पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • आबादी जमीन के शामिल खाते अलग अलग होने तक खरीदी बिक्री की रजिस्ट्री नहीं

आबादी जमीन के शामिल खाते अलग-अलग होने तक खरीदी-बिक्री की रजिस्ट्री नहीं

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
राज्य सरकार ने रायपुर ही नहीं राज्य के सभी जिलों में आबादी जमीन के शामिल खातों को अलग करने का काम शुरू कर दिया है। इसलिए केवल राजधानी में ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में बिना खसरा नंबर के आबादी जमीन की रजिस्ट्री नहीं की जा रही है। अफसरों का कहना है कि जैसे-जैसे खातों की जानकारी ऑनलाइन हो रही है शहरों में आबादी जमीन की रजिस्ट्री होते जाएगी। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक आबादी जमीन के शामिल खाते अलग-अलग नहीं हो जाते इस जमीन की खरीदी-बिक्री की रजिस्ट्री नहीं हो सकती है। दूसरे जिलों की अपेक्षा यह काम राजधानी में बेहद पिछड़ा हुआ है। इस वजह से यह के लोगों को ज्यादा परेशानी हो रही है। राजधानी के सभी पुराने मोहल्ले सदरबाजार, ईदगाहभाटा समेत कई वार्ड ऐसे हैं जहां आधे से ज्यादा जमीन आबादी की है। इसलिए फिलहाल इन सभी वार्डों में जमीन-मकान की खरीदी-बिक्री बंद हो गई है। जिन लोगों के पास आबादी जमीन या इस जमीन पर मकान बने हैं उसकी निगम की टैक्स रसीद है। इस नियम से पहले इसी रसीद के आधार पर रजिस्ट्री हो जाती थी, लेकिन अब बिना अलग खसरे नंबर के रजिस्ट्री नहीं हो रही है। इस वजह से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शहर की आबादी जमीन के साथ ही नजूल की जमीन की भी रजिस्ट्री बंद कर दी गई है।





रजिस्ट्री दफ्तर से मिली जानकारी के अनुसार नजूल जमीन की रजिस्ट्री के दौरान उसमें शीट और ब्लॉक नंबर नहीं मिलता है। इसकी वजह से यह पता ही नहीं चलता है कि नजूल जमीन की वास्तविक लोकेशन क्या है। इसके अलावा ये भी नहीं पता चलता है कि वार्ड में जमीन किस खसरा नंबर या क्षेत्र में स्थित है। इस मामले में पंजीयन महानिरीक्षक को चिट्ठी भी लिखी गई है। फिलहाल अभी तक चिट्ठी का कोई जवाब नहीं आया है। इस वजह से नजूल जमीन की रजिस्ट्री पर भी रोक लगा दी गई है।

खसरा नंबर अलग करवा सकते हैं लोग

पंजीयन विभाग के आईजी कार्तिकेय गोयल ने बताया कि एक ही शामिल खाता होने की वजह से जमीन फर्जीवाड़े के केस बढ़ रहे हैं। एक खाते में जितनी जमीन नहीं है उससे कहीं ज्यादा लोगों की रजिस्ट्री हो गई है। ऐसे फर्जीवाड़ों पर रोक के लिए ही आबादी जमीन का अलग खसरा नंबर और रकबा मांगा जा रहा है। लोग राजस्व विभाग को आवेदन देकर शामिल खाते से अपना खसरा नंबर अलग करवा सकते हैं। इस रिकार्ड को विभाग वाले तत्काल भुइयां सॉफ्टवेयर में अपडेट भी कर रहे हैं। इससे जमीन का रिकार्ड ऑनलाइन भी अपडेट हो जाएगा। एक ही शामिल खाते में लोगों की जमीन भी अलग-अलग दिखाई देगी। जिले के सभी खातों के खसरे नंबर को अलग करने का काम जल्द ही पूरा हो जाएगा। इसके बाद सभी तरह की आबादी जमीन की रजिस्ट्री आसानी से हो सकेगी।

खबरें और भी हैं...