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स्पीच में भगवान से की मां की तुलना, ड्रामा से दिया बाल विवाह न कराने का मैसेज

3 वर्ष पहले
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पैरी के धार संस्था की ओर से चंगोराभाठा सांस्कृतिक भवन में सम्मान समारोह रखा गया। कार्यक्रम में बस्ती में रहने वाली ऐसी महिलाओं का सम्मान किया गया जो अकेले अपने दम पर बेटियों की बेहतर परवरिश कर रही हैं। इस मौके पर बच्चों के लिए डांस, सिंगिंग, भाषण, कुर्सी दौड़, रंगोली और पेंटिंग कॉम्पिटीशन भी रखा गया। वहीं, महिलाओं को मेहंदी और पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता में हुनर दिखाने का मौका मिला। डांस में जहां बच्चों ने हाय रे सरगुजा... जैसे कई छत्तीसगढ़ी गानों पर फोक डांस परफॉर्म किया तो पेंटिंग में मां की ममता उकेरी। बच्चों ने भाषण में मां को भगवान का दर्जा देते हुए हमेशा उनका ख्याल रखने की बात कही। कार्यक्रम में जोशी बहनें, दुष्यंत, गरिमा शर्मा व अन्य मौजूद रहे।

बच्चों को दें हायर एजुकेशन, न करें बाल विवाह: कार्यक्रम में बच्चों ने बाल विवाह और नशामुक्ति पर आधारित नाटक पेश किया। इसमें दिखाया गया कि गांव में बड़े घर के 16 साल के एक लड़के को नशा करने और जुआ खेलने की लत है। परिवारवालों ने छोटी उम्र की एक लड़की से उसका बाल विवाह ये कहते हुए करा दिया कि शादी के बाद लड़का सुधर जाएगा। लेकिन शादी के बाद भी लड़के में कोई सुधार नहीं हुआ। नशा करने और जुआ खेलने के अलावा कुछ दिन बाद वो लड़की को दहेज के लिए मारने लगता है। लड़की पुलिस से शिकायत करती है। पुलिस लड़के को जेल में बंद कर देती है। इस ड्रामा के जरिए बाल विवाह न करने का मैसेज दिया गया।

पैरी के धार संस्था ने रखा सम्मान समारोह, डांस और सिंगिंग कॉम्पिटीशन भी हुआ

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