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जैकेट व पेज 1 के शेष

3 वर्ष पहले
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दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना का पहला वेलनेस सेंटर आज खुलेगा

अमिताभ कांत से दैनिक भास्कर ने सवाल पूछे तो उन्होंने कहा कि तैयारी चल रही है। इतना आसान नहीं होता सबकुछ तैयार करना। साल 2017-18 के बजट में डेढ़ लाख हेल्थ सब सेंटर को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में बदलने की घोषणा हुई थी, पर बजट का प्रावधान नहीं किया गया था। 2018-19 के बजट में इस योजना के लिए बजट का प्रावधान किया गया है। इससे इन्हें शुरू करने में आसानी होगी।

किस राज्य में कितने वेलनेस सेंटर बनेंगे...

बिहार 643

छत्तीसगढ़ 1000

गुजरात 1185

हरियाणा 255

राजस्थान 505

झारखंड 646

मध्य प्रदेश 700

महाराष्ट्र 1450

पंजाब 800

हेल्थ वेलनेस सेंटर योजना के बारे में वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं...

वेलनेस सेंटर में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और 3 तरह के कैंसर की जांच होगी। इनमें ओरल, ब्रेस्ट, सर्विक्स कैंसर शामिल हैं। शुरुआती स्टेज में पकड़ा जाएगा।

कितनी बीमारियों का इलाज होगा | हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर 12 तरह की स्वास्थ्य सुविधा होगी। यहां इलाज के साथ-साथ जांच की भी सुविधा भी होगी। यही नहीं जिला अस्पताल में मरीज को जो दवा लिखी जाएगी। वह दवा मरीज को अपने घर के पास के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में उपलब्ध हो, इस पर भी काम चल रहा है।

कौन सी बीमारियां कवर होंगी| मैटरनल हेल्थ और डिलीवरी की सुविधा, नवजात और बच्चों के स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य सुविधा, कॉन्ट्रासेप्टिव सुविधा और संक्रामक, गैर संक्रामक रोगों के प्रबंधन की सुविधा, आंख, नाक, कान व गले से संबंधित बीमारी के इलाज के लिए अलग से यूनिट होगी। इसके अलावा बुजुर्गों के इलाज की सुविधा भी होगी।

भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट | पीड़िता के पिता को मारते सबने देखा, पर नाम कोई नहीं बताता

उन्नाव के माखी गांव से रवि श्रीवास्तव

उन्नाव का माखी गांव। आबादी 12 हजार। भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर और दुष्कर्म पीड़िता इसी गांव के हैं। दोनों के घर के बीच महज 100 मीटर की दूरी है। वहां से 200 मीटर दूर चौराहा है। जहां 3 अप्रैल की शाम पीड़िता के पिता को विधायक के भाई अतुल सिंह ने घर से घसीटते हुए लाकर पीटा था। घर के बाहर बैठे बुजुर्ग बताते हैं- ‘मारते हुए सबने देखा। पर अब कोई नहीं बताता। उसे गांव में घुमा-घुमाकर पीटा गया। वह गाली देता रहा।’ सीबीआई टीम शुक्रवार को पहुंची और 4 घंटे तक परिवार से पूछताछ की। विधायक के घर, अस्पताल और थाने की भी छानबीन की।

भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट | गांव की गलियां सूनी पड़ी हैं....

दुष्कर्म पीड़िता बच्ची को उसके मौसा ने गोद लिया था। क्योंकि मौसा के दो बेटों की दुर्घटना में मौत हो गई थी। गांव से दूर जंगल में उनकी अपनी जमीन है। यहीं पर मकान है। गांव के सरपंच कांत कुमार कहते हैं कि बच्ची गांव की आंगनबाड़ी में ही पढ़ती थी। हर दिन गांव में पानी लेने, खेलने और मवेशी लेकर आती थी। बच्ची का चाचा भी गायब है। बच्ची के लापता होने से 4 दिन पहले भाईयों में झगड़ा हुआ था।

बिलासपुर हाईकोर्ट ने संसदीय सचिवों के खिलाफ दायर की गईं याचिकाएं खारिज की

संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देते कांग्रेस के मो. अकबर ने दो याचिकाएं और रायपुर के राकेश चौबे ने जनहित याचिका लगाई थी। 1अगस्त 2017 को हाईकोर्ट ने संसदीय सचिवों के मंत्री के तौर पर कार्य करने पर रोक लगा दी थी, लेकिन इसके बाद भी उन्हें सभी सुविधाएं देने का आरोप लगाते हुए राकेश चौबे ने अवमानना याचिका लगाई थी। सभी पर एक साथ सुनवाई हो रही है। 16 मार्च को सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन और जस्टिस शरद कुमार गुप्ता की बेंच ने सभी याचिकाएं खारिज कर दी। राज्य शासन की तरफ से महाधिवक्ता जेके गिल्डा और शासकीय अधिवक्ता प्रसून भादुरी ने पैरवी की।

साबित नहीं कर सके संसदीय सचिवों के पास लाभ का पद

छत्तीसगढ़ मंत्री (वेतन तथा भत्ता) अधिनियम 1972 के तहत मंत्रियों को वेतन और भत्ते दिए जाते हैं। याचिकाओं में इस अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती ही नहीं दी गई थी। बावजूद इसके हाईकोर्ट ने अधिनियम के तहत किए गए भुगतानों पर विचार किया। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिवमूर्ति स्वामी इनामदार और अनमोल सिंह के मामलों में दिए गए फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि इस अधिनियम के तहत किए गए भुगतानों की रसीदों से यह साबित नहीं होता कि संबंधित लाभ का पद रखता है। याचिकाकर्ता कोई दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं कर सके हैं, जिससे साबित होता हो कि वे लाभ का पद होल्ड करते हैं।

हमारी उम्मीदों के अनुरूप ही फैसला आया है,निर्णय का सम्मान : रमन

पर कटाक्ष करते हुए कि दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है।उन्होंने कांग्रेस को नकारात्मक राजनीति छोड़ सकारात्मक राजनीति करने की नसीहत भी दी है।

जोगी के लिए काम कर रहे कौशिक, राय कांग्रेस से बर्खास्त

पिछले दिनों राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के व्हिप का उल्लंघन करते हुए कौशिक और राय ने मतदान का बहिष्कार किया था। इस पर नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव काफी नाराज हुए थे। उन्होंने दोनों नेताओं पर कार्रवाई के लिए पीसीसी को पत्र भी लिखा था। इसके बाद ही दोनों नेताओं को पीसीसी की तरफ से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

हताशा भरी कार्रवाई, कार्रवाई का महत्व नहीं :

कांग्रेस से बर्खास्तगी पर विधायक आरके राय ने कहा है कि अभी मुझे फैसले की जानकारी नहीं है, लेकिन अगर इस तरह को कोई फैसला आया है, तो यह कांग्रेस की हताशा भरी कार्रवाई है। हम तो पिछले दो साल से जोगी के साथ हैं। हमने इसकी घोषणा भी की थी, उस समय ये लोग कहां थे। अब इस कार्रवाई का कोई महत्व नहीं है।

जोगी जनाधार वाले नेता, उनके खिलाफ कहे गए शब्द बर्दाश्त नहीं : सियाराम कौशिक ने कहा कि हमने कांग्रेस के खिलाफ काम नहीं किया है। हमने हमेशा बीजेपी की खिलाफत की है। कौशिक ने कहा की इस बार अजीत जोगी के नेतृत्व में सरकार बनेगी। जोगी जनाधार वाले नेता हैं, उनके खिलाफ कहे गए शब्द को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अब आगे सोचेंगे कि क्या करना है।

कांग्रेस में नए उम्मीदवारों की तलाश शुरू

में मिली हार का बदला लेते हुए भाजपा के धरमलाल कौशिक को 6.19 फीसदी मतों से पराजित किया। वहीं, नौकरी छोड़कर राजनीति में कांग्रेस की टिकट पर 2013 में गुंडरदेही से चुनाव लड़ने वाले आरके राय ने 12.68 फीसदी मतों की बढ़त के साथ भाजपा के वीरेंद्र कुमार साहू का पराजित किया था। उल्लेखनीय है कि परिसीमन के बाद 2008 में पहली बार गुंडरदेही विधानसभा सीट से भाजपा के वीरेंद्र कुमार साहू ने कांग्रेस के घनाराम साहू को 1.86 फीसदी मतों से पराजित किया था।


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