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दो साल बाद भी रेलवे ने राज्य सरकार को नहीं दी जमीन इसलिए सिक्सलेन व डबललेन प्रोजेक्ट अधूरे

3 वर्ष पहले
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हीरापुर-टाटीबंध सड़क निर्माण अधूरा होने की वजह से लोगों की परेशानियां बढ़ रही हैं। दोनों सड़क निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने पहले दूसरे डिविजन को निर्माण के लिए फाइल सौंपी। इसी तरह दूसरी सड़क का निर्माण भी रेलवे की वजह से नहीं हो पाया है। उरकुरा बाईपास मार्ग के लिए राज्य सरकार और रेलवे ने जमीन मामले में फाइल अटका दी है। बाईपास बनाने के दौरान कुछ हिस्सा रेलवे का आ रहा है। इसलिए रेलवे से उक्त जमीन मांगी गई है। इसी की फाइल अटकी हुई है। रेलवे की माने तो उस जमीन पर रेलवे का प्रोजेक्ट पहले से स्वीकृत है इसलिए जमीन नहीं दी गई है।

टाटीबंध से हीरापुर तक पहली सड़क का निर्माण अधूरा, उरकुरा बाईपास नहीं बना पाए

CITY concern

शहर में 51 करोड़ के दो सड़क प्रोजेक्ट दो विभागों के बीच फंसे हैं। वहीं उरकुरा बाईपास मार्ग का निर्माण जमीन न मिलने की वजह से अटका हुआ है।

उरकुरा की इसी रोड को बनाना है डबल लेन।

37 किसानों की जमीन का मुआवजा अटका

इन सड़कों के निर्माण के दौरान किसानों और अन्य लाेगों की जमीन आ गई है। इस वजह से मुआवजा देने की प्रक्रिया अटकी हुई है। इस रूट में 37 से ज्यादा किसानों की जमीन आ रही जिन्हें शासन को मुआवजा देना है। जून से बारिश शुरू होने से प्रोजेक्ट पूरा होने में फिर दिक्कतें आएंगी।

उरकुरा बाईपास का डबललेन अटका

2017 में प्रस्तावित बिलासपुर हाईवे रोड से उरकुरा बस्ती के शनि मंदिर तक बनाए जाने वाले डबललेन को भी अटका दिया है। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में ही पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदारों ने देरी कर दी। शासन ने उसे वित्तीय वर्ष 2018-19 में डाल दिया।

प्रोजेक्ट पूरे न हो पाने के ये भी हैं कारण

हीरापुर-टाटीबंध बाईपास निर्माण करने पीडब्ल्यूडी एक साल बाद तय कर पाई एजेंसी

संभाग तय करने के बाद मुआवजा तय करने में की देरी

उरकुरा रोड़ बनाने के लिए अभी तक जमीन खाली कराने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई

इस निर्माण के लिए राशि तय होने के बाद भी उसकी फाइल दबा दी गई, इसलिए देर हुई

जमीन और मुआवजे में फंसे

एसके शर्मा, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी,रायपुर

हीरापुर-टाटीबंध बाईपास में देरी की वजह मुआवजा प्रकरण हैं,उन्हें भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। जल्द ही प्रोजेक्ट पूरा किया जाएगा।

वहां रेलवे प्रोजेक्ट पहले से स्वीकृत

तनमय मुखोपाध्याय, सीनियर डीसीएम, रेलवे

इस संबंध में चार साल पहले मुद्दा उठा था, यहां रेलवे का प्रोजेक्ट पहले से ही स्वीकृत है। इसलिए यह जमीन नहीं दी जा सकती है।

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