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एजेंसी पर कार्रवाई न हो, इसलिए किया टर्मिनेट, श्रमायुक्त के आदेश की अनदेखी

3 वर्ष पहले
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रायपुर डीबी स्टार

मामले का खुलासा तब हुआ जब गार्डो ने पीएफ खाते में जमा कराए जाने वाली राशि जांची। साथ ही ईएसआईसी का लाभ लेने के लिए गार्डो ने आवेदन किया। तब सुरक्षा एजेंसी और वेयर हाउस के मैनेजरों से एजेंसी की सांठगांठ का खुलासा 26 सितंबर 2016 को हुआ। इस बीच वेयर हाउस के जिम्मेदारों ने एजेंसी को बचाने उसे टर्मिनेट कर दिया। अब एजेंसी ने डेढ़ करोड़ के भुगतान से पल्ला झाड़ लिया।

यहां नियुक्त किए गार्ड
भारत सरकार के केन्द्रीय भंडारण निगम के आंकड़ों के मुताबिक रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और खरसिया में 12 वेयर हाउस खोले। जहां पर चावल को स्टॉक में रखा जाता है। इसी की सुरक्षा के लिए गार्डाें की नियुक्ति की जाती है। इसी भंडारण के लिए केंद्र ने एजेंसी के माध्यम से गार्डाें की भर्ती करनी होती है। सुरक्षा एजेंसी से सीडब्ल्यूएच ने फरवरी 2015 से जुलाई 2017 तक का अनुबंध था। जबकि 80 कर्मचारियों की नियुक्ति में पात्रता की शर्तो को पूरा किए गए।

ऐसे समझिए...एजेंसी और वेयर हाउस के जिम्मेदारों ने क्या-क्या गड़बड़ी की
भर्ती नियम की अनदेखी
केंद्रीय भंडारण निगम के नियम यह है कि वेयर हाउस की सुरक्षा के लिए 90 फीसदी भूतपूर्व सैनिकों की भर्ती की जानी थी, लेकिन सिविलियन गार्ड की भर्ती कर दी गई।

वेतन भी आधा कर दिया
केंद्र प्रत्येक सुरक्षा गार्ड के लिए 10 हजार से ज्यादा वेतन एजेंसी को भुगतान कर रही थी, लेकिन एजेंसी ने गार्डाें को सिर्फ 5 से 6 हजार रुपए वेतन दिया। जो मूल वेतन का आधा है।

पीएफ-ईएसआईसी नहीं दी
वेतन जमा करते समय सभी सुरक्षा गार्डाें को पीएफ और ईएसआईसी के पैसे जमा करने थे, लेकिन जमा नहीं किए। इसका खुलासा तब हुआ, जब इलाज के लिए ईएसआईसी से अनुमति लेने पहुंचे तब।

सुविधाएं नहीं दी जा रहीं
प्रत्येक गार्ड को तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने थे, लेकिन उन्हें सुविधाएं भी नहीं दी जा रही है। रहने और खाने के लिए भी अतिरिक्त राशि नहीं दी जा रही है।

80 गार्डाें का वेतन और पीएफ भुगतान नहीं किया गया
 सीडब्ल्यूएच के मैनेजरों और सुरक्षा एजेंसी बटालिक के जिम्मेदारों ने मिलकर 80 गार्डो का डेढ़ करोड़ रुपए अटका दिए हैं। श्रमायुक्त ने पाई गई खामी में सीडब्ल्यूएच को एजेंसी द्वारा की गई गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार मानते हुए उसे 23 दिन में भुगतान करने निर्देश दिया था,जबकि डेढ़ माह बाद भी राशि का भुगतान नहीं कराया है। किशन चौरसिया, जनरल सेक्रेटरी, सेंट्रल वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन वर्कस यूनियन एमपी, सीजीेे

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