कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर
खुश रहने के लिए अपनी सोच को सकारात्मक बनाएं। हमारी सोच का हमारे शरीर पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। जब हम सकारात्मक होते हैं तब हमारे शरीर की सारी ग्रंथियां और कोशिकाएं सही तरीके से काम करतीं हैं, जबकि नकारात्मक विचार आने पर ठीक इसका उल्टा होता है। हमारे शरीर में तरह-तरह के हार्मोंस तेजी से फैलने लगते हैं। बुरा सोचने के सेकंडभर के भीतर हार्मोंस सारी कोशिकाओं तक पहुंच जाते हैं। यह आपको बहुत बीमार कर सकता है। यह विचार सोमवार को विधानसभा रोड स्थित शांति सरोवर में डॉ. दिलीप नलगे ने रखे।
उन्होंने आगे कहा कि हाइपोथैलेमस हमारे दिमाग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बुरा सोचने पर इससे रसायन निकलने लगते हैं। इन्हीं रसायनों के चलते हाइपोथैलेमस द्वारा संकल्पों की सूचना बहुत तेज गति से शरीर के विभिन्न भागों में संचारित होती है। इस तरह मन और शरीर के बीच हाइपोथैलेमस संचार माध्यम की तरह काम करता है। नकारात्मक विचार पैदा होने पर हाइपोथैलेमस से स्ट्रेस हार्मोंस निकलते हैं। यह एक सेकंड मे शरीर की विभिन्न कोशिकाओं तक पहुंच जाते हैं। इससे लीवर में आपात स्थिति के लिए जमा किया गया ग्लूकोज खत्म होने लगता है। इसी का नतीजा है कि गुस्सा करने या बुरा सोचने के बाद आदमी थका हुआ महसूस करता है। उदासी लगती है और इंसान हताश महसूस करता है। मन में बार-बार नकारात्मक विचार आने से लीवर से ग्लूकोज बार-बार निकलता है। इसी वजह से आपको कई गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। वहीं, सकारात्मक सोचने पर हाइपोथैलेमस से नैसर्गिक रूप से एंडोर्फिन नामक द्रव्य निकलता है। यह काम करने की क्षमता बढ़ाने के साथ उमंग-उत्साह और खुशी का संचार करता है। यही कारण है कि बहुत से लोग 18-20 घंटे काम करने के बाद भी नहीं थकते। उसी ऊर्जा से लगातार को करते रहते हैं। इसकी वजह है कि वे अपने काम में रूचि लगते हैं। घटनाओं के प्रति सकारात्मक होते हैं। हमें प्रत्येक दिन की शुरूआत रूचिकर, सकारात्मक और ऊर्जा देने वाले काम करने चाहिए।
सोमवार को बड़ी संख्या में लोग शांति सरोवर में हेल्थ टिप्स लेने पहुंचे।
सफलता सामने खड़ी है
कोशिश करके तो देखिए
उन्होंने आगे कहा कि सफलता ठीक आपके सामने खड़ी है। परेशानी यह है कि हारने के बाद दोबारा कोशिश नहीं करना चाहते। एक बार और काेशिश करके तो देखिए। सफलता को छू भी पाएंगे और चखेंगे भी। तनाव को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है पर इसे कम करने का उपाय जरूर है। ताकि आप इसके दुष्प्रभावों से बच सकें। राजयोग मेडिटेशन को सभी बीमारियों और तनाव का इलाज बताते हुए उन्होंने आगे कहा कि इससे आत्मा को पूरा आराम मिलता है। तनाव से बचने के लिए हर परिस्थिति में खुश रहना सीखें और मेडिटेशन के जरिए अपनी आंतरिक क्षमता को बढ़ाएं। तनाव दो तरह के होते हैं। पहला पॉजिटिव और दूसरा निगेटिव। पॉजीटिव स्ट्रेस जीवन के लिए जरूरी है। इससे हमें मोटिवेशन मिलता है। हमें प्रेरणादायी स्लाेगन और महापुरुषों की तस्वीरों को अपने कमरे में लगाकर रखना चाहिए। इससे दिनभर प्रेरणा मिलती है। पॉजीटिव स्ट्रेस के कारण हमारी रचनात्मक क्षमता भी बढ़ती है।
हमारा मन चार चीजों से मिलकर बना है। विचार, भावनाएं, दृष्टिकोण और स्मृति या यादें। मन और शरीर के बीच गहरा अंतरसंबंध है। मन के विचारों के साथ-साथ जीवन की विभिन्न परिस्थितियों, घटनाओं, व्यक्ति और वस्तुओं के प्रति हमारा दृष्टिकोण और पुरानी यादें सीधे हमारी तबीयत को प्रभावित करती हैं।