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सरकारी कॉलेज, फिर भी संविदा डॉक्टरों के वेतन अलग-अलग

3 वर्ष पहले
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प्रदेश में छह सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, लेकिन इन कॉलेजों में संविदा डॉक्टरों को अलग-अलग वेतन दिया जा रहा है। सबसे ज्यादा वेतन जगदलपुर कॉलेज के डॉक्टरों को दिया जा रहा है जबकि सबसे कम पंडित नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर के डॉक्टरों को मिल रहा है। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के एक ही पद के डॉक्टरों को तीन तरह के वेतन दिए जा रहे हैं, इससे डॉक्टर भी हैरान हंै।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वेतन में बिल्कुल समानता नहीं है, बल्कि ये चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत ही संचालित हो रहे हैं। रायपुर के डॉक्टरों को सबसे कम वेतन दिए जाने पर अधिकारियों का तर्क है कि यहां के डॉक्टर प्रैक्टिस करते हैं। सबसे ज्यादा वेतन जगदलपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को सवा दो लाख रुपए महीने दिया जा रहा है। सिम्स बिलासपुर, राजनांदगांव व रायगढ़ कॉलेज में वेतन समान हैं। अब अंबिकापुर के डॉक्टरों के लिए तीन तरह का वेतन दिया जा रहा है। इसमें गायनी, मेडिसिन, पीडियाट्रिक, सर्जरी, ऑर्थोपीडिक्स व पैथालॉजी के प्रोफेसरों को हर माह 1.60 लाख वेतन मिल रहा है। वहीं नॉन क्लीनिक विभाग के डॉक्टरों जैसे एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, रेडियोलॉजी, एनीस्थिसिया, बाॅयो केमेस्ट्री, माइक्रो बाॅयोलॉजी व फाॅर्माकोलॉजी के प्रोफेसरों को 1.60 से 1.70 लाख रुपए वेतन दिया जा रहा है। अंबिकापुर में प्रोफेसर से लेकर एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर को केटेगरी के अनुसार वेतन दिया जा रहा है। इसके लिए ए, बी व सी कैटेगरी बनाया गया है। केटेगरी अनुसार डाॅक्टरों के वेतन में 10 से 30 हजार रुपए वेतन का अंतर है। अधिकारियों के अनुसार ऐसा डॉक्टरों को लुभाने के लिए किया गया है।

मेडिकल कॉलेजों में वेतन इस तरह

कॉलेज प्रोफेसर एसो. प्राेफेसर असि. प्रोफेसर

रायपुर 1.25 लाख 1.20 लाख 65 हजार

राजनांदगांव 1.65 लाख 1.35 लाख 90 हजार

बिलासपुर 1.55 लाख 1.35 लाख 90 हजार

रायगढ़ 1.55 लाख 1.35 लाख 90 हजार

जगदलपुर 2.20 लाख 1.90 लाख 1.5 लाख

मेडिकल कॉलेजों में जरूरत के अनुसार डॉक्टरों को वेतन दिया जा रहा है। रायपुर में आसानी से डॉक्टर उपलब्ध हो जाते हैं, जबकि अंबिकापुर व जगदलपुर में ऐसा नहीं है। इसलिए वेतन में अंतर है। डॉ. एके चंद्राकर, डीएमई

रायपुर के डॉक्टरों में नाराजगी

अंबिकापुर व दूसरे काॅलेज के डॉक्टरों को ज्यादा वेतन देने का रायपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों में नाराजगी है। उनका कहना है कि रायपुर में मरीजों का सबसे ज्यादा दबाव रहता है। बावजूद शासन केवल यह तर्क देकर कम वेतन दे रहा है कि रायपुर के डॉक्टर प्रैक्टिस करते हैं। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य रहे डॉ. आलोक शुक्ला यह पहले ही कह चुके हैं कि जिन्हें ज्यादा वेतन चाहिए, वह दूसरे मेडिकल कॉलेज ज्वाइन करें। हालांकि उनके बयान से काफी विवाद हुआ था।

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