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रिम्स में मोतियाबिंद कांड, अफसर आज करेंगे दस्तावेजों की पड़ताल

3 वर्ष पहले
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मंदिर हसौद स्थित रायपुर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस (रिम्स) में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद दो लाेगों की आंख की रोशनी चली गई है। इसकी जांच करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम बुधवार को रिम्स जाएगी। अधिकारी मरीजों की केस टिकट की जांच करेंगे।

दरअसल रिम्स प्रबंधन ने मरीजों को डिस्चार्ज टिकट ही नहीं दिया था। इस कारण अस्पताल प्रबंधन सवालों के घेरे में है। हाल ही में एम्स में पांच मरीजों की आंखों में संक्रमण हुआ था। इनमें से एक मरीज की आंख की रोशनी पूरी तरह गायब हो चुकी है। बाकी चार मरीजों की आंखों में हल्की रोशनी लौटी है। देवभोग निवासी 70 वर्षीय चित्रांग मरकाम व 65 वर्षीय मुरलीधर दौरा का 20 मार्च को रिम्स में मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्वाति तामस्कर ने किया था। ऑपरेशन के कुछ घंटे बाद मरीजों को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई। उन्हें डिस्चार्ज टिकट तक नहीं दिया गया। इससे यह पता नहीं चल पा रहा है कि मरीजों को कौन-कौन सी दवा दी गई थी। अस्पताल की ओर से यह बड़ी लापरवाही बरती गई। अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम के स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि लापरवाही की जांच की जाएगी। दोनों मरीजों का अंबेडकर अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। चित्रांग की आंख के परदे भी खराब है।

इसके बाद भी मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया। मरीजों ने बताया कि उन्हें रिम्स लाने वाला देवभोग का ही आदमी था, लेकिन उनका नाम नहीं जानते। उनके साथ और भी मरीज वाहन में भरकर लाए गए थे। सभी का स्मार्ट कार्ड से इलाज किया गया। किसी भी मरीज को फालोअप में नहीं बुलाया गया। डॉ. मिश्रा ने बताया कि एम्स के मरीजों की रोशनी पूरी तरह नहीं लौटी है। एक मरीज की आंख की रोशनी लौटने की कोई संभावना नहीं है।

आॅपरेशन के बाद देवभोग के दो मरीजों की आंख की रोशनी गई

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