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सिंगापुर में काम करते हुए अफसर ने रायपुर स्मार्ट सिटी में COO का पद संभाला, सैलरी भी ली

3 वर्ष पहले
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छत्तीसगढ़ में नियुक्तियों में गड़बड़ी का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड में की गई नियुक्तियों में फर्जीवाड़े की बात सामने आ रही है। स्मार्ट सिटी लिमिटेड में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) के पद पर जिस अफसर की नियुक्ति की गई है, उसके दस्तावेजों की जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। सिंगापुर की जिस कंपनी में अफसर ने खुद को डायरेक्टर होने का दावा किया है, उस कंपनी को छोड़ने से पहले ही अफसर ने न सिर्फ स्मार्ट सिटी में सीओओ का पद संभाल लिया, बल्कि 15 दिन का वेतन भी ले लिया। दस्तावेजों में गफलत का आलम यह है कि जिस तारीख में उसकी नियुक्ति का आदेश जारी हुआ, उससे पहले से ही वे ज्वाइनिंग दे चुके थे, जिसका दस्तावेज में उल्लेख भी है।

28 सितंबर 2016 को हुई बैठक में रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड में 11 अलग-अलग पदों पर नियुक्ति का निर्णय लिया गया। इसके बाद एक एचआर एजेंसी नियुक्त की गई। एजेंसी ने विभिन्न पदों के लिए आवेदन मंगाए और इनके आधार पर सीओओ के पद पर गौरव मिश्रा, निरूपमा प्रधान को लीगल एडवाइजर और उप प्रबंधक के लिए करण कुमार की नियुक्ति की।

दस्तावेज में 29 मई का आदेश और 16 को दे दी ज्वॉइनिंग

सिंगापुर की इंटस्ट्रैट कंसल्टिंग कंपनी में पदस्थ गौरव मिश्रा ने दो अलग-अलग पदों सीओओ और प्रोक्योरमेंट स्पेशलिस्ट के लिए एक ही आवेदन मेल से एचआर एजेंसी के पास भेजा। जबकि दोनों ही पदों के लिए अलग-अलग आवेदन देना था। मिश्रा को आरएससीएल कंपनी ने 16 मई को नियुक्ति दे दी। जबकि नोटशीट में नियुक्ति आदेश का दिनांक 29 मई बताया गया है। मिश्रा ने जो दस्तावेज स्मार्ट सिटी कंपनी के पास जमा किए हैं, उसमें लिखा है कि वे 22 मई 2017 तक कंपनी में सेवाएं देंगे। जबकि 16 मई 2017 को सीओओ के पद पर नियुक्ति दी गई। इस आधार पर 16 मई से 31 मई का वेतन भी दिया गया। खास बात यह है कि मिश्रा द्वारा कंसल्टिंग कंपनी की तरफ से नियुक्ति और रिलीविंग का कोई दस्तावेज भी जमा नहीं कराया गया है। 15 दिन की सैलरी 90 हजार रुपए दी गई। वर्तमान में उन्हें 1.80 लाख महीने मिल रहा है।

जिसे इस्तीफा भेजा, उसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं

सरकार के पास भेजी गई शिकायतों की भास्कर ने अपने स्तर पर पड़ताल की। इसमें नोटशीट से लेकर इनटस्ट्रैट कंपनी के प्रोफाइल की जांच की गई। आईटी विशेषज्ञों की मदद से कंपनी के प्रोफाइल की पड़ताल करने पर जो तथ्य सामने आया। वह चौंकाने वाला था। जिस कंपनी में सितंबर 2012 से डायरेक्टर होने का दावा किया गया था। उस कंपनी के विषय में कहीं कोई जानकारी नहीं मिली। काफी मशक्कत के बाद एक फेसबुक पेज जरूर मिला जिसमें कंपनी के विषय में उल्लेख है। तथ्यों की पड़ताल से जो जानकारी मिली, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह कंपनी खुद गौरव मिश्रा द्वारा ही बनाई गई थी। कंपनी के दूसरे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर रवि श्रीवास्तव, जिसे गौरव ने इस्तीफे की सूचना दी थी, उनके बारे में भी इंटरनेट में खोजबीन की गई लेकिन उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई।

इन तथ्यों में कोई सच्चाई नहीं है

रायपुर स्मार्ट सिटी में मेरी नियुक्ति को लेकर विभाग में की गई शिकायत की जानकारी मिली है, लेकिन इन तथ्यों में कोई सच्चाई नहीं है। मैं 14 मई 2017 को भारत आ गया था और 16 मई को मैंने चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर पद पर ज्वॉइनिंग की थी। -गौरव मिश्रा, सीओओ रायपुर स्मार्ट सिटी

15 दिन की सैलरी की नोटशीट। सीओओ गौैरव ने पदभार करने के बाद 22 मई 2017 को कंपनी के दूसरे डायरेक्टर को इस्तीफे की सूचना दी।

जहां काम किया, उसका पता गूगल भी नहीं ढूंढ़ पाया

अफसर गौरव ने जिस कंपनी में डायरेक्टर होने का दावा किया है, गूगल में सर्च करने पर उस कंपनी के नाम से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिल पाई। कंपनी का पता भी नहीं मिला। कंपनी के नाम से एक फेसबुक आईडी बनी है, जिसमें कंपनी के सितंबर 2012 में स्थापित किए जाने का उल्लेख है। उल्लेखनीय है कि मिश्रा ने भी अपने सीवी में सितंबर 2012 से ही इस कंपनी में डायरेक्टर होने का दावा किया है। कंपनी की तरफ से जो प्रमाणपत्र जारी किया गया है, उसमें कंपनी में मिश्रा के शेयर होने का भी उल्लेख है।

2016 से बंद है कंपनी की वेबसाइट| कंपनी की वेबसाइट इंटस्ट्रैट डॉट कॉम नाम से 31 जुलाई 2012 को पंजीकृत की गई। गौरव मिश्रा ने इसका पंजीकरण कराया। यह वेबसाइट 31 जुलाई 2016 से बंद है। उसमें किसी तरह की कामकाज और कर्मचारियों को लेकर जानकारी नहीं दी गई है।

जवाब मांगा है, इसके बाद होगी जांच

हमने सीधे तौर पर उनकी नियुक्ति नहीं की है बल्कि एचआर एजेंसी से हुई है। भर्ती में गड़बड़ी को लेकर मेरे पास शिकायत आई है। गौरव मिश्रा और एचआर एजेंसी दोनों से ही जवाब मांगा है। उनके उत्तर आने के बाद उसकी जांच की जाएगी और आगे की कार्रवाई होगी। - रजत बंसल, एमडी-सीईओ, रायपुर स्मार्ट सिटी

सिंगापुर टैक्स हैवन स्टेट|विश्व में कुछ देश ऐसे हैं, जिनको पर्सनल और कार्पोरेट टैक्स की दरें कम होने के कारण टैक्स हैवन स्टेट कहा जाता है। ऐसे देशों में कंपनी खोलने और उसकी परिचालन लागत कम होने से यहां पर कई फर्जी नाम से कंपनियां खोली जाती हैं।

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