलाफ लगाई गई याचिकाओं पर अब 23 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई होगी। 2012 में जारी अधिसूचना के खिलाफ याचिकाएं लगाई गई थीं। राज्य शासन ने 18 जनवरी 2012 को अधिसूचना जारी की थी, इसके तहत लोक सेवा (अजा, अजजा एवं पिछड़ा वर्ग का आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा 4 में संशोधन किया गया था। इसके अनुसार अनुसूचित जनजाति वर्ग को 32 फीसदी, अनुसूचित जाति वर्ग को 12 फीसदी और अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 फीसदी आरक्षण देना तय किया गया था। कुल आरक्षण 58 फीसदी होता है, यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 फीसदी की सीमा से अधिक है। इसके खिलाफ 2012 में ही गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी रायपुर, सतनाम सेवा संघ रायपुर, पीआर खुंटे समेत अन्य ने याचिकाएं लगाई थी।





प्रारंभिक सुनवाई के बाद नोटिस जारी किया गया था। पक्षकारों की तरफ से जवाब प्रस्तुत कर दिया गया है। एक बार बहस पूरी हो चुकी है। गौरतलब है कि अधिसूचना के क्रियान्वयन पर हाईकोर्ट का अंतिम आदेश लागू होना है। प्रदेश में सरकारी नौकरियों में होने वाली भर्तियों के विज्ञापन में इसका उल्लेख भी किया जाता है। मंगलवार को हाईकोर्ट ने इस मामले में 23 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई तय की है।

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