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ईदगाहभाठा में हजारों प्रदर्शनकारी, लगे तीन वार्डों की सड़कें जाम, इसके खिलाफ हड़ताल की तैयारी

3 वर्ष पहले
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शहर का ईदगाहभाठा मैदान शिक्षाकर्मियों के संविलियन की घोषणा के बाद बाकी कर्मचारियों की बढ़ी उम्मीद का केंद्र बन गया है। पिछले 23 दिनों में यहां रोजाना 3 से 4 हजार हड़ताली इकट्ठा हो रहे हैं। कुछ एक दिन के लिए तो कुछ बेमुद्दत। लेकिन इतनी भीड़ और रोजाना दोपहिया और चारपहिया वाहनों को मिलाकर 1 हजार से ज्यादा गाड़ियों की पार्किंग के कारण लाखेनगर, पुरानी बस्ती, सुंदरनगर रोड और आमापारा मार्ग पर दिनभर जाम जैसे हालात बनने लगे हैं। शिकायतें इतनी बढ़ गई हैं कि आसपास के पार्षदों ने ईदगाहभाठा से धरनास्थल हटाने की मांग उठा दी है। उनका कहना है कि लोगों की शिकायतें इतनी ज्यादा हैं कि यहां से धरनास्थल हटाने के लिए अब हड़ताल पर बैठने की नौबत आ गई है।

ईदगाहभाठा मैदान लाखे नगर चौक से लगा हुआ है। यह चौक एक तरह से पुरानी बस्ती, लाखे नगर, सुंदर नगर, डीडी नगर, राजकुमार कालेज, चौबे कालोनी, बूढ़ापारा और ब्राह्मणपारा का जंक्शन है। यहां के लोग दिनभर मैदान से लगे तीन रास्तों से आना-जाना करते हैं। भास्कर टीम ने मैदान के आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक के हालात का जायजा लिया। मैदान पर तीन-चार हजार हड़तालियों के साथ आने वाली हजार से ज्यादा दोपहिया तथा 50 से ज्यादा चारपहिया वाहन मैदान के अलावा इन सड़कों पर भी पार्क किए हुए नजर आए। ट्रैफिक पुलिस तथा पार्षदों का अनुमान है कि इन सड़कों से रोजाना 50 हजार से ज्यादा लोग गुजरते हैं। संकरी सड़कें होने के कारण सुबह 10 से 12 बजे और शाम 5 से 7 बजे तक बुरी तरह जाम लग रहा है। सभी जगह पुलिस और ट्रैफिक कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन वे भी संभाल नहीं पा रहे हैं। रिहायशी इलाका होने की वजह से यहां रहनेवाले भी परेशान हैं। पुरानी बस्ती के निवासी तथा अधिवक्ता आशीष शर्मा ने बताया कि हड़ताल से दिक्कत नहीं है लेकिन इनकी पार्किंग की वजह से सड़क से गुजरना मुश्किल हो गया है। आसपास की सभी सड़कों पर हर घंटे-दो घंटे में 15 मिनट से आधा घंटे तक का जाम लग रहा है।

मैदान के आसपास पुरानी बस्ती, लाखे नगर, अश्विनी नगर, सुंदर नगर, डीडी नगर, बूढ़ापारा और ब्राह्मणपारा के लिए सड़कें, सभी दिन में कई बार जाम

ईदगाहभाठा धरनास्थल पर आसपास के लोगों ने ही लगा ली है कई तरह की दुकानें। प्रदर्शनकारी करते हैं खरीदी।

फायदे में केवल गुमटी वाले कई गुना बढ़ी उनकी कमाई

हड़तालियों की इतनी बड़ी भीड़ की वजह से मैदान के इर्द-गिर्द 50 से ज्यादा ठेले-खोमचे लगे हैं। कई ऐसे युवक भी हैं जिनके पास कोई काम नहीं था, लेकिन यहां ठेले लगाकर कमाई कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के बैनर के तले हड़ताल कर रहे कर्मचारियों की यूं तो कुल संख्या 1 लाख 71 हजार 700 है। परंतु मैदान पर नियमित रूप से 10 से 15 हजार कर्मचारी व अधिकारी मौजूद रहते हैं। हर कर्मचारी के खाने पीने के एक दिन का खर्च लगभग 200 रुपए है। आसपास के दुकानदारों का ही मानना है कि यहां पिछले एक माह से रोजाना 25 से 30 लाख रुपए तक का कारोबार हो रहा है। बरसों से मैदान के आस पास दुकान लगाने वाले इन दुकानदारों की आमदनी पिछले 23 दिनों में 5 से 6 गुना बढ़ गई है। भास्कर ने कई गुमटीवालों से बात की तो उनका कहना था कि जहां वे रोजाना औसतन 300 से 500 रुपए तक की कमाई कर रहे थे, अब यह 2 से 3 हजार रुपए तक भी पहुंच रही है।

धरनास्थल नहीं हटा तो धरना : मृत्युंजय

सुंदर नगर वार्ड के पार्षद मृत्युंजय दुबे ने चेतावनी दी है कि अगर ईदगाह भाठा मैदान से धरनास्थल नहीं हटाया तो धरना शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा कि यह अस्थायी धरनास्थल था, लेकिन पिछले 3-4 महीने से रोजाना 5 से 10 हजार हड़ताली पहुंच रहे हैं। आसपास के दो लाख लोग परेशान हैं।

सिटी का एकमात्र रास्ता यही : मीनल

डीडी नगर वार्ड की पार्षद मीनल चौबे ने बताया कि कई कालोनियों और वार्डों के लोगों के लिए सिटी जाने का एकमात्र रास्ता यहीं से गुजरता है। जाम से लोग ही नहीं, मैं खुद भी परेशान हूं। दस वार्ड पूर्ण या आंशिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। धरनास्थल नहीं हटा तो मैं प्रशासन के पास जाकर आवेदन दूंगी।

वार्ड से रोज फोन, सब परेशान : कृपलानी

कंकालीपारा के पार्षद दीपक कृपलानी ने बताया कि यह रहवासी इलाका है। इन सड़कों से रोजाना 40 से 50 हजार लोग गुजरते हैं। हड़ताली भीड़ से यहां ट्रैफिक सिस्टम गड़बड़ हो चुका है। वार्ड के लोग फोन करके धरनास्थल को बंद करवाने की मांग कर रहे हैं।

पार्षद बोले - आम लोग परेशान जगह बदली जाए

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