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जयस्तंभ-शारदा चौक के बीच प्रापर्टी सबसे महंगी टॉप-5 महंगे इलाके में सरकारी-बाजार रेट बराबर

3 वर्ष पहले
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जयस्तंभ चौक से शास्त्री चौक के बीच जीई रोड पर दक्षिण की ओर की प्रापर्टी कलेक्टर गाइडलाइन रेट लिस्ट में सबसे महंगी घोषित कर दी गई है। इनमें भी जयस्तंभ चौक से शास्त्री चौक के बीच करीब 700 मीटर पैच के दोनों ओर की प्रापर्टी सबसे महंगी मानी गई है। इस बार खास बात ये है कि शहर की टॉप-5 सबसे महंगी सड़कों और इलाकों में कहीं भी जमीन का सरकारी रेट यानी कलेक्टर गाइडलाइन रेट तीसरे साल भी नहीं बढ़ाया गया है। इस वजह से यहां सरकारी रेट और बाजार रेट लगभग बराबर हो गया है। इनके अलावा गोलबाजार, एमजी रोड, फाफाडीह, तात्यापारा चौक, स्टेशन रोड, पंडरी और केनाल रोड चौक से पंडरी मार्केट तिराहे तक गाइडलाइन रेट में वृद्धि नहीं होने से यहां भी दोनों भाव बराबर आ गए हैं। पिछले तीन साल से इन इलाकों में प्रापर्टी की खरीदी-बिक्री ठप थी, लेकिन अब दोनों रेट बराबर होने के बाद रियल एस्टेट इस बार इन इलाकों में बड़े प्रोजेक्ट की प्लानिंग में जुट गया है।

राजधानी के इन सबसे महंगे इलाकों में प्रापर्टी की उपलब्धता बहुत कम है। सारी खरीदी-बिक्री पुरानी प्रापर्टी की हो रही है, ताकि इन्हें गिराकर बड़े कारोबारी वहां कांप्लेक्स, शो-रुम या होटल वगैरह बना सकें। राजधानी बनने के बाद ऐसा हुआ भी, लेकिन पिछले तीन साल में कलेक्टर रेट और बाजार मूल्य में काफी अंतर होने से यहां प्रापर्टी की रजिस्ट्री बेहद महंगी पड़ रही थी। इस वजह से खरीदी-बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई। लगातार तीन साल तक जमीन की कीमत नहीं बढ़ने की वजह से दोनों भाव लगभग समान हो गए हैं। इस वजह से इन इलाकों में रजिस्ट्री बढ़ने तथा इस वजह से डेवलपमेंट और ज्यादा होने के आसार हैं।

मंडे पॉजिटिव

कमर्शियल क्षेत्रों में जमीन अभी भी महंगी, इसलिए खरीदी-बिक्री कम

शारदा चौक

नोटबंदी-जीएसटी का असर कम : राजधानी में लगातार तीसरे साल जमीन की सरकारी कीमत नहीं बढ़ने के कारण बिल्डरों का दावा है कि आउटर में जमीन और मकान खरीदना सस्ता होगा। शहर के दर्जनभर वार्ड ऐसे हैं जहां पिछले साल की कीमत में इस साल भी जमीन और मकानों की खरीदी की जा सकती है। रियल एस्टेट के बाजार में नोटबंदी और जीएसटी का असर भी धीरे-धीरे कम हो रहा है। इस वजह से माना जा रहा है कि इस साल जमीन के कारोबार बूम आ सकता है। यही वजह है कि अप्रैल से जून तक कई नई आवासीय योजनाएं भी लांच हो रही हैं।

आउटर में अब और सस्ता

राजधानी के आउटर यानी सड्डू, मोवा, बोरियाखुर्द, सेजबहार, बोरियाकला, सरोना, अमलीडीह, विधानसभा रोड, काठाडीह, रायपुरा, कुशालपुर, महादेव घाट रोड, कबीरनगर, डूंडा, हीरापुर, टाटीबंध, लाभांडी समेत कई जगहों पर जमीन के बाजार भाव और सरकारी कीमत में भारी अंतर था। अब यह अंतर बेहद कम हो गया है। इस वजह से इन जगहों पर इस साल खरीदी-बिक्री तेज होने की उम्मीद है। इन सभी जगहों पर निजी बिल्डरों और सरकारी एजेंसियों के प्रोजेक्ट पहले से चल रहे हैं। इस वजह से लोग यहां की संपत्ति की आसानी से खरीदी कर सकते हैं। उन्हें पिछले साल की कीमत पर ही डेवलप जमीन और मकान उपलब्ध हो रहे हैं। कबीरनगर, हीरापुर और डूंडा में कई नई आवासीय योजनाओं की शुरुआत भी हो गई है। शहर में जो टूबीएचके के फ्लैट 18 से 25 लाख में उपलब्ध हैं। इन जगहों पर यही फ्लैट 12 से 15 लाख में उपलब्ध हैं। कलेक्टर गाइड लाइन में कोई इजाफा नहीं होने की वजह से इस साल भी इसी कीमत में लोग मकान खरीद सकते हैं।

खरीदी-बिक्री भी बढ़ेगी

जमीन की सरकारी कीमत इसलिए नहीं बढ़ाई गई क्योंकि बाजार रेट से अंतर खत्म करना था। यह लगभग समाप्त हो गया है। इससे खरीदी-बिक्री भी बढ़ेगी। ओपी चौधरी, कलेक्टर

प्रोजेक्ट महंगे नहीं होंगे

रजिस्ट्री खर्च कम होने से बिल्डरों के प्रोजेक्ट महंगे नहीं होंगे। सीधा फायदा प्रापर्टी के खरीदार को होगा। इस साल रियल एस्टेट उठने की पूरी संभावना है। शैलेष वर्मा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ क्रेडाई

राजधानी में सबसे महंगी प्रापर्टी यहां

जयस्तंभ से शास्त्री चौक

16728
रु. वर्गफीट

कोतवाली से सदर बाजार

15334 रु. वर्गफीट

जयस्तंभ से फाफाडीह चौक

14869 रु. वर्गफीट

चिकनी मंदिर से शास्त्रीबाजार

13475 रु. वर्गफीट

कचहरी से अंबेडकर चौक

12081 रु. वर्गफीट

(गाइडलाइन रेट के अनुसार, दर्जनभर वार्डों के कमर्शियल कांप्लेक्सों में भी लगभग यही रेट)

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