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रेलवे प्लेटफॉर्म पर बनेगा किड्स जोन, बच्चों को भोजन के साथ ही खेलने के लिए खिलौने भी देंगे

3 वर्ष पहले
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रायपुर डीबी स्टार

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और रेलवे चिल्ड्रन इंडियाज के सहयोग इस योजना को शुरू किया जा रहा है। इस योजना के तहत ए और बी श्रेणी के स्टेशनों में एक-एक कमरा तैयार किया जाएगा। जहां पर खेलने के लिए खिलौने रखे जाएंगे। दरअसल, देशभर के प्लेटफॉर्म में लगभग पांच मिनट में एक अनाथ बच्चे पहुंचते है। इस लिहाज से रेलवे उन बच्चों को गलत संगति में न जाएं, इसलिए जागरुक करेंगे। वहीं बच्चे के मन से डर का माहौल दूर किया जा सकेगा। वहीं सामाजिक संगठनों से मिलकर उन बच्चों को बेहतर माहौल देने के लिए गाइड किया जाएगा।

8 जून से शुरू की जाएगी योजना

इसकी शुरुआत देशभर में 8 जून से की जाएगी। जाे कि देश के सभी स्टेशनों पर इसके लिए जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें रेलवे और राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के लोग रेलवे स्टेशन पर आने वाले लोगों को इसको लेकर जागरुक करेंगे।

4 साल में मिले 35 हजार बच्चे

देशभर के रेलवे परिसरों मंे पिछले चार साल में 35 हजार ऐसे बच्चे मिले हैं। जिन्हंे रेल महकमे ने असामाजिक तत्वों के चंगुल में जाने से बचाया है। वहीं एसईसीआर जोन में पिछले चार में 26 सौ बच्चे मिले हैं। जिसमें से रायपुर रेलवे स्टेशन में 900 बच्चे शामिल हैं। रेलवे का आंकड़ा देखे तो हर पांच मिनट में एक ऐसा बच्चा रेलवे स्टेशनाें में आता है।

स्टेशनों पर बनाए जाएंगे इनके लिए विशेष कक्ष

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन के रायपुर बिलासपुर सहित सभी ए और बी कैटेगरी वाले स्टेशनों में एक विशेष कक्ष बनाया जाएगा। जहां पर इन बच्चों को रखा जाएगा। इसके बाद इनके परिजनों को ढूंढ़ने का कार्य किया जाएगा। वहीं परिजनांे के नहीं मिलने पर इन बच्चों को रेलवे महिला बाल विकास को देगा । जहां इन्हंे बाल आश्रमों में रखा जाएगा। अभी ऐसे बच्चांे के मिलने पर रेलवे स्टेशन के आरपीएफ पोस्ट में परिजनों की खोज तक रखा जाता है। जिससे बच्चांे को परिवारिक वातावरण नहीं मिल पाता है।

चाइल्ड हेल्प डेस्क दे रहा सेवा

वहीं ऐसे बच्चों को बचाने के लिए रेलवे मंे चाइल्ड हैल्प डेस्क पहले से ही काम कर रहे हैं। इसके लिए 1098 हेल्प लाइन नंबर जारी किया गया है। जिसमें ऐसे बच्चों के बारे में सूचना देने पर उन बच्चों को परिजनों से मिलाए जाने का कार्य किया जाता है।

इन्हें दिया जाएगा प्रशिक्षण

रेल कर्मचारियों और कुलियों तथा स्टाल संचालकों सहित अन्य हितधारकों को ऐसे बच्चों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए एनसीपीसीआर के अधिकारी कर्मचारी प्रशिक्षण देंगे। ताकि उन्हंे रेलवे परिसर में ऐसे बच्चे मिले तो वे उनको सही सलामत रेलवे के अधिकारियों के पास पहुंचा सकें। रेलवे बोर्ड ने इसके लिए सभी जोनांे को निर्देश पुस्तिका जारी की है। जिन स्टेशनों में अभी तक एसओपी की शुरुआत नहीं हुई है।

रेलवे बोर्ड से निर्देश मिला है

 रेलवे बोर्ड परिजनों से बिछड़े या घर से भागकर आए बच्चों की सुरक्षा को लेकर शुरू से ही संवेदनशील है। वहीं अब इसी क्रम में ऐसे बच्चांे के अंदर से डर दूर करने व असामाजिक तत्वों की चंगुल से बचाने के लिए यह व्यवस्था शुरू करने काे लेकर निर्देश जारी किया है। इसके लिए आगामी 8 जून से सभी रेलवे स्टेशनों में जागरुकता अभियान भी चलाया जाएगा। संतोष कुमार, सीनियर पीआरआे, एसईसीआर

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