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छोटे से गांव में खोला 3 कंप्यूटरों का ट्रेनिंग सेंटर 6 राज्यों में फैलाया जाल और ठगे डेढ़ सौ करोड़
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर खुलवाकर सेंटरों के संचालकों से डेढ़ सौ करोड़ की ठगी करने वाले जालसाजों का रैकेट फूट गया। पुलिस ने कंपनी के डायरेक्टर जगन्नाथ दास और अशोक जैना को पकड़ा।
जगन्नाथ कोलकातों और जैन ओडिशा पुलिस को मिला। आरोपियों ने ठगी करने के लिए नया फार्मूला लाया। गांव-गांव और कस्बों में ये प्रचारित किया कि कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर संचालित करने वालों को उद्योगों से सीएसआर एक्टिविटी के तहत फंड दिलवाया जाएगा। ट्रेनिंग सेंटर वालों से उद्योगों का टाइअप यानी लिंक करवाने के लिए एक-एक हजार लिए। इस तरह 11 हजार से अधिक सेंटरों से टाइअप किया। इस तरह करीब डेढ़ सौ करोड़ वसूले। पैसा देने के पहले कंपनी का दफ्तर बंद कर जालसाज और उसके साथी यहां से फरार हो गए। पुलिस ने एक डायरेक्टर जगन्नाथ दास को कोलकाता और अशोक जैना को ओडिशा से पकड़ा। दोनों से पूछताछ की जा रही है। उनसे पुलिस को पूरे रैकेट के बारे में कई अहम जानकारियां मिलीं। पुलिस के अनुसार आरोपी जगन्नाथ दास ने ओडिशा के एक गांव में छोटा सा कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर खोला। वहीं उसे पता चला कि कुछ उद्योग कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी(सीएसआर)के तहत बेरोजगारों को ट्रेनिंग देने के लिए फंड देते हैं। उसी समय उसने सीएसआर के फार्मूले से ठगी का प्लान बनाया। अशोक जैना के साथ मिलकर उसने ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों के कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटरों को निशाना बनाया। सीएसआर मद का झांसा देकर हर सेंटर से एक-एक हजार लिए। इस तरह ग्यारह हजार सेंटरों से करीब करीब सवा करोड़ वसूले और फरार हो गए। एसएसपी अमरेश मिश्रा ने बताया कि ओडिशा गंजाम के जगन्नाथ दास(33) और लूचापाड़ा के अशोक जैना (40) ने सेंटरों को जाल में फंसाने के लिए आईटीएसपीएल कंपनी बनाई। उसके बाद उनसे पैसे वसूले।
ऐसे की ठगी, फार्मूला नया था
इसलिए नहीं हुआ किसी को शक
उन्होंने अपनी कंपनी के बारे में प्रचारित किया कि ये सीएसआर के तहत ट्रेनिंग कराती है। कंपनी का कई बड़े उद्योगों से अनुबंध है। उसके तहत कंपनी जिस सेंटर की सिफारिश करती है, वहां ट्रेनिंग लेने वाले बेरोजगारों को 8-8 हजार भत्ता दिया जाता है। सेंटर वाले इस ऑफर के चक्कर में फंस गए। आरोपियों ने छत्तीसगढ़ के 800 से ज्यादा सेंटरों से संपर्क किया, जो कंप्यूटर ट्रेनिंग से लेकर स्किल डवलपमेंट में मदद कर रहे हैं। उन्हें मुख्यालय ओडिशा ले जाया गया। वहां आरोपियों ने सेंटर संचालकों को बताया कि उनकी कंपनी का देश की कई बड़ी कंपनियों से अनुबंध है। वह कंपनियां सीएसआर के तहत बेरोजगारों को ट्रेनिंग दे रही है। सेंटर में ट्रेनिंग पूरी करने वालों का प्लेसमेंट भी करते है। इसके लिए सेंटर को प्रति छात्र आठ हजार दिया जाता है। इसी ऑफर से सेंटर वाले झांसे में आ गए।
कोलकाता में बनायी कंपनी
गिरोह के मास्टर माइंड जगन्नाथ का गंजाम में कंप्यूटर कोचिंग सेंटर है। जहां वह तीन कंप्यूटर से बच्चों को ट्रेनिंग देता है। इसी दौरान उसकी मुलाकात अशोक से हुई। दोनों कोलकाता चले गए। वहां आरोपियों ने स्वर्ण युग के नाम से प्लेसमेंट कंपनी बनाई। वे कथित तौर पर कुछ कंपनियों के लिए प्लेसमेंट करते थे। उसके बाद उन्होंने आईटीएसपीएल के नाम से कंपनी बनाई। उसी के बाद फर्जीवाड़ा शुरू किया।
90 करोड़ का चेक हुआ बाउंस
आरोपियों ने छत्तीसगढ़ के अलावा गुजरात, ओडिशा, राजस्थान, कोलकाता और दिल्ली में अपनी शाखाएं खोली थी। वहां ऑफिस भी खोले, लेकिन अचानक बंद कर फरार हो गए। जब दबाव बढ़ा तो आरोपियों ने चेक देना शुरू किया। आरोपियों ने 90 करोड़ का चेक जारी किया है, जो बाउंस हो गया। पुलिस ने बाउंस चेक जब्त कर लिए हैं।
पांच खाते हुए सील, एक खाते में 17 करोड़
पुलिस ने आरोपियों के पांच बैंक खाते को सील किए हैं। एक खाते की शुक्रवार को जांच की गई। उसमें 17 करोड़ रुपए थे। पैसे जब्त करने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी गई है। पैसे को कोर्ट के माध्यम से पीडितों में बांटा जाएगा। बाकी खातों की भी जांच की जा रही है।
प्यून को बनाया डायरेक्टर
पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि आरोपियों ने अपनी कंपनी में प्यून को भी डायरेक्टर बनाया है। उसके नाम से भी चेक जारी करते थे।
सेंटरों से ऐसे वसूले पैसे
सेंटर संचालक जालसाजों की बातों में इस तरह फंस गए कि उन्होंने अपनी जेब से प्रति छात्र के हिसाब से ग्यारह हजार छात्रों का 1 करोड़ खुद जमा करवा दिया। उसके बाद सेंटर संचालक दो साल तक बच्चों को ट्रेनिंग भी देते रहे, लेकिन किसी भी सेंटर को फीस का पैसा नहीं मिला। कई बार संपर्क करने के बाद उन्होंने सिविल लाइन थाने में शिकायत की, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
आरोपी फरार हो चुके थे। आरोपी इतने शातिर थे कि उन्होंने सेंटर संचालकों को साफ कह दिया था कि वे किसी भी सूरत में बच्चों से फीस के पैसे न लेंं। फीस का भुगतान सीएसआर एक्टिविटी के तहत उन्हें यानी सेंटर संचालकों को जगन्नाथ व उसके साथी की कंपनी के माध्यम से दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि एक बच्चे की ट्रेनिंग का वे 8 हजार भुगतान करेंगे। इसी लुभावने ऑफर के चक्कर में सेंटर संचालक फंसते चले गए और संख्या इतनी बढ़ गई।