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साइंस पढ़ना स्ट्रगल जैसा था, उस डिसीजन ने मुझे साइंटिस्ट बना दिया: सौरव

3 वर्ष पहले
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स्टूडेंट्स से इंट्रैक्ट करते प्रो. सौरव पाल।

सिटी रिपोर्टर | रायपुर

एक मौका या डिसीजन आपकी जिंदगी बदल सकता है। स्कूल स्टूडेंट्स से ये बात कही शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित और आईसर कोलकाता के डायरेक्टर प्रो. सौरव पाल ने। मौका था रविशंकर यूनिवर्सिटी में आयोजित 18वें इंस्पायर कैंप का। पांच दिवसीय कैंप के पहले दिन मंगलवार को प्रो. सौरव पाल ने बताया, अगर मैंने लोगों की बात सुनकर सब्जेक्ट चुना होता तो आज यहां नहीं होता। उन्होंने बताया, जब मैंने स्कूल में साइंस सब्जेक्ट लिया तो कइयों ने मुझे टोका। साइंस लेना मेरे लिए स्ट्रगल की तरह था। मेरे पिता इंजीनियर थे, लोगों का कहना था कि पिता इंजीनियर हैं तो तुमने मैथ्स क्यों नहीं लिया। तुम भी मैथ्स की पढ़ाई कर इंजीनियर बन जाओ, साइंस के चक्कर में मत पड़ो। मैंने किसी की बात नहीं सुनी और साइंस की पढ़ाई की। आज स्टूडेंट्स के लिए मनपसंद सब्जेक्ट चुनना थोड़ा अासान है लेकिन हमारे जमाने में ये घरवाले ही तय करते थे कि बच्चा क्या पढ़ेगा। उन्होंने कहा, हमेशा बिलिव्स पर काम करें। जो अच्छा लगता है वहीं करें।

कार्यक्रम में 19 जिलों के 80 स्कूलों के सलेक्टेड 216 स्टूडेंट्स शामिल हुए हैं। इसका मकसद स्कूल स्टूडेंट्स को गाइड कर उन्हें रिसर्च की फील्ड में करियर बनाने के लिए मोटिवेट करना है। सभी स्टूडेंट्स को लैब विजिट भी कराया गया।

इस मौके पर रविवि के कुलपति प्रो केएल वर्मा, एम्स के डायरेक्टर डॉ नितिन एम नागरकर, कैंप के समन्वयक प्रो. मानस कांति देब, डॉ कल्लोल घोष सहित अन्य प्रोफेसर मौजूद रहे।

आज का कार्यक्रम

इंस्पायर कैंप के दूसरे दिन बुधवार को सुबह 9 बजे से साइंटिस्ट प्रो. ताराशंकर पाल और प्रो अंजली पाल स्टूडेंट्स से इंट्रैक्ट करेंगे।

रविशंकर यूनिवर्सिटी में पांच दिवसीय 18वां इंस्पायर कैंप शुरू, आईसर कोलकाता के डायरेक्टर प्रो. सौरव पाल ने स्टूडेंट्स से किया इंट्रैक्शन

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