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निगमों की सामान्य सभा भी दे सकेंगी जाति और मूल निवास प्रमाण-पत्र

3 वर्ष पहले
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राज्य के नगरीय क्षेत्रों में निवास कर रहे आवेदकों के पास अगर जाति और मूलनिवास के संबंध में दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, तो नगर निगमों की सामान्य सभा उस व्यक्ति अथवा परिवार की पहचान कर प्रमाणित कर सकेगी।

निर्धारित प्रारूप में मिले आवेदनो के सभी तथ्यों विचार करने के बाद सामान्य सभा एक अन्य प्रारूप में उसकी जाति और मूल निवास तय करेगी। गलत जानकारी देकर सामान्य सभा आवेदक के खिलाफ अपराध दर्ज किया जाएगा और दाण्डिक कार्रवाई की जाएगी। नगरीय प्रशासन और विकास विभाग ने सभी कलेक्टरों और निगम आयुक्तों को इस सिलसिले में परिपत्र जारी किया है। परिपत्र के साथ आवेदकों और सामान्य सभा के लिए निर्धारित किए गए दो अलग अलग प्रारूप भी संलग्न किए गए हैं।

यह कार्य एक वर्ष तक आयोजित होने वाली सामान्य सभा की बैठकों में पूरा किया जाएगा। और यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि इस आशय से ऐसा कोई व्यक्ति अथवा परिवार शेष नही रह गया है।। अतः ऐसे व्यक्ति अपना आवेदन निर्धारित प्रारूप में नगर निगम द्वारा अधिकृत कर्मचारी के पास जमा कर दें। समस्त तथ्यों पर विचार करने के बाद सामान्य सभा द्वारा इस संबंध में संकल्प पारित किया जाएगा। विभाग ने अपने नये परिपत्र में विभाग ने कहा है कि वर्तमान में कई छोटे गांव अब नगर पंचायत में परिवर्तित हो गए हैं। अतः नगर पंचायतों के उन निवासियों को जिनके पास कोई अन्य साक्ष्य नहीं है, उन्हें जाति प्रमाण पत्र बनवाने में कठिनाई आ रही है। इसलिए ग्रामसभा के साथ-साथ नगर पंचायत और नगरपालिका परिषद के पारित संकल्प को भी साक्ष्य मानने पर विचार किए जा सकने के बारे में निर्देश प्राप्त हुए थे।



इन निर्देशों के अनुरूप नगरपालिक निगमों (शहरी क्षेत्रों) में निवासरत व्यक्तियों, परिवारों को भी उनकी जाति तथा मूलनिवास के संबंध में लोक अथवा निजी दस्तावेजों में साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने पर उनके लिए भी दस्तावेज मान्य करने के संबंध में निर्देश लागू करने का निर्णय लागू किया गया है।





राज्य शासन द्वारा ऐसे व्यक्तियों, ििजनकी जाति तथा जाति प्रमाण पत्र के संबंध में विनिर्दिष्ट तारीखों के पूर्व मूल निवास स्थान के संबंध में कोई लोक अथवा निजी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, उनकी पहचान नगर निगमों की सामान्य सभा की बैठकों के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी। विनिर्दिष्ट तारीख अर्थात् कट ऑफ डेट से अभिप्राय अनुसूचित जाति के संबंध में 10 अगस्त 1950, अनुसूचित जनजाति के संबंध में 6 सितंबर 1950 और अन्य पिछड़ा वर्ग के संबंध में 26 दिसंबर 1984 है। जिनके पास विनिर्दिष्ट तारीखों के पहले के दस्तावेज हैं, उन पर सामान्य सभा विचार नहीं करेगा।

फर्जी पाए जाने पर होगी सजा-- सामान्य सभा मेंआवेदक के समाज और परिवार के जन्म- मृत्यु संबंधी संस्कारों सहित उसकी जाति की बोली, देवी-देवता, परम्परागत व्यवसाय, गांव या आस-पास में रहने वाले किसी समुदाय के लोगों से रोटी-बेटी के संबंध को ध्यान में रखकर उदघोषणा की जाएगी।आवेदक अथवा अन्य व्यक्तियों के द्वारा जानबूझकर दस्तावेजी साक्ष्यों को छुपाकर सामान्य सभा के माध्यम से गलत उदघोषणा करवाई गई है ऐसे प्रकरण जिला सत्यापन समिति को तथा उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति को भेजा जाएगा। छानबीन समिति के निर्णय के अनुसार अपराध पंजीबद्ध कर ऐसे लोगों के खिलाफ दण्डात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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