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जब भक्त की रक्षा करने की बात आती है तो भगवान हमेशा तत्पर रहते हैं

3 वर्ष पहले
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कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर न्यू चंगोराभाठा के श्रीगोपाल भवन में चल रही भागवत कथा में संत गोपालशरण देवाचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन किया। कथा में व्यासपीठ से संत गोपालशरण देवाचार्य ने कहा कि भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान नृसिंह के रूप में अवतरित हुए और हिरण्याकश्यप से प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की। भक्त की रक्षा करने के लिए भगवान हमेशा तत्पर रहते हैं। देवताओं के कार्य को सिद्ध करने के लिए भी भगवान ने मोहिनी अवतार लेकर दैत्यों से अमृत की रक्षा की। शुक्रवार को गजेंद्र दृष्टांत के बारे में बताया कि जब मगरमच्छ ने अपने मुंह में गजेंद्र के पैर को पकड़ लिया तो गजेंद्र ने प्राणों की रक्षा के लिए भगवान को याद किया। गजेंद्र का उद्धार करने के लिए भगवान ने श्री हरि का अवतार लेकर तुरंत ही उसके प्राणों की रक्षा की। आज होने वाली कथा के बारे में जानकारी देते हुए आचार्य मनीष मिश्रा ने बताया कि शनिवार को भगवान के वामन अवतार, उसके बाद श्रीराम जन्म की कथा कही जाएगी। इसके बाद धूमधाम से भगवान श्रीकृष्ण का प्रागट्य महोत्सव मनाया जाएगा। कथा में उमेश व्यास, रुपाली व्यास, घनश्याम तिवारी, प्रदीप तिवारी, तिलकचंद तिवारी आदि मौजूद थे।

पत्थर को भी तैरा दिया भगवान के नाम ने

गोपाल शरणदेवाचार्य ने बताया कि भगवान के नाम की विलक्षण महिमा है। इस भगवन्नाम से जल में डूबता हुआ गजराज समस्त शोक से छूट गया, द्रौपदी का वस्त्र अनन्त हो गया, नरसीमेहता के सम्पूर्ण कार्य बिना किसी उद्योग के सिद्ध हो गए, नाम के स्पर्श से सेतुबंधन के समय पत्थर भी तैर गए, मीरा के लिए विष भी अमृत समान हो गया, अवढरदानी शिवजी भी नाम के प्रताप से भयानक विषपान कर गए और नीलकण्ठ बन गए और संसार को भस्मीभूत होने से बचा लिया, व्याध भी ‘राम’ का उल्टा ‘मरा’ जपकर वाल्मीकि बन गए, भक्त प्रह्लाद भी हिरण्यकशिपु द्वारा दी गई समस्त विपत्तियों से छूट गए और धधकती हुई ज्वाला भी उन्हें भस्म नहीं कर सकी, बालक ध्रुव को अविचल पदवी प्राप्त हुई।

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