प्रदेश में 20 लाख बे
20 लाख बेसहारा बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांगों की पेंशन सिर्फ Rs.350 माह, 2 साल पहले बढ़े सिर्फ Rs.50, जबकि महंगाई 2012 से अब तक 6.62% बढ़ी
प्रदेश में 20 लाख बेसहारा बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांगों को हर माह बतौर पेंशन प्रति व्यक्ति 350 रुपए मिलते हैं। इसमें 50 रुपए की वृद्धि हुई, वो भी 2 साल बाद। जबकि, महंगाई दर वर्ष 2012 से अब तक करीब 6.62% बढ़ी है। लोगों के पेंशन लेने के लिए आने-जाने में ही करीब 100 रुपए खर्च हो जाते हैं। बुजुर्ग अब कहने लगे हैं कि जब इस पेंशन से पेट ही नहीं भर सकता तो इतनी कम राशि देने का औचित्य क्या है। बजट पूर्व वित्त मंत्री जेटली को 60 अर्थशास्त्रियों ने पत्र लिखकर कहा था- सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में केंद्र वर्ष 2006 से मात्र 200 रुपए दे रहा है। यह कम से कम 500 दिए जाएं। देश में करीब 2.5 करोड़ लोग इससे जुड़े हैं।
सुबह 6 बजे से चप्पल रख लाइन लगाते हैं बुजुर्ग क्योंकि खड़े नहीं रह सकते
ये तस्वीर है शंकर नगर स्थित जोन क्रमांक 3 के दफ्तर की। यहां 10 तारीख को पेंशन मिलती है, सुबह 6 बजे से हितग्राही आकर लाइन लगाकर बैठे थे। बैंक कर्मचारी आते हैं कार्ड और आधार की जांच कर अंगूठा लगाने के बाद भुगतान करते हैं। भास्कर टीम जब मौके पर पहुंची तो देखा बड़ी संख्या में सीनियर सिटीजन बैठे थे। लेकिन बैंककर्मी अब तक आए नहीं थे। इसलिए लोगों ने चप्पल रखकर लाइन बना ली। हितग्राहियों ने बताया कि बैंककर्मी अक्सर यहां सुबह 11 बजे के बाद ही आते हैं, यहां हर माह ऐसे ही चप्पल रखकर लाइन लगती है।
प्रदेश में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पेंशन योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि की स्थिति
वृद्धावस्था- 60 वर्ष से अधिक के ऐसे बजुर्ग जिनका नाम बीपीएल सूची में हो, उन्हें 350 रुपए प्रति माह।
80 वर्ष से अधिक- पेंशन 650 रुपए प्रति माह है। बीपीएल सूची में नाम होना जरूरी है।
विधवा- यह 40 से 79 वर्ष तक की विधवा को मिलती है। नाम बीपीएल सूची में हो। पेंशन 350 रुपए प्रति माह।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना- 350 रुपए प्रति माह ऐसे बच्चे को मिलते हैं जिसकी आयु 6 से 17 वर्ष के बीच हो। इसके अलावा 18 वर्ष से अधिक के सामान्य निशक्त या बौने व्यक्ति जिनका नाम बीपीएल सूची में हो।
सुखद सहारा पेंशन योजना- 350 रुपए महीने- पात्रता- 18 से 39 उम्र की विधवा। 16 साल या उससे अधिक
विकलांग- पेंशन 500 रुपए प्रति माह। आयु 18 से 79 वर्ष के बीच हो, नाम बीपीएल सूची में हो। 80% नि:शक्कता हो।
सोशल सेक्टर में घालमेल|राज्य में इस वर्ष 75 हजार करोड़ का बजट मंजूर हुआ। सोशल सेक्टर पर खर्च 35 हजार करोड़, इसमें निराश्रित और वृध्दजन भी आते हैं पर उन्हें महज 350 रुपए मिलती है पेंशन। सोशल सेक्टर की बाकी राशि सब्सिडरी और मुफ्त वितरण की योजनाओं पर खर्च होगी।
महीने में प्रति व्यक्ति 7 किलो अनाज ही मिलता है
78 वर्ष की हूं और सुबह 7 बजे से पेंशन लेने आईं हूं। पेंशन राशि से अपने लिए राशन तक नहीं ले पाती। बीपीएल कार्ड होने के बाद भी सरकारी राशन दुकान में प्रति व्यक्ति मात्र 7 किलो अनाज ही मिलता है। इतने कम पैसों में पूरे माह का गुजारा कैसे कर सकती हूं। बेटी के घरवाले कुछ मदद कर देते हैं इसलिए जी पा रही हूं। -श्यामा सोनवानी, तेलीबांधा, मौलीपारा निवासी
पेंशन इतनी तो देते कि कहीं हाथ न फैलाना पड़े
70 साल की उम्र में छोटा-मोटा काम करके अपना पेट और दवा के लिए पैसा जोड़ रही हूं। रिक्शा में 20 रुपए खर्च कर निगम मुख्यालय में पेंशन लेने आई थी। कल आने को बोला है, फिर आऊंगी। घर में ऐसा कोई नहीं है जो मेरा सहारा बने। इस लायक पेंशन देते कि कहीं हाथ न फैलाना न पड़े, अब इस उम्र में ठीक से काम भी नहीं कर पाती हूं। -पुनो बाई, टिकरापारा निवासी
एक नजर अब इनकी पेंशन पर
पूर्व सांसद|20 हजार नगद। सप|ीक मुफ्त की रेल यात्रा।
पूर्व विधायक|35 हजार पेंशन। 2 लाख तक सप|ीक रेल यात्रा।
राज्य में सबसे छोटे कर्मी को पेंशन में मिलते हैं 17 से 18 हजार रुपए।
इन सभी की पेंशन में समय-समय पर वृद्धि भी होती है।
... और देश में, दिल्ली में पेंशन 2 हजार रुपए
दिल्ली- 60-69 वर्ष तक के बुजुर्गों को 2000 रुपए, उससे ऊपर आयु वालों को 2500 रुपए प्रति माह।
बिहार- 1000 रुपए प्रति माह।
राजस्थान- 500-750 रुपए प्रति माह।
यूपी- 500 रु. माह।
झारखंड- 600 रु. माह।
कर्नाटक- 500-600 रुपए प्रति माह।
भास्कर विचार
यह पेंशन सहारा तो नहीं
किसी भी सरकारी कर्मचारी को जब एक इन्क्रीमेंट मिलता है तो उसके वेतन में कम से कम 300 से 400 रुपए तक की वृद्धि होती है। सीनियर अफसरों, मंत्रियों और विधायकों के वेतन में एक बार में हजारों रुपए की वृद्धि होती है। ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि हमारे राज्य में बेसहारा बुजुर्गों को पूरे महीने जीवन याापन करने के लिए मात्र 350 रुपए की न्यूनतम पेंशन क्यों दी जा रही है? उनका कोई सहारा नहीं है तभी तो उन्हें सरकारी पेंशन की जरूरत है। इस बात को ध्यान में रखना होगा कि 350 रुपए में से कुछ रुपए तो पेंशन को लेने के लिए आने-जाने में खर्च हो जाते हैं। बेसहारा लोगों के लिए दी जा रही पेंशन क्या वास्तव में सहारा है, यह सोचने का वक्त आ गया है। जरूर सोचें।