ट्रिपल पद्मासन करते स्टूडेंट्स।
छत्तीसगढ़ योग आयोग और केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद का तीन दिनी राष्ट्रीय योग महोत्सव शुरू, स्टूडेंट्स ने किया योग डांस
सिटी रिपोर्टर | रायपुर
छत्तीसगढ़ योग आयोग और केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद की ओर से आयोजित तीन दिवसीय \\\"राष्ट्रीय योग महोत्सव\\\' की शुक्रवार को शुरुआत हुई। पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में रखे गए महोत्सव के पहले दिन योग पर आधारित शॉर्ट फिल्म की स्क्रीनिंग और कल्चरल इवेंट रखे गए।
स्कूल-कॉलेज स्टूडेंट्स ने हाई म्यूजिकल बीट्स पर योग डांस परफॉर्म किया। हैरान करने वाली एनर्जेटिक परफॉर्मेंस से स्टूडेंट्स ने फिट रहने के लिए रोज योग करने का मैसेज दिया। श्री महावीर कॉलेज ऑफ नेचुरोथैरेपी एंड यौगिक साइंस की टीम ने दुर्गा स्तुति पर कई आसन किए। छत्तीसगढ़ योग स्पोर्ट्स एसोसिएशन की टीम ने रिदमिक योग डांस किया इस दौरान योगासनों के जरिए योग लिखकर भी दिखाया गया। योग के वाय को सूर्यासन, ओ को पूर्ण धर्नुआसन और जी को वृश्चिक आसन के जरिए पेश किया। सेंटर ऑफ अट्रैक्शन रही ट्रिपल पद्मासन की प्रस्तुति।
फिट रहने योग करने का दिया मैसेज: उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि सांसद रमेश बैस रहे। अध्यक्षता विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रमेश मोदी ने की। उन्होंने फिट रहने के लिए रोज योग करने का मैसेज दिया। समारोह में योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, संत युधिष्ठिर लाल महाराज, वन विकास निगम के अध्यक्ष श्रीनिवास मद्दी, राज्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष लता उसेंडी, युवा आयोग के अध्यक्ष कमल चंद्र भंजदेव, ब्रह्मकुमारी कमला दीदी, डॉ भगवंत सिंह व अन्य मौजूद रहे।
ऐसे करें पद्मासन, इससे चेहरा भी खिलता है
पद्मासन में शरीर बहुत हद तक कमल जैसा प्रतीत होता है। ये बैठ कर किया जाने वाला ऐसा योगाभ्यास है, जिससे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सुख-शांति प्राप्त होती है। तीन स्टूडेंट्स ने ये एक के ऊपर एक बैठने की पोजिशन में किया, इसलिए इसे ट्रिपल पद्मासन नाम दिया गया। एक्सपर्ट्स के अनुसार पद्मासन से चेहरा खिलता है। रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। कॉन्संट्रेशन पावर और मेमाेरी बढ़ती है। सांस फूलना कम हो जाता है। पद्मासन करने के लिए जमीन पर बैठ जाएं। दायां पांव मोड़ें और दाएं पैर को बाईं जांघ के ऊपर रखें। ध्यान रहे दाईं एड़ी से पेट के निचले बाएं हिस्से पर दबाव पड़ना चाहिए। बायां पांव मोड़ें और बाएं पैर को दाईं जांघ के ऊपर रखें। यहां भी बाईं एड़ी से पेट के निचले दाएं हिस्सेे पर दबाव पड़ना चाहिए। हाथों को ज्ञानमुद्रा में घुटनों के ऊपर रखें। रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें। जितनी देर संभव हो करें, फिर सामान्य अवस्था में आ जाएं। आप इसकी अवधि को 1 मिनट से 1 घंटे तक बढ़ा सकते हैं।