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शिक्षाकर्मियों को खुश किया, तो 72 संगठनों के 2 लाख कर्मी हड़ताल पर, सबकी मांग- रेगुलर करो

3 वर्ष पहले
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राकेश पाण्डेय/कौशल स्वर्णबेर/निश्चय कुमार|रायपुर

पंचायत विभाग ने 8 साल की सेवा पूरी करने वाले शिक्षाकर्मियों को भी नियमित करने की कवायद शुरु कर दी है। शिक्षाकर्मियों को उम्मीद है कि चुनाव आचार संहिता से पहले नियमितिकरण को लेकर कोई घोषणा हो सकती है। इनकी संख्या 43 हजार के आसपास है। मई के पहले पखवाड़े में प्रदेश सरकार ने शिक्षाकर्मियों के संविलियन की मांग मान ली थी। इसका असर ये हुआ है कि रेगुलर होने और वेतन बढ़ाने जैसी उन्हीं मांगों को लेकर 54 विभागों के 72 कर्मचारी संगठन पिछले 2 माह से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों को लगता है कि चुनावी साल होने के कारण हड़ताल से सरकार पर दबाव बनेगा और मांगें मान ली जाएंगी। इसलिए प्रदेश में 2 लाख से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

23 दिन से एक ही बैनर ‘छत्तीसगढ़ प्रगतिशील कर्मचारी संगठन’ तले अनशन चल रहा है। राजधानी के ईदगाहभाठा मैदान में इनका जमावड़ा है। इनकी संख्या करीब 1.71 लाख के आसपास है। इसमें विभिन्न विभागों के क्लास वन से लेकर चतुर्थ वर्ग के कर्मचारी तक शामिल हैं। हड़ताली 72 संगठनों के अलावा दर्जनभर संगठन और हैं, जो जनवरी में हड़ताल कर चुके। वे फिर इसकी तैयारी कर रहे हैं। इनमें स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, मल्टीपरपस वर्कर संघ, वन विभाग जैसे संगठनों के 78 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं। भास्कर टीम ने कर्मचारी संगठनों और वित्तीय विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर जब आंकलन किया, तब सामने आया कि अगर कर्मचारियों की मांगें सरकार पूरी करे, तो सरकार पर 3200 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

8 साल की सेवा वाले शिक्षाकर्मियों के भी संविलियन की कवायद शुरू

इससे अधिक सेवा वाले शिक्षाकर्मी मई में हुए थे नियमित, नतीजा...

अभी ये कर रहे हैं हड़ताल

विभाग कर्मचारी

स्वास्थ्य संयोजक 9500 (108 सेवा व संजीवनी) संविदा विभिन्न विभाग 20000

स्वास्थ्य 11000

रोजगार सहायक 10000

ठेकाकर्मी (शासकीय) 20000

ठेकाकर्मी (सीएसईबी) 30000

ठेकाकर्मी (निकाय) 40000

दैवेभो एवं कलेक्टर दर 10000

दैवेभो (वन विभाग) 5000

पोटा केबिन 1500

अनुदेशक 2500

मेहमान प्रवक्ता 700

प्रधानमंत्री आवास योजना 6000

शिक्षा मितान 6000

कंप्यूटर ऑपरेटर (सह.) 2000

जीवनदीप कर्मी 2000

अन्य 5000

कुल (अनुमानित ) 171700

दर्जनभर एेसे भी कर्मचारी संगठन जो जनवरी में हड़ताल कर चुके अब फिर इसकी तैयारी में

अब वन कर्मचारी संघ के 10000 कर्मचारी और लिपिक वर्ग के 22 हजार कर्मचारी हड़ताल की तैयारी में हैं।

तत्काल लागू नहीं हो सकता

सुप्रीम कोर्ट और यूनाइटेड नेशन के चार्टर के अनुसार समान काम के लिए समान वेतन दिया जाना चाहिए। ये बात ठीक है कि उनका यह अधिकार है। लेकिन वित्तीय नियमों के अंतर्गत इसे तत्काल लागू किया जाना संभव नहीं है। फिलहाल, सरकार पर संसाधनों का दबाव बहुत ज्यादा है। फिर भी यदि इनकी मांग मानी जाती हैं, तो इसके लिए सरकार को कर्ज लेना होगा। -सुशील त्रिवेदी, रिटायर्ड आईएएस अफसर

3200 करोड़ का भार आएगा

यदि वेतन संबंधी मांगें मानी जाती हैं तो 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा का भार पड़ेगा। समान कार्य, समान वेतन की मांग वाजिब है। क्योंकि, स्थाई और अस्थाई कर्मचारियों के वेतन में काफी अंतर रहता है। ऐसे में काम प्रभावित होता है। लेकिन दूसरा पहलू यह भी है कि इससे राजकोषीय घाटा बढ़ेगा। सरकार यदि सब्सिडी पर रोक लगाकर इसे लागू करती है तो बजट पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। -अशोक पारख, अर्थशास्त्री

रायपुर स्थित ईदगाहभाठा धरना स्थल।

एमपीडब्लू कर्मचारियों की ग्रेड-पे की मांग नामंजूर हो चुकी, वे फिर हड़ताल की तैयारी में हैं।

सभी कर्मचारियों की मांगें मानीं तो राज्य और केंद्र के बीच खर्च 60-40% के अनुपात में बंटेगा। इस तरह, राज्य को 1280 करोड़ से अधिक और केंद्र को 1920 करोड़ रुपए की व्यवस्था करनी होगी।

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