कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर
ज्ञान मार्ग का अपना लक्ष्य है। भक्ति मार्ग का अपना। दोनों पक्षों में ईश्वर की सत्ता को लेकर कोई मनभेद नहीं है। दरअसल, दोनों ही पक्षों का लक्ष्य एकमात्र परमात्मा की खोज और उस तक पहुंचना है। यह बातें सोमवार को भनपुरी के विजय चौक में चल रही भागवत कथा में पं. लोकेश कृष्ण महाराज ने कहीं।
उन्होंने आगे कहा कि ज्ञानी व्यक्ति अपने त्याग, तपस्या और ज्ञान मार्ग के जरिए ईश्वर को प्राप्त करता है। यानी वह अपने बल पर अपने मन में बैठे विकारों को हटाते हैं और हृदय में परमात्मा को बिठाते हैं। वहीं भक्ति मार्ग वाले ईश्वर से साफ-साफ कहते हैं कि वे अपनी बुराई खुद से दूर नहीं कर सकते। वह प्रभु से मांग करते हैं कि वे उनकी बुराइयों को दूर करें। भक्ति और ज्ञान में फर्क बस इतना है कि ज्ञानी अपने बल और परमात्मा पर भरोसा कर भगवान की कृपा प्राप्त करना चाहता है। ज्ञानी व्यक्ति को खुद सजग होना पड़ता है जबकि भक्त को भगवान पर निर्भर होना पड़ता है। जब उद्धव गोपियों को ज्ञान देते हैं तब गोपियां कहती हैं कि हमारे पास 10-20 मन नहीं है। हमारे पास तो एक ही मन है और वह भी भगवान को समर्पित है। अंत में उद्धव गोपियों के चरण रज को अपने माथे पर लगाकर खुद को धन्य समझते हैं। इस दौरान भाजपा नेता अजय साहू, पूर्व पार्षद चंद्रकली पांडेय, भनपुरी महिला समूह की अध्यक्ष धनलक्ष्मी साहू, डॉ. जनक साहू, प्रवचनकार पं. पूरन महाराज आदि विशेष रूप से मौजूद रहे।