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गुस्सा पालना गरम कोयले को हाथ में रखने के बराबर, इसमें आप खुद जलेंगे

3 वर्ष पहले
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कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

नकारात्मक भावनाएं हमसे गलत काम करवाती हैं। जलना, चिंता करना, डरना और गुस्सा नकारात्मक भावना है। इससे मानसिक शक्ति कमजोर होती है। तबीयत भी बिगड़ती है। सबसे खतरनाक गुस्सा है। किसी के प्रति मन में गुस्सा पालकर रखना जलते कोयले को हाथ में रखने के समान है। दूसरे को नुकसान पहुंचाने से पहले आप खुद ही इसमें जल जाएंगे। यह विचार बुधवार को चौबे कॉलोनी स्थित प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में प्रिया दीदी ने रखे।

उन्होंने आगे कहा कि ईर्ष्या तब पैदा होती है जब हम किसी और की तुलना खुद से करने लगते हैं। उन्हें नीचे गिराने की कोशिशों में लग जाते हैं। होना यह चाहिए कि हम उनकी अच्छाइयों को अपनाएं। हीन भावना भी इसी तरह की बीमारी है। इसमें इंसान को लगने लगता है अमुक व्यक्ति किसी काम का नहीं। वह कुछ नहीं कर सकता। उसकी जिंदगी के कोई मायने नहीं हैं। ऐसे विचार धीरे-धीरे खुद को निराशा में धकेल देते हैं। नकारात्मक भावनाओं पर विजय पाना है तो महापुरुषों को पढ़ें। उनकी जिंदगी को समझें। न केवल समझें बल्कि अपने जीवन में लागू भी करें। राजयोग मेडिटेशन का भी सहारा लें। कहीं सैर पर निकलें। प्रकृति की खूबसूरती का आनंद लें। प्रेरणादायी पुस्तकें पढ़ें। बीते पलों के सुखद लम्हों को याद करें। ऐसा करने पर आप पाएंगे कि आपके अंदर की नकारात्मक भावनाएं खत्म हो रहीं हैं और आपके जीवन में आनंद-उमंग का संचार हो रहा है।

ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में बुधवार को बच्चों ने फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में भाग लिया।

कश्मीर हमारा, छत्तीसगढ़िया-सबले बढ़िया पर जज भी हो गए भावुक

पहले सत्र में जहां बच्चों को नकारात्मक भावनाओं को दूर करने के सुझाव दिए गए वहीं दूसरे सत्र में बच्चों ने फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता के जरिए देश प्रेम और सामाजिक एकता का संदेश दिया। इस कॉम्पीटिशन में बच्चों ने काफी उत्साह के साथ अलग-अलग विषयों पर अपनी प्रस्तुति दी। फैंसी ड्रेस कॉम्पीटिशन में खुशी वाधवानी कश्मीरी लड़की बनकर आईं। उन्होंने कहा कि कश्मीर हमारे देश का अभिन्न हिस्सा है ओर यह हमारा है। यही हमारे देश सिर पर मुकुट की तरह है। अर्जुन बनिया ने किसान के रूप में संदेश दिया कि किसान अन्नदाता है। किसानों से उनकी जमीन मत छीनो, नहीं तो देशवासियों का पेट भरने वाला किसान खुद भूखा मर जाएगा। सुमन साहू ने छत्तीसगढ़ की महिला के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा छत्तीसगढ़िया-सबले बढ़िया। सादगी और अपनापन यहां की संस्कृति है। अभिमन्यु महानंद पौधे के ड्रेस में मंच पर आए। उन्होंने पर्यावरण सरंक्षण का संदेश देते हुए बताया कि जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन जरूरी है। ऑक्सीजन बनाने के लिए पौधों का होना जरूरी है। लोकेश साहू ने सैनिक के रूप मेंं प्रस्तुत किया। उन्होंने यहां लोगों के बीच देश प्रेम का संदेश दिया। इसी प्रकार दीपिका निषाद ने परी, हर्षिता पवार ने मराठी लड़की, मुस्कान ने बंगाली बाला, आर्ची साव ने गुजराती महिला, गौरव तांडी ने नेता और विशाल वाधवानी ने पंजाबी के रूप में अपनी प्रस्तुति दी। यहां कश्मीर हमारा और छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया की प्रस्तुति देखकर निर्णायक भी भावुक हो गए और ताली बजाकर बच्चों का प्रोत्साहन किया। निर्णायकों ने कहा कि आजकल के छोटे-छोटे बच्चे भी काफी प्रतिभाशाली हैं। उनका जीवंत प्रदर्शन प्रेरणा समर कैंप में देखने को मिला। सबसे बड़ी बात थी बच्चों का बढ़ा हुआ आत्म विश्वास।

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