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मनचाहा विषय लेने के सिस्टम से बेचैन रविवि ने कालेजों को दी छूट

3 वर्ष पहले
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पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) की कक्षाओं में एक मनचाहा विषय लेकर पढ़ाई करने का सिस्टम इस साल भी रविवि अध्ययनशाला तक सीमित रहेगा। कॉलेजों में यह फार्मूला लागू नहीं होगा। वहां पुराने पैटर्न से ही पढ़ाई होगी। च्वाइस बेस्ड नामक सिस्टम रविवि अध्ययनशाला में तीन साल पहले लागू किया गया। इसके अनुसार वहां पढ़ाई व परीक्षाएं हो रही है। संभावना थी कि इस सत्र से कॉलेजों में भी इसी फार्मूले के तहत पीजी की पढ़ाई होगी, लेकिन फिलहाल इस पर विराम लगाया गया है।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि इस कोर्स को लेकिन तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। विषय से संबंधित भी कुछ समस्याएं हैं। इसलिए इस सत्र में यह कॉलेजों में लागू नहीं होगा। रविवि में पीजी की कक्षाओं में साल 2016 में यह सिस्टम लागू किया गया। इसके तहत साइंस व आर्ट्स की पढ़ाई इसी फार्मूले से हो रही है। इसमें कोर्स के अलावा किसी दूसरे कोर्स का कोई एक विषय लिया जा सकता है।

जैसे, एमएससी केमिस्ट्री या फिजिक्स वाले मूल विषय के अलावा दूसरा विषय इतिहास, अंग्रेजी आदि भी ले सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि शुरुआत में तो सब ठीक था लेकिन अब यह कोर्स रविवि के लिए ही मुसीबत बन गया है। इसलिए कॉलेजों में इसे लागू करने से रविवि बच रहा है। पिछले तीन साल से प्रयोग के तौर पर ही यह कोर्स रविवि अध्ययनशाला में पीजी कक्षाओं में लागू है। इसके तहत फिजिक्स, केमिस्ट्री, गणित, बायो साइंस, बायोटेक, एम.टेक, एमबीए, इतिहास, भूगोल, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, समाजकार्य, हिंदी, अंग्रेजी, भाषा-विज्ञान, भू-विज्ञान, सांख्यिकी, एमपीएड समेत अन्य विषयों में इसी सिस्टम से पढ़ाई हो रही है।



पास नहीं तो डिग्री अधूरी

च्वाइस बेस्ड सिस्टम के तहत जिस एक अलग विषय की पढ़ाई विद्यार्थी करेंगे उन्हें उस विषय में पास होना होगा। यह जरूरी है। इसके बगैर डिग्री पूरी नहीं होगी। अतिरिक्त विषय भी सौ अंक का है। इसमें 80 अंक थ्योरी और 20 अंक इंटर्नल है। पास होने के लिए विद्यार्थी को 80 में 16 अंक और 20 में चार अंक पाना जरूरी है। छात्रों ने कहा कि शुरुआत में फेल-पास जैसी बात नहीं की गई। यह कहा गया कि एक मनचाहा विषय पढ़ने की छूट दी गई है। लेकिन बाद में इसे अनिवार्य किया गया। कई दूसरे विषयों में शिक्षकों की कमी है। क्लास नहीं लगती है। जिससे परेशानी होती है। इससे कोर्स के अलावा अन्य विषय में पास करना कठिन हो गया। यही अब विद्यार्थियों के लिए भी समस्या बना हुआ है।

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