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आदिवासी सीटों की वोटर लिस्ट में महिलाएं शहरों से अधिक

3 वर्ष पहले
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राज्य में आठ महीने बाद होने वाले चुनावों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिलेगी। वोटरलिस्ट से इसका पता चलता है। इस मामले में आदिवासी इलाकों की महिलाएं मैदानी इलाकों की महिलाओं से आगे हैं। उन्होंने पुरुषों से ज्यादा नाम मतदाता सूची में जुड़वाए हैं। जानकार इसे राजनीति में महिलाओं की बढ़ती दिलचस्पी के रूप में देख रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि धुर नक्सल प्रभावित और राज्य की सबसे दूरस्थ विधानसभा कोंटा महिलाओं की भागीदारी मेें सबसे आगे है। यहां 84 हजार 730 महिलाओं के मुकाबले केवल 76 हजार 735 पुरुष वोटर हैं। इसके बाद चित्रकोट विधानसभा है जहां 84 हजार 368 महिलाओं के सामने सिर्फ 76 हजार 512 पुरुष वोटर हैं। राज्य की ताजा वोटरलिस्ट के मुताबिक इसमें आदिवासी व कुछ अनुसूचित जाति के आरक्षित विधानसभा भी शामिल हैं। इनमें बिंद्रानवागढ़, डोंगरगांव, खुज्जी, मोहला, भानुप्रतापपुर, कांकेर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर, जगदलपुर, चित्रकोट, दंतेवाड़ा, बीजापुर, व कोंटा शामिल हैं। जगदलपुर, खल्लारी, महासमुंद, धमतरी, संजारी-बालोद और राजिम आदि विधानसभा में प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं के नाम वोटरलिस्ट में ज्यादा हैं। ये इलाके भी वनांचल को छूते हैं। रायपुर की चारों विधानसभा सीटों पर महिलाएं पुरुषों से काफी पीछे हैं। बिलासपुर संभाग में मारवाही को छोड़ यही हाल है।

राजधानी से लगे आरंग व धरसीवां, अभनपुर, पाटन विधानसभाओं में महिला वोटर कम हैं। दुर्ग ग्रामीण, वैशालीनगर, अहिवारा, साजा, बेमेतरा, पंडरिया, भाटापारा, बलौदाबाजार, जांजगीर, अकलतरा, पामगढ़, सक्ती, चंद्रपुर, जांजगीर, सरायपाली, बिलाईगढ़, कसडोल में भी स्थित ठीक नहीं है। भानुप्रतापपुर इस मामले में आगे दिखता है तो अंतागढ़ पीछे है। कवर्धा आगे है तो नवागढ़ पीछे है। धमतरी जिले में सिहावा व धमतरी विधानसभा बढ़त पर हैं तो कुरुद पीछे है। सरगुजा संभाग में भी बैकुंठपुर, भटगांव, प्रतापपुर, रामानुजगंज में काफी पीछे है तो भरतपुर, मनेंद्रगढ़, जशपुर, अंबिकापुर थोड़ी कसर रह गई है। रायगढ़, कटघोरा, कोरबा, लोरमी, मुंगेली, तखतपुर, बिल्हा, बेलतरा व मस्तूरी में महिलाओं की भागीदारी कम है।

जानकार इसे राजनीति में महिलाओं की बढ़ती दिलचस्पी के रूप में देख रहे हैं

ये हैं टॉप विधानसभा - (महिलाएं प्रति हजार पुरुषों से आगे)

कोंटा - 1104, चित्रकोट - 1103, दंतेवाड़ा - 1087, बीजापुर - 1077, जगदलपुर - 1056, नारायणपुर - 1052, कांकेर - 1052, भानूप्रतापपुर - 1047, सिहावा - 1036 केशकाल- 1034, कोंडागांव - 1034, बस्तर - 1032, धमतरी - 1027, धरमजयगढ़ - 1027, मारवाही - 1025, महासमुंद - 1024, पत्थलगांव - 1023, बिंद्रानवागढ़ - 1020, मोहला - 1020, डौंडी लोहारा - 1019, खल्लारी - 1017, राजनांदगांव - 1017, सीतापुर - 1014, राजिम - 1011, संजारी-बालोद - 1011, खुज्जी - 1011, कुनकुरी - 1007, रामपुर -1005, कवर्धा - 1004,

क्या कहते है विशेषज्ञ

अायोग के वोटरलिस्ट में नाम जोड़ने व मतदान को लेकर जागरूकता अभियानों का महिलाओं पर असर ज्यादा पड़ा है। न सिर्फ नाम जुड़वाने बल्कि दूरस्थ व आदिवासी इलाकों में वोटिंग का परसेंटेज भी बढ़ा है। - डॉ. आलोक शुक्ला, पूर्व सीईओ छत्तीसगढ़ व पूर्व डिप्टी कमिश्नर केंद्रीय चुनाव आयोग दिल्ली।

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