रायपुर | केंद्रीय जेल में बंद महिला बंदियों ने शिकायत की है कि उन्हें दिया जाने वाला शैम्पू और साबुन पर्याप्त नहीं है। एक महीना भी नहीं चलता। उन्हें कम पड़ जाता है। राज्य सेवा प्राधिकरण ने उन्हें पर्याप्त सामान देने का आश्वासन दिया है। इसी तरह से जेल पहुंचे हाईकोर्ट के जज और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष व उनकी टीम के सामने जेल के बंदियों ने अपनी समस्याएं रखी। प्राधिकरण ने बंदियों की मदद के लिए दस लीगल वालेंटियर भी बनाए हैं, जो बंदियों की बातों को प्राधिकरण तक पहुंचाएंगे। शनिवार को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष व हाईकोर्ट के जज प्रीतिंकर दिवाकर, डीजे नीलम चंद सांखला, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी विभाग रविशंकर शर्मा, जेल डीआईजी डॉ. केके गुप्ता समेत बार एसोसिएशन के पदाधिकारी जेल में उपस्थित थे। उन्होंने पुरुष और महिला समेत 3 हजार बंदियों से चर्चा की। उसके बाद जज दिवाकर ने कहा बंदियों को भी कई अधिकार प्राप्त है, लेकिन जानकारी नहीं होने के कारण उसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
जेल में बंद बंदियों को नि: शुल्क कानूनी मदद दी जाती है, जिनके पास जमानत के लिए पैसे नहीं होते है। उन्हें पैसे दिए जाते हैं। पैरवी के लिए वकील की व्यवस्था की जाती है। आजीवन कारावास की सजा काट रहे कई बंदियों ने शिकायत की है कि 16 साल की सजा काटने के बाद भी उन्हें छोड़ा नहीं जा रहा है। जबकि 14 साल में जेल से छोड़ने का नियम है। जजों ने बंदियों के सवाल का जवाब दिया है कि आजीवन कारावास का मतलब है कि मृत्यु के बाद ही जेल से जा सकते है।