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एम्स की मोतियाबिंद सर्जरी में जिन दवाओं का उपयोग, वहां के मेडिकल स्टोर से वही गायब

3 वर्ष पहले
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एम्स में मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान जिन दवाओं का उपयोग किया गया, वह अमृत मेडिकल स्टोर से गायब मिला। ड्रग इंस्पेक्टर जब दवाओं का सैंपल लेने पहुंचे, तब इसका खुलासा हुआ। ड्रग विभाग के अफसरों का कहना है कि यह जानबूझकर की गई लापरवाही है। दूसरी ओर मेडिकल स्टोर संचालक की दलील है कि दवाओं का स्टॉक खत्म हो गया था। संक्रमण दवाओं के कारण नहीं फैला, बल्कि एम्स का ऑपरेशन थिएटर ही संक्रमित रहा होगा, क्योंकि ऐसा पहले भी हो चुका है।

एम्स में पिछले गुरुवार को मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद पांच लोगों के आंखों में संक्रमण हो गया था। एम्स प्रशासन ने आनन-फानन में सभी मरीजों की छुट्टी कर दी थी। मरीज अपने साधन से एमजीएम अस्पताल में भर्ती हुए थे। ऑपरेशन में जिन दवाओं का उपयोग डॉक्टरों ने किया, वह एम्स परिसर की ही अमृत फार्मेसी से खरीदी गई थी। दरअसल एम्स में इलाज कराने वाले लोगों को अस्पताल से कोई दवा नहीं मिलती। लैंस से लेकर सीरिंज, निडिल, टेबलेट, ड्राॅप्स, इंजेक्शन मरीजों ने खरीदा। मामले का खुलासा होने के बाद ड्रग विभाग के तीन इंस्पेक्टर मेडिकल स्टोर गए और दवाओं का सैंपल मांगा। इस पर वहां मौजूद कर्मचारियों ने कह दिया कि ऑपरेशन में उपयोग की गईं दवाइयाें और लैंस का स्टॉक खत्म हो गया है। इसे लेकर ड्रग इंस्पेक्टर व कर्मचारियों के बीच विवाद भी हुआ था। इंस्पेक्टरों ने सख्ती दिखाई तो दवा के एक से दो सैंपल दिए गए। बाकी दवाओं के बारे में कहा गया कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन में इन्हीं दवाओं के उपयोग के कारण संबंधित बैच की दवा खत्म हो गई है।

ड्रग इंस्पेक्टर सैंपल लेने पहुंचे एम्स पहुंचे, तब फूटा मामला

मेडिकल स्टोर संचालक ने कहा- खत्म हो गया इन दवाइयों का स्टॉक

हिमाचल के इंजेक्शन प्रदेश में बैन किए

राजनांदगांव के क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल में जिस एमबी डेक्सा (डेक्सामेथासोन) इंजेक्शन को लगाने के बाद 30 लोगों की एक आंख की रोशनी जाने की आशंका है, उस पर पूरे प्रदेश में बैन लगा दिया गया है। अभी तक कोलकाता नेशनल लेबोरेटरी से इसकी रिपोर्ट नहीं आई है। सोलन हिमाचल प्रदेश में बने इंजेक्शन का बैच नंबर एमवी 7 जे 38, निर्माण की तारीख अक्टूबर 2017, एक्सपायरी डेट सितंबर 2019 है। यह वायल 30 मिलीमीटर का है। इंजेक्शन मार्टिन एंड ब्राउन बायो साइंस कंपनी की है। डूमरतराई की श्रीगणेश एजेंसी ने विभिन्न जिलों के स्टॉकिस्ट को 2000 से ज्यादा वायल बेचे थे। एजेंसी ने यह इंजेक्शन वापस मंगवाया था। केवल 35 वायल वापस आए। बाकी बिक चुके थे।

नाम नहीं बता रहे दवाइयों का

मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान कौन से लैंस, इंजेक्शन, टेबलेट व ड्राॅप्स का उपयोग किया गया, इसकी जानकारी न एम्स प्रशासन दे रहा है और न ही मेडिकल स्टोर संचालक। एम्स के अफसरों का कहना है कि दवाओं की सूची जांच कमेटी को सौंप दी गई है, इसलिए इसका नाम बता पाना संभव नहीं है। जबकि मेडिकल स्टोर संचालक का कहना है कि उनके पास दवाओं की पूरी सूची है।

मेडिकल स्टोर वाले का गंभीर आरोप- दवा नहीं, ओटी में संक्रमण

जांचने को लिए थे 51 सैंपल

इधर आंखों में संक्रमण फैलने के बाद एम्स के माइक्रो बायोलॉजी विभाग ने जांच के लिए 51 सैंपल लिए थे। इसमें सर्जरी में उपयोग होने वाली दवाओं से लेकर लैंस भी शामिल था। प्रारंभिक जांच में कोई बैक्टीरिया नहीं मिला है। इसका खुलासा एम्स के ही अधिकारी कर रहे हैं। सवाल उठता है कि जब ड्रग इंस्पेक्टर को उपयोग की गई दवाओं का सैंपल नहीं मिला तो एम्स को कैसे मिल गया?

अमृत फार्मेसी के प्रभारी दिलीप मिश्रा ने मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान उपयोग किए गए दवा को बैक्टीरिया रहित होने का दावा किया है। उन्होंने एम्स प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पहले भी एम्स का ऑपरेशन थिएटर संक्रमित हुआ है। इसके कारण बंद रखा गया था। संक्रमण ओटी में हुआ होगा, न कि दवाओं के कारण मरीजों की आंखों में मवाद व सूजन हुआ था। मिश्रा ने दावा किया कि वह बड़ी कंपनियों का दवा बेचता है, इसलिए सब स्टैंडर्ड व नकली होने का सवाल ही नहीं उठता।

हो सकता है, स्टॉक खत्म हो गया होगा

मेडिकल स्टोर प्रभारी का यह कहना कि ओटी में संक्रमण रहा होगा, यह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा। सभी मरीजों को सर्जरी के लिए मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी होती है। हो सकता है कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन में उपयोग की गई दवा का स्टाॅक खत्म हो गया हो। कुछ सैंपल ड्रग विभाग वाले जांच के लिए ले गए हैं। डॉ. अजय दानी, मेडिकल अधीक्षक एम्स

संक्रमण ओटी के कारण

मेडिकल स्टोर से दवा गायब करने का आरोप सही नहीं है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन में जिस दिन संक्रमण फैला, उसी दवा को 100 से ज्यादा मरीजों को बेचा जा चुका था। आखिर तब संक्रमण क्यों नहीं फैला। 5 अप्रैल को ही संक्रमण क्यों फैला? इससे स्पष्ट है कि संक्रमण दवाओं के कारण नहीं बल्कि ओटी के कारण फैला होगा। दिलीप मिश्रा, प्रभारी अमृत फार्मेसी एम्स

डेक्सा दूसरी कंपनी की

ऑपरेशन में डेक्सामेथासोन इंजेक्शन लगा है, लेकिन यह राजनांदगांव के क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल में उपयोग वाला नहीं है। यह दूसरी कंपनी का है। मरीजों के बिल में इसका जिक्र है। अमृत फार्मेसी के संचालक ने भी इसकी पुष्टि की है कि डेक्सा का उपयोग किया गया है।

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