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135 साल पहले लिखे नाटक के 4 किरदार, जो बताते हैं जीवन का सच

3 वर्ष पहले
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अग्रगामी नाट्य समिति की ओर से शनिवार को कॉमिक प्ले ‘अबू हसन’ की परफॉर्मेंस हुई। रंग मंदिर में जलील रिजवी के डायरेक्शन में हुए इस प्ले में अबू हसन की लाइफ के कई रोचक पहलुओं को दिखाया गया। 135 साल पहले लिखे गए इस नाटक को नए अंदाज में पेश किया गया। बंगाल सहित कई राज्यों में अलिफ लैला की तरह अबू हसन के किस्सों को भी कॉमिक अंदाज में पेश किया जाता है। नाटक में अबू शराबी, बादशाह, पागल और धोखेबाज जैसे किरदार में दिखाई देता है। पागलखाने के सीन में पीड़ित सामान्य नहीं है बल्कि वो पढ़ा-लिखा और समझदार है। इसके जरिए बताया गया कि आज इंसान भी एक पागलखाने में रहता है। पढ़िए, 4 किरदार जो खुशहाल जीवन के मंत्र बताते हैं।

इन प्रमुख किरदारों के जरिए समझिए खुशहाल जीवन के लिए क्या करें, क्या न करें
किरदार- शराबी

संदेश- नशा है मुसीबत की जड़, इससे रहें दूर

अबू हसन आदतन शराबी है और नर्तकियों के साथ ऐश करते हुए शराब पीता है। वो हमेशा दोस्तों के साथ नशे में चूर रहता है। एक दिन शराब पीने के लिए उसे साथ नहीं मिलता। इसलिए वो राजा काे उठा लाता है। राजा को अबू मजेदार इंसान लगता है, लेकिन अबू की राजा बनने की ख्वाहिश सुनकर राजा उसकी शराब में नशीला पदार्थ मिलकार बेहोश कर देता है और अपने साथ महल ले जाता है। इसके लिए बताया गया कि नशा मुसीबत और परेशानी की जड़ है।

किरदार- शराबी

संदेश- नशा है मुसीबत की जड़, इससे रहें दूर

अबू हसन आदतन शराबी है और नर्तकियों के साथ ऐश करते हुए शराब पीता है। वो हमेशा दोस्तों के साथ नशे में चूर रहता है। एक दिन शराब पीने के लिए उसे साथ नहीं मिलता। इसलिए वो राजा काे उठा लाता है। राजा को अबू मजेदार इंसान लगता है, लेकिन अबू की राजा बनने की ख्वाहिश सुनकर राजा उसकी शराब में नशीला पदार्थ मिलकार बेहोश कर देता है और अपने साथ महल ले जाता है। इसके लिए बताया गया कि नशा मुसीबत और परेशानी की जड़ है।

किरदार- बादशाह

संदेश- अपने ओहदे का गुरूर कभी मत करो

कुछ दिन के लिए अबू को बादशाह की गद्दी मिल जाती है और अबू भी खुद को बेताज बादशाह समझने लगता है। एक दिन अबू इतनी शराब पीता है कि वो बेहोश हो जाता है। इसके बाद राजा अबू को उसके घर छुड़वाता है। होश आने पर अबू खुद को राजा समझता है और घमंड दिखाते हुए अपनी मां को कोड़े मारने के लिए सैनिकों को आदेश देता है। निर्देशक ने इस किरदार के जरिए बताया कि अपने पद या ओहदे का गुरूर जीवन में नुकसानदायक साबित होता है।

किरदार- बादशाह

संदेश- अपने ओहदे का गुरूर कभी मत करो

कुछ दिन के लिए अबू को बादशाह की गद्दी मिल जाती है और अबू भी खुद को बेताज बादशाह समझने लगता है। एक दिन अबू इतनी शराब पीता है कि वो बेहोश हो जाता है। इसके बाद राजा अबू को उसके घर छुड़वाता है। होश आने पर अबू खुद को राजा समझता है और घमंड दिखाते हुए अपनी मां को कोड़े मारने के लिए सैनिकों को आदेश देता है। निर्देशक ने इस किरदार के जरिए बताया कि अपने पद या ओहदे का गुरूर जीवन में नुकसानदायक साबित होता है।

किरदार- पागल

संदेश- दूसरों की भावनाओं को भी समझें

नाटक में पागलखाने के सीन को भी दिखाया गया, जिसमें अबू सबकुछ भूलकर खुद को राजा समझता है। उसके इस पागलपन काे खत्म करने के लिए हकीम कोड़े बरसाते हैं। एक किसान से मुलाकात के बाद अबू को याद आता है कि वो राजा नहीं है। ये बात वो लोगों को समझाने की कोशिश करता है, लेकिन कई मुश्किलों के बाद लोग उसकी बातों पर विश्वास करते हैं। इसमें बताया गया कि दूसरों की भावनाओं की कद्र करें।

किरदार- पागल

संदेश- दूसरों की भावनाओं को भी समझें

नाटक में पागलखाने के सीन को भी दिखाया गया, जिसमें अबू सबकुछ भूलकर खुद को राजा समझता है। उसके इस पागलपन काे खत्म करने के लिए हकीम कोड़े बरसाते हैं। एक किसान से मुलाकात के बाद अबू को याद आता है कि वो राजा नहीं है। ये बात वो लोगों को समझाने की कोशिश करता है, लेकिन कई मुश्किलों के बाद लोग उसकी बातों पर विश्वास करते हैं। इसमें बताया गया कि दूसरों की भावनाओं की कद्र करें।

किरदार- धोखेबाज

संदेश- किसी का विश्वास मत तोड़ो

राजा बचपन से राेशनआरा की परवरिश अपनी बेटी की तरह करता है। राजा रोशनआरा का निकाह अबू से कर देता है। पैसों के लिए अबू राजा को धोखा देता है। इसके लिए वो रोशनआरा को अपनी मौत की खबर महारानी तक पहुंचाने और पैसे लाने को कहता है। इसी तरह अबू भी अपनी प|ी की मौत की खबर देकर पैसे लेने राजा के पास पहुंचता है। इसके जरिए बताया गया कि किसी के अटूट विश्वास के साथ कभी भी खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।

किरदार- धोखेबाज

संदेश- किसी का विश्वास मत तोड़ो

राजा बचपन से राेशनआरा की परवरिश अपनी बेटी की तरह करता है। राजा रोशनआरा का निकाह अबू से कर देता है। पैसों के लिए अबू राजा को धोखा देता है। इसके लिए वो रोशनआरा को अपनी मौत की खबर महारानी तक पहुंचाने और पैसे लाने को कहता है। इसी तरह अबू भी अपनी प|ी की मौत की खबर देकर पैसे लेने राजा के पास पहुंचता है। इसके जरिए बताया गया कि किसी के अटूट विश्वास के साथ कभी भी खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।

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