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1 महीने की ट्रेनिंग के बाद बच्चों ने किया ड्रामा, समझाई अन्न की अहमियत

3 वर्ष पहले
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श्रीया आर्ट की ओर से संस्कृति विभाग स्थित ऑडिटोरियम में \\\"ये क्या हो रहा है?\\\' और \\\"भुइयां के भगवान\\\' नाटक का मंचन किया गया। नाटक की प्रस्तुति छोटे बच्चों ने दी। आर्टिस्ट ममता अहार पिछले एक महीने में बच्चों को थिएटर की ट्रेनिंग दे रही थीं। ट्रेनिंग के बाद बच्चों को मंच देने के मकसद से नाट्य मंचन रखा गया। \\\"ये क्या हो रहा है?\\\' नाटक में समसामयिक समस्याओं को दिखाया गया। नाटक में दिखाया गया कि स्टूडेंट अपने टीचर को परेशान करते हैं। जुआं खेलते हैं। उन्हें अपना अधिकार तो पता है पर कर्तव्यों का ज्ञान नहीं है। टीचर गलती करने पर मारने के लिए डराती है तो वो धमकाते हैं कि आपको मारने का अधिकार नहीं है।

अगले सीन में दिखाया गया कि एक लड़की खाना बर्बाद करती है, लेकिन एक दिन गाड़ी खराब होने पर ऐसी जगह फंस जाती है जहां उसे कुछ खाने को नहीं मिलता। तभी वहां से चना मुर्रा खाते हुए उसकी कुछ सहेलियां गुजरती हैं। वो उन्हें रोककर खाने को मांगती हैं। लड़की की आदत से वाकिफ सहेलियां कहती हैं ये तुम्हारे स्टैंडर्ड का खाना नहीं है। इसके बावजूद लड़की जिदकर चना मुर्रा मांगकर खाती है। उस वक्त उसे खाने की अहमियत समझ आती है।

श्रीया आर्ट की ओर से रखे गए कार्यक्रम में बच्चों ने \\\"ये क्या हो रहा है?\\\' और \\\"भुइयां के भगवान\\\' नाटक का किया मंचन

\\\"भुइयां के भगवान\\\' नाटक का वो सीन जब किसान कर्ज से परेशान होकर कर लेता है आत्महत्या।

बेटे ने किसान पिता से

कहा- बेच दो खेत...

\\\"भुइयां के भगवान\\\' नाटक दो किसानों की कहानी पर आधारित है। एक किसान के यहां काम करते वक्त मजदूर का हाथ मशीन से कट जाता है। किसान उसका इलाज कराता है लेकिन मजदूर उससे मुआवजे के तौर पर एक एकड़ जमीन का आधा हिस्सा ले लेता है। आगे चलकर वो कर्ज के कारण परेशान होकर आत्महत्या कर लेता है। वहीं, दूसरे किसान का बेटा शहर से पढ़कर आता है और किसान से कहता है कि खेती में क्या रखा है फैक्ट्री लगने वाली है, खेत बेच दो। अच्छे पैसे मिल जाएंगे। लाइफटाइम बैठकर खाओगे। बहन की शादी भी हो जाएगी। किसान कहता है, धरती हमारी मां है और तुम उसे हमसे छीनना चाहते हो। किसान अन्न नहीं उगाएगा तो तुम भी खाना नहीं खा पाओगे। फैक्ट्री के धुएं से धरती रो रही है। फसल बर्बाद हो रही है। ये बातें सुनकर बेटे को पछतावा होता है और वो भी पिता के साथ खेती करने लगता है। नाट्य मंचन के दौरान म्यूजिक का बेहतर इस्तेमाल किया गया।

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