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61 हैंडपंपों से बैक्टीरिया युक्त पानी, क्योंकि टॉयलट की गंदगी रिसकर जा रही भीतर

3 वर्ष पहले
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कबीरधाम जिले में 230 गांव के 61 हैंडपंपों से बैक्टीरिया युक्त पानी निकल रहा है। ये हानिकारक बैक्टीरिया आसपास टॉयलेट की गंदगी के रिसाव के कारण हैंडपंपों के पानी में मिल रहा है। इसका चौंकाने वाला खुलासा स्वास्थ्य विभाग के मितानिनों की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट से ग्रामीण क्षेत्र में हड़कंप मचा है।

राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र रायपुर की ओर से हैंडपंपों के पानी की शुद्धता जांचने के लिए मितानिनों को एचटूएस वायल नामक 500 किट उपलब्ध कराई गई थी। पिछले डेढ़ महीने में 110 से ज्यादा मितानिनों ने अपने क्षेत्र के 230 गांवों में करीब 300 हैंडपंपों के पानी का सैंपल लेकर किट से जांच किया। जांच में प्रथम 24 घंटे के अंदर ही 61 हैंडपंपों के पानी का रंग काला पड़ गया, जिससे पानी में बैक्टीरिया होने की पुष्टि की जा रही है। ये रिपोर्ट पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (पीएचई) विभाग को सौंपी जाएगी। फिलहाल ग्रामीणों को इनका पानी पीने या अन्य उपयोग करने पर रोक लगा दी गई है।

बोड़ला में सर्वाधिक 24 हैंडपंपों के पानी में बैक्टीरिया की पुष्टि

बोड़ला ब्लाॅक में सर्वाधिक 24 हैंडपंपों के पानी में बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई है। इसी तरह पंडरिया ब्लॉक के 18, कवर्धा ब्लॉक के 14 और सहसपुर लोहारा ब्लॉक के 5 हैंडपंपों से बैक्टीरिया युक्त पानी निकल रहा है। खास बात ये है कि अब भी 70 से ज्यादा जगहों से पानी जांच की रिपोर्ट आना बाकी है।

जानिए, क्या होता है इस वायल जांच में

राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र रायपुर के प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर प्रबोध नंदा बताते हैं कि जल स्रोताें में बैक्टीरिया की उपलब्धता की जांच के लिए एचटूएस वायल का उपयोग किया जाता है। इस वायल में जांच के लिए पेयजल स्रोत का पानी भरकर रखा जाता है। अगर 24 से 48 घंटे के बीच पानी का रंग काला पड़ जाता है, तो उसमें बैक्टीरिया की पुष्टि होती है।

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