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रायपुर की इस क्लिनिक में पद्मश्री अवार्डी समेत 46 डाॅक्टर नि:शुल्क करते हैं इलाज, पंजीयन शुल्क केवल पांच रुपए रखा ताकि मरीज पर्ची न गुमा दे

3 वर्ष पहले
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जीई रोड, आमापारा स्थित विवेकानंद चैरिटेबल पॉली क्लिनिक। पिछले 50 साल से यहां शहर के 46 नामी डाॅक्टर मरीजों को नि:शुल्क सेवा दे रहे हैं। क्लिनिक में इलाज के लिए केवल एक बार पंजीयन शुल्क लगता है, वह भी मात्र 5 रुपए। वो भी इसलिए ताकि पंजीयन और दवाइयों की पर्ची मरीज गुमा न दे। क्लिनिक में मरीज को दवा भी मुफ्त बांटी जाती है। रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम से जुड़ा यह क्लिनिक 1968 से संचालित है। शुरुआत दो कमरों से हुई, लेकिन आज अलग-अलग बीमारी और जांच के लिए यहां कई कमरे हैं। इनमें अलग-अलग बीमारियों के वरिष्ठ विशेषज्ञ प्रतिदिन आते हैं। हफ्ते में सोमवार से शनिवार तक यह अस्पताल रोजाना सुबह 8 बजे से 11.30 बजे तक खुलता है। शेष|पेज 11



कई नामी डाक्टर यहां रेगुलर

राजधानी समेत प्रदेश के कई जाने-माने डॉक्टर यहां अपनी सेवा दे रहे हैं। यहां नियमित आने वाले डाक्टरों में डॉ. अनिल खाखरिया, डॉ. विप्लव दत्ता, डॉ. प्रीति सक्सेना, डॉ. निधि ग्वालरे, डॉ. अखिलेश दुबे, डॉ. शिल्पा दुबे, डॉ. सिद्धार्थ ठाकुर, डॉ. आशा पांडेय, डॉ. दिलीप लालवानी, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, डा. एसएस वर्मा, डा. सुरेंद्र शुक्ला, डॉ. अरजीत सूर, डॉ. रितेश साहू, डॉ. रोहित दिलवारी, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. रमन श्रीवास्तव, डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, डॉ. मनीष राठौर, डॉ. नितिन प्रसाद शर्मा, डॉ. रुचि दुबे, डॉ. मेघा भागवत, डॉ. धर्मेंद्र भीसाली, डॉ. अंजना मोदी, डॉ. पीए कमाल, डॉ. केके भोई, डॉ. जयवर्धन, डॉ. विष्णु गुप्ता, डॉ. सै. इरफान हुसैन, डॉ. जयश्री दबे, डॉ. गोपाल जनस्वामी, डॉ. के एम कांबले, डॉ. सीके दुबे, डॉ. जीएस देवांगन और डॉ. जयश्री दवे यहां नियमित हैं। फीजियोथैरेपी के लिए डॉ. तोमेश देवांगन, डॉ. मंजरी दुबे और डॉ. प्रेरणा तिवारी भी हैं।

विवेकानंद आश्रम में 50 साल से चल रही है चैरिटेबल पॉली क्लिनिक, इलाज कराने प्रतिदिन आते हैं 400 तक मरीज, फीजियोथैरेपी की भी सुविधा

ओपीडी में इलाज कराते मरीज।

...और कहीं संतुष्टि नहीं

जो संतुष्टि यहां मिलती है और कहीं नहीं। लगता है कि कोई निराश होकर न लौटे। मेरे पिता डॉ. पीएन दाबके भी यहां सेवा करते थे। -पद्मश्री डॉ. एटी दाबके, चाइल्ड स्पेशलिस्ट

35 साल से यहां आ रही हूं

शादी के 4 साल बाद यहां आना शुरू किया था, 35 साल हो गए। मरीज जरूरत और उम्मीद के साथ इंतजार करते हैं। सेवा करने में बहुत अच्छा लगता है।’’ -डॉ. शकुन बागड़ी, गायनेकोलॉजिस्ट

हफ्ते में 2 दिन आता हूं

बचपन से इस क्लिनिक में डाॅक्टरों को सेवा करते देखा। 16 साल से इलाज करने यहां आ रहा हूं। कई साल तक हफ्ते में एक दिन आया, अब दो दिन आता हूं।’’ -डॉ. राजेंद्र परगनिया, फिजीशियन

क्लिनिक में दवा न हो तो खरीदकर देते हैं| क्लिनिक का कामकाज संभालने वाले स्वामी चंद्रकांत तिवारी के अनुसार यहां पैथोलॉजी की सुविधा भी मौजूद है। फीजियोथैरेपी भी यहां होती है, इसका यहां सिर्फ 20 रुपए शुल्क लिया जाता है। एक्स-रे और डिजिटल एक्स-रे की सुविधा भी यहां है। क्लिनिक में कोई दवा उपलब्ध न होने पर उसे मेडिकल स्टोर से खरीदकर दिया जाता है। पंजीयन के बाद मरीजों को ओपीडी में मौजूद डॉक्टरों की टीम के पास भेजा जाता है। वे मरीज की बीमारी की जानकारी लेकर उसे संबंधित विशेषज्ञ के पास भेजते हैं। छोटी बीमारी होने पर उनकी जांच करने के साथ और दवा पर्ची लिखी जाती है। जांच पर्ची लेकर मरीज अस्पताल परिसर में ही बने दवा केंद्र में आते हैं और उन्हें तीन दिन की दवा मुफ्त दी जाती है। तीन दिन के बाद दोबारा मरीज को आकर दिखाने और दवा ले जाने को कहा जाता है।

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