कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर
अखिल भारतीय आदिवासी महासभा ने पत्थलगड़ी को आंदोलन बताते हुए इसे और तेज करने की बात कही है। इस मुद्दे पर सोमवार को नया रायपुर के कैंपियन भवन में आदिवासी संगठनों की बैठक भी बुलाई गई है। यहां आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। महासभा ने मांग की है कि सरकार आंदोलनकारियों से मिलकर बात करे। जानें उनकी क्या मजबूरी है जिसके चलते वे अचानक ऐसे आंदोलन के लिए बाध्य हुए। महासभा के अध्यक्ष मनीष कुंजाम और कार्यकारी अध्यक्ष सीआर बक्शी ने कहा कि राज्य सरकार पुलिस बल के जरिए ग्रामीणों के आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। पत्थलगड़ी को असंवैधानिक बताते हुए लोगों की गिरफ्तारी की जा रही है। सरकार को पेसा कानून के बारे में अध्ययन करना चाहिए। हमारी मांग है कि ग्राम सभा को स्वशासन का अधिकार दिया जाए। यह किसी भी तरह से गलत मांग नहीं है। गांव के संसाधनों पर ग्रामीणों का अधिकार होना चाहिए। तभी उनका विकास होगा। गांव और जंगल के संसाधनों का उपयोग कर दूसरों को फायदा पहुंचाना ग्रामीणों के साथ अन्याय है। जहां तक पत्थलगड़ी की बात है तो प्राचीन काल से ही गांवों की परंपरा रही है कि पत्थर गाड़कर गांव का सीमांकन किया जाता रहा है। उसमें कुछ लिखा गया है तो उसके पीछे का मकसद गांव वालों के सामुदायिक अधिकारों की सुरक्षा है। महासभा ने तय किया है कि सरकार हमसे हमारी परेशानियों पर बात नहीं करेगी तो आगे आंदोलन और भी तेज करेंगे।
आज संगठनों की बैठक बुलाई, तय करेंगे रणनीति
आदिवासी महासभा ने कहा-