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प्रदेश का पहला कैशलेस सरकारी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, यहां सिनेमाघर और मार्केट भी

3 वर्ष पहले
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राजधानी के बीचोबीच दाऊ कल्याण सिंह भवन (डीकेएस) में आकार ले रहे पहले सरकारी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह सेंट्रल इंडिया का पहला कैशलेस अस्पताल होगा। यही नहीं, इस सरकारी अस्पताल में ऐसी लग्जरी सुविधाएं दी जा रही हैं, जो देश में सरकारी सेक्टर में कहीं नहीं हैं। जैसे, इस अस्पताल में सिनेमाघर और मिनी मार्केट रहेगा।

मरीजों और परिजनों की टेंशन कम करने के लिए 120 सीटर का सिनेमाघर बनाया गया है। इसमें बॉलीवुड और हॉलीवुड की हिट फिल्में चलेंगी। साथ ही, बड़ी सर्जरी का लाइव प्रजेंटेशन तथा खाली समय में क्लीनिकल कांफ्रेंस यहीं होंगी। इसमें 50 फीसदी सीटें मरीजों और परिजनों के लिए मुफ्त रहेंगी। इन सुविधाओं के साथ 510 बिस्तर वाला सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जून में शुरू हो जाएगा। डीकेएस सुपरस्पेशलिटी में सिर से हार्ट और किडनी तक की गंभीर बीमारियों के इलाज में उतना ही खर्च होगा, जितना सरकारी अस्पताल में लगता है।

सोफा कम बेड : जनरल और पेइंग वार्ड में हर मरीज के बिस्तर के पास ऐसा सोफा रहेगा जो बेड बन जाएगा। रात में मरीज के परिजन वहीं सो सकेंगे। इससे उनके सोने की समस्या नहीं होगी।















इसके औपचारिक उदघाटन के लिए राष्ट्रपति को बुलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ साल तक मंत्रालय के रूप में उपयोग की जा चुके डीकेएस भवन को अस्पताल का शेप दिया जा चुका है।



फाॅल्स सीलिंग से लेकर टाइल्स और दीवारों का शेप भी बदला है। अस्पताल के अंदरुनी हिस्से में खास तरह की चादर लगी है, जिससे इंफेक्शन का खतरा कम होगा। आम मरीजों और इमरजेंसी वाले मरीजों का प्रवेश द्वार पूरी तरह से अलग रहेगा।



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120 सीटर सिनेमा घर... मरीजों और परिजनों की टेंशन कम करने के लिए सिनेमाघर बनाया गया है। इसमें बॉलीवुड और हॉलीवुड की हिट फिल्में चलेंगी। साथ ही, बड़ी सर्जरी का लाइव प्रजेंटेशन और कांफ्रेंस भी यहीं होगी।

वेटिंग हॉल

अस्पताल का स्वीट रूम... यहां पर मरीजों को सुकून मिलेगा।

आधुनिक तकनीक से युक्त और अारामदायक होंगे बेड।

पर्ची की लाइन नहीं

अस्पताल में आने वाले मरीज सीधे ओपीडी में आकर बैठेंगे। अस्पताल के टेबलेट ब्वॉय वहीं उनसे सारी जानकारी लेंगे और पर्ची बनवाकर मरीज को डाक्टर तक पहुंचाएंगे। इमरजेंसी वाले मरीज सीधे इमरजेंसी में ले जाए जाएंगे। बुजुर्ग मरीजों के लिए बैटरी से चलने वाली खास गाड़ी रहेगी।

अस्पताल का आईसीयू विभाग इसमें कई बेड लगाए गए हैं।

कैशलेस ऐसे होगा अस्पताल

अस्पताल में प्रवेश करते ही मरीजों को एक कार्ड देंगे। बीपीएल मरीजों का फ्री इलाज होगा, लेकिन कार्ड उनके पास भी रहेगा। जहां भी फीस की जरूरत होगी वहां कार्ड स्क्रैच होगा और बीपीएल लिख जाएगा। स्मार्ट कार्ड होने पर भी अस्पताल के कार्ड का उपयोग होगा।

स्मार्ट कार्ड की रकम उसमें एंटर होती जाएगी। पेमेंट करने वाले मरीजों भी कार्ड लेना होगा। वे अपनी सहूलियत के हिसाब से कार्ड लेंगे। उन्हें हर जगह फीस लगेगी लेकिन कार्ड से ही स्क्रैच होगा।

रिपोर्ट लेकर नहीं घूमेंगे मरीज

अस्पताल में न्यूमोटिक सिस्टम लगाया जा रहा है। इसमें मरीजों की फाइल और रिपोर्ट दूसरे डाक्टरों के पास बाय हैंड नहीं ले जानी होगी। यह सब न्यूमोटिक सिस्टम के तहत सर्पाकार पारदर्शी पाइप से जाएंगी।

किडनी-लीवर ट्रांसप्लांट भी

अस्पताल शुरू होते ही किडनी ट्रांसप्लांट चालू हो जाएगा। अस्पताल अधीक्षक और नोडल अफसर डाक्टर पुनीत गुप्ता ने बताया कि दूसरे चरण में लीवर ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

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