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तुलसी होटल हर रिपोर्ट में जर्जर, फिर भी मेयर की समिति 8 महीने से कर रही मंथन

3 वर्ष पहले
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पांच लोगों की जान लेने वाले तुलसी होटल अग्निकांड का मामला पिछले आठ महीने से अपील समिति में अटका हुआ है। जर्जर घोषित हो चुकी इस बिल्डिंग को तोड़ने और नहीं तोड़ने का फैसला इस समिति को लेना है। इस दौरान समिति की चार बैठकें हुईं, लेकिन इस मुद्दे पर किसी बैठक में चर्चा नहीं छिड़ पाई।

शहर में आगजनी की कई घटनाएं हुईं, कई बिल्डिंग आग की लपटों से कमजोर हुई है लेकिन तुलसी होटल को लेकर निगम ने ही सबसे पहले उसे जर्जर घोषित कर दिया था। तमाम जांच रिपोर्टों में भी बिल्डिंग को तोड़ने का आदेश किया गया। अब तकनीकी उलझनें बताकर बिल्डिंग को तोड़ने से ही रोक दिया गया। चर्चा है कि मामला कुछ प्रभावशाली लोगों से जुड़ा है। हादसे के बाद इस मामले में सत्तापक्ष ही नहीं, विपक्ष के कुछ रसूखदार भी पर्दे के पीछे सक्रिय हो गए थे। इसीलिए हादसे में पांच मौतों के बावजूद एक साल बीत गए लेकिन बिल्डिंग पर कार्रवाई नहीं हो सकी।

एक और भवन जर्जर
तुलसी होटल से कुछ दूरी पर ही माणिक सेल्स की बिल्डिंग में भी बड़ी आगजनी हुई थी। यह जर्जर बिल्डिंग तो हादसे के दौरान ही गिरने लगी थी। इसमें भी कोर्ट का फैसला आया था। निगम ने बिल्डिंग मालिक को नोटिस दिया। उसने तोड़फोड़ के नाम पर ऊपरी हिस्से में खानापूर्ति की। अब मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

शहर में बड़ी आगजनी
29 नवंबर 2016 - एटी बिल्डिंग

26 दिसंबर 2016- केटी कांप्लेक्स

9 अप्रैल 2017- तुलसी होटल

16 अप्रैल 17- माणिक सेल्स बिल्डिंग

31 दिसंबर 2017- रविभवन

कुछ जानकारियां और मांगी हैं : महापौर दुबे
एक तरफ इस मामले में अपील समिति की भूमिका चर्चा में है, उधर इस समिति के अध्यक्ष व महापौर प्रमोद दुबे का कहना है कि तुलसी होटल के बारे में समिति ने कुछ जानकारियां और मांगी हैं। उन्हीं के आधार पर फैसला होगा।

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