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घर के सामने दुकान, खाली जगह पर कांप्लेक्स कहीं पार्किंग नहीं, अब टूटेंगे ऐसे 175 निर्माण
राजधानी में अवैध दुकान या कांप्लेक्स बनाकर नियमितीकरण की आड़ में उन्हें बचाकर रखने का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए बनाई गई समिति ने शहर के दो दर्जन वार्डों में पहली बार 175 आवेदन रद्द कर दिए हैं। ज्यादातर आवेदन मकान के सामने दुकानों को नियमित करने या उन कांप्लेक्सों को नियमित करने के हैं, जिनमें पार्किंग नहीं है। टाउन प्लानिंग अफसरों ने सभी स्पॉट का सर्वे करने के बाद रिपोर्ट दे दी है कि इनमें से कहीं भी पार्किंग की जगह नहीं है। इसके बाद समिति ने अर्जियां निरस्त करते हुए सभी आवेदकों को दो हफ्ते दिए हैं, ताकि वे अपना निर्माण खुद तोड़ लें। ऐसा नहीं हुआ तो इस माह के अंत से शहर में बड़ा अभियान शुरू होने वाला है।
नियमितीकरण की सुनवाई के बीच शहर में पहली बार अवैध दुकानों और कमर्शियल निर्माण पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। जिनके आवेदन निरस्त किए गए हैं, उनमें ज्यादातर ने खाली जगहों पर कमर्शियल निर्माण कर लिया था या मकानों के ग्राउंड फ्लोर और आजू-बाजू दुकानें तान दी थीं। कहीं भी पार्किंग नहीं है और लोगों ने इन्हें वैध करने के लिए नियमितीकरण का आवेदन लगा दिया था। आवेदनों के आधार पर टाउन प्लानिंग अफसरों ने स्पॉट वेरिफिकेशन किया, तब पता चला कि किसी के पास पार्किंग का स्पेस ही नहीं है। इसके बाद सभी को पार्किंग डेवलप करने के लिए एक माह की मोहलत दी गई। इसमें भी पार्किंग नहीं बना पाए, तब टाउन प्लानिंग ने फाइनल रिपोर्ट दे दी कि ये निर्माण वैध नहीं किए जा सकते। इस आधार पर कलेक्टर की कमेटी ने इन्हें निरस्त कर दिया। इस फैसले के बाद लोगों को अपना अवैध निर्माण हटाना पड़ेगा।
भास्कर एक्सक्लूसिव
प्रशासनिक अमले ने शुरू की तोड़फोड़।
दो हफ्ते बाद होगी तोड़फोड़
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगर निगम ने इन सभी लोगों को खुद से अवध निर्माण तोड़ने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। इसमें भी निर्माण नहीं हटा तो सरकारी अमला इन्हें तोड़ देगा। जिन वार्डों के आवेदन निरस्त हुए हैं वहां के जोन कमिश्नरों को सूची भेज दी गई है। उन्हें बता दिया गया है कि दो हफ्ते के बाद भी अवैध निर्माण बना रहता है तो वे उसे तोड़ दें। इसकी सूचना नियमितिकरण समिति को भी दें।
तीन माह में सबका निराकरण
नियमितीकरण समिति के पास अभी 13 हजार आवेदन लंबित हैं। अफसरों का दावा है कि इनमें से 44 फीसदी में साइट विजिट कर ली गई है और पता लगा लिया गया है कि कितना अवैध निर्माण वैध हो सकता है, या नहीं। यह रिपोर्ट टाउन प्लानिंग में जमा भी की जा चुकी है। अफसरों का कहना है कि इन सभी आवेदनों का निराकरण दो से तीन महीने में कर दिया जाएगा। बचे हुए सात-आठ हजार आवेदनों के निराकरण में थोड़ा वक्त लगेगा।
अर्जियां दो दर्जन वार्डों की, बिल्डर भी फंसे, अभियान जल्द
इन वार्डों में होगी कार्रवाई
गोगांव, तेलीबांधा, जोरा, बोरियाखुर्द, देवपुरी, रायपुर खास, भाठागांव, गोंदवारा, शंकरनगर, डंगनिया, गुढ़ियारी, कोटा, खमतराई, भनपुरी, चिरहुलडीह, पंडरी, टाटीबंध. डूमरतराई, मोवा, सड्डू, फाफाडीह, हीरापुर, अमलीडीह, आमापारा, मठपुरैना, राजातालाब, देवेंद्रनगर और टिकरापारा के 175 आवेदन निरस्त हुए हैं। सबसे ज्यादा अावेदन राजधानी में आउटर के हैं।
छोटे-बड़े सभी निर्माण शामिल
नियमितीकरण समिति ने जिन लोगों के आवेदन निरस्त किए हैं उनमें 200 वर्गमीटर के छोटे निर्माणों के साथ ही 2500 वर्गमीटर तक के निर्माण शामिल हैं। कई निर्माण छोटे यानी 90 से 150 वर्गमीटर के भी हैं। ये अवैध दुकानों की शक्ल में है। लोगों ने अपने मकान या लगी जगह पर दुकानें बना ली थीं, जिन्हें अवैध माना गया है। ये सभी तोड़ दिए जाएंगे।
ऐसी अधिकांश दुकानें किराए से
जिन लोगों ने मकानों में दुकानें निकालीं, उन्होंने इसका नक्शा पास नहीं करवाया। नक्शा रेसिडेंशियल है, इसलिए दुकानें अवैध मानी गई हैं। ऐसी ज्यादातर दुकानें किराए से हैं। अफसरों ने ऐसे मकान मालिकों को दुकानों के सामने पार्किंग बनाने के लिए कहा था। आसपास जगह नहीं थी, इसलिए लोग पार्किंग नहीं बनवा पाए। इसीलिए मियाद पूरी होने के बाद इनके आवेदन निरस्त किए गए।
लंबित मामले सुलझाने के लिए लगेंगे कई बरस
नियमितिकरण के लंबित मामलों को सुलझाने के लिए अभी एक साल से ज्यादा का समय लगेगा। यह सतत प्रक्रिया है जो लगातार चलती रहेगी। कलेक्टर की सख्ती के बाद अभी प्रकरणों को निपटाने के लिए हफ्ते में दो बार बैठकें हो रही हैं। 16 हजार मामलों को निपटाने में दो साल लगेंगे।
ऐसे में लोगों के पास इंतजार करने अलावा कोई रास्ता नहीं है। जिन लोगों ने अवैध निर्माण को वैध करने के लिए आवेदन दिया है वे भी इस कार्यवाही के चलते अभी बचे रहेंगे।
बिल्डर-कॉलोनाइजर भी शामिल
जिन 175 लोगों के आवेदन निरस्त किए गए हैं, उनमें कुछ बिल्डर और कॉलोनाइजर भी शामिल हैं। इन्होंने दो-चार मकानों के बीच बिना पार्किंग के दुकानें और ऑफिस बना लिए थे। यहां पार्किंग तो बनाई ही नहीं गई थी, और सड़क का कुछ हिस्सा भी अवैध निर्माण में मिला लिया गया था। इस वजह से इन पर सख्ती से कार्रवाई की जाने वाली है।
दो हफ्ते का समय
जिन लोगों ने एक माह की मोहलत के बाद भी पार्किंग नहीं बनाई, उनके आवेदन खारिज किए गए हैं। अगर लोगों ने दो हफ्ते में इन्हें खुद नहीं तोड़ा तो सरकारी अमला तोड़ देगा। -विनीत नायर, संयुक्त संचालक टाउन प्लानिंग