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19 साल से खिलाड़ियों को दे रहे ट्रेनिंग, अब तक 200 से अधिक खिलाड़ी उतरे नेशनल में

3 वर्ष पहले
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स्पोर्ट्स रिपोर्टर | रायपुर

राजधानी में पिछले 19 सालों से गर्ल्स फुटबॉल की ट्रेनिंग दानी स्कूल में दी जा रही है। 1999 में 18 खिलाड़ियों से इसकी शुरुआत हुई थी। आज यहां 50 से अधिक खिलाड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं। पूर्व सहायक जिला क्रीड़ा अधिकारी चितरंजन बघेल को नेशनल में पहले मेडल के लिए पांच साल तक इंतजार करना पड़ा। 2004 में राज्य की अंडर-19 गर्ल्स टीम ने सागर में हुए नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता।

यह पहला मौका था जब गर्ल्स टीम ने मेडल जीता। इसके बाद टीम ने 2007 में महाराष्ट्र में हुए स्कूल नेशनल में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके बाद गर्ल्स टीम पिछले 11 साल से मेडल नहीं जीत सकी है। बघेल ने बताया कि खेल मैदान की कमी की वजह से उनकी प्रैक्टिस पूरी तरह नहीं हो पाती। अगर खिलाड़ियों को अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर मिले तो वे फिर से मेडल जीत सकते हैं। इनकी कोचिंग में अब तक 200 से अधिक खिलाड़ी नेशनल में उतर चुके हैं।

Achievement

पूर्व जिला क्रीड़ा अधिकारी चितरंजन बघेल रोजाना 50 खिलाड़ियों को दे रहे ट्रेनिंग

प्रेरणा 3 बार एशियन चैंपियनशिप के कोचिंग कैंप में

राजधानी की एकमात्र वुमेंस फुटबॉल खिलाड़ी प्रेरणा मिश्रा का चयन एशियन फुटबॉल चैंपियनशिप के लिए कोचिंग कैंप में हुआ था। प्रेरणा 2010, 2011 और 2012 में कैंप में शामिल हुई थी। इसके अलावा प्रेरणा अब दिसंबर में होने वाले इंडियन वुमेंस लीग की तैयारी कर रहीं हैं। वहीं राजधानी की शालिनी यादव ने अपनी एनआईएस की पढ़ाई पूरी कर ली है। वो अब दानी और राजकुमार कॉलेज में वुमेंस फुटबॉल सिखाती हैं। उन्होंने भी अपने खेल की शुरुआत इसी मैदान से की थी।

खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देते हुए कोच चितरंजन बघेल।

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