कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर
कामदेव ने एक बार श्रीकृष्ण से इंद्रियों पर जीत पाने की शर्त रखी। कामदेव के अंहकार को नष्ट करने के लिए भगवान ने शर्त स्वीकारी। इसके लिए उन्होंने गोपियों के साथ निष्काम भावना से महारासलीला की।
शरद ऋतु में रासलीला के दौरान गोपियों को भगवान के सानिध्य पर अधिकार का घमंड हो गया तो भगवान वहां से अंतरध्यान हो गए। जब गोपियों को भूल का अहसास हुआ तो वे रोने लगीं। न्यू चंगोराभाठा के गणपति नगर में चल रही भागवत कथा में महंत गोपालशरण देवाचार्य ने यह विचार रखे। उन्होंने आगे कहा कि जब गोपियां रोने लगीं तो भगवान ने गोपियों पर दया की और वहां प्रगट हुए। दोबारा उनके साथ काम भावना से रहित होकर महारासलीला में झूमे। जब कामदेव ने यह देखा तो दूसरों के मन को मथने वाले कामदेव का अंहकार नष्ट हो गया। कंस वध का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान को मारने की इच्छा से कंस ने अक्रूर को मथुरा भेजा। वे भगवान को यज्ञ के बहाने लेने गए थे। सभी गोपियों ने भगवान को रोकने के लिए रथ के पहियों को अपने हाथों से पकड़ लेती हैं। गोकुल पहुंचते ही भगवान तरह-तरह की लीलाओं से मथुरावासियों को अभिभूत कर देते हैं। वे कंस का वध कर पृथ्वी का भार कम करते हैं। आचार्य मनीष शरणदेव ने बताया कि कथा में मंगलवार को सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वर्णन किया जाएगा। कथा के दौरान आयोजक उमेश व्यास, प्रवीणा व्यास, रुपाली व्यास, अभिषेक तिवारी, गोविंद झा आदि मौजूद रहे।