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रिश्तों में कड़वाहट से डाइबिटीज, ऐसा ही रहा तो 2020 तक हर तीसरे आदमी को हार्ट प्रॉब्लम भी

3 वर्ष पहले
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कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

बेहतर स्वास्थ्य के लिए आदर्श जीवनशैली होनी चाहिए। आज भागदौड़ की जिंदगी में उचित आहार, विचार, व्यवहार, नींद और व्यायाम का अभाव है। देश में डाइबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसका कारण रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट है। इससे तनाव पैदा होता है और तनाव कई तरह की घातक बीमारियों को जन्म देता है। इनमें से एक है डाइबिटीज। दूसरी तरफ हार्ट अटैक के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। ऐसा ही रहा तो 2020 तक 100 में से हर तीसरे आदमी को दिल की समस्या होगी। यह बातें रविवार को विधानसभा रोड स्थित शांति सरोवर में मुंबई से आए डॉ. दिलीप नलगे ने रखे।

रविवार को यहां 5 दिवसीय राजयोग हेल्थ शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन गृह सचिव अरूण देव गौतम, क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी, डॉ. दिलीप नलगे और ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने किया। डॉ. नलगे ने आगे कहा कि लोगों को कई घातक बीमारियां भी हो रहीं हैं। आप बीमार नहीं है, इसका ये मतलब नहीं है कि आप स्वस्थ हैं। मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक शांति भी जरूरी है। इसके लिए आप योग करें और अपनी आदतों और व्यवहार में बदलाव करें। कई बीमारियां हमें अंदर ही अंदर कमजोर करती हैं। जब तक हमें बीमारी का पता चलता है तब तक वह बढ़कर लाइलाज हो जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भी बीमारी का न होना ही स्वस्थ होना नहीं है। मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही संपूर्ण स्वस्थ कहलाता है। स्वस्थ रहने के लिए 5 बातों उचित आहार, सभी से प्रेमपूर्ण व्यवहार, शारीरिक व्यायाम, राजयोग मेडिटेशन और सही जीवनशैली का पालन करना जरूरी है। आयुर्वेद का कहना है कि सही आहार लेंगे तो दवा की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर सही आहार नहीं लेते हैं तो दवाई भी कुछ नहीं कर सकती है। जो व्यक्ति गुस्सा नहीं करता, अल्कोहल नहीं लेता, प्रिय बातें करता है, उसकी तबीयत भी ठीक रहती है। यह सभी बातें रसायन की तरह मनुष्य को स्वस्थ बनाने में मदद करती हैं।

स्वास्थ्य सुधार को लेकर आयोजित शिविर में पहले ही दिन बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

लोगों को जागरूक होने की जरूरत

डॉ. दिलीप नलगे ने आंकड़े देते हुए बताया कि साल 1960 में 100 में से एक व्यक्ति को हृदयरोग हुआ करता था पर आज यह दर बढ़कर 17 तक पहुंच गई है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अनुसार यदि यही गति रही तो साल 2020 तक हर तीसरे व्यक्ति को हृदयरोग होने की संभावना है। पहले यह बीमारी 40 से 50 वर्ष की उम्र में हुआ करती थी, लेकिन आजकल 25 से 35 साल की उम्र में ही होने लगी है। लोगों को जागरूक करने के लिए ही हर साल सितंबर माह के अंतिम रविवार को विश्व हृदय दिवस मनाया जाने लगा है।

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