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पाक को सूचनाएं देने वाली पूर्व राजनयिक को तीन साल की जेल

3 वर्ष पहले
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पाक को सूचनाएं देने वाली पूर्व राजनयिक को तीन साल की जेल

माधुरी को शासकीय गोपनीयता अधिनियम तथा आईपीसी के तहत आपराधिक साजिश के मामले में अधिकतम सजा दी गई है। एडिशनल सेशंस कोर्ट के जज सिद्धार्थ शर्मा ने शनिवार को सजा सुनाने के बाद उन्हें इस आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए जमानत दे दी। इससे पहले शुक्रवार को उन्हें दोषी ठहराते हुए कोर्ट ने कहा था कि उन्होंने ई-मेल से संवेदनशील सूचनाएं लीक कीं, जो दुश्मन के लिए उपयोेगी हो सकती हैं। एेसी सूचनाओं की गोपनीयता जरूरी है। इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त में सेकंड सेक्रेटरी (प्रेस एवं सूचना) रहीं माधुरी आईएसआई के दो एजेंटों मुबशर रजा राणा और जमशेद के संपर्क में थीं। जमशेद के साथ उनका रिश्ता था और उससे शादी की योजना बना रही थीं। उन्हें 22 अप्रैल 2010 को गिरफ्तार किया गया था और जुलाई 2010 में आरोप-पत्र दाखिल किया गया था।

चिल्फी घाटी में मेटाडोर पलटी; 7 लोगों की मौत

होकर पलट गया। हादसे में कामाडबरी की बिसनी बाई पति ओझा गोंड (50), सखाराम पिता रामगंगा गोंड (55),

ढोलिया बाई (55), दियाली पिता तोकसिंह, सोनबती पिता जगीराम, संतू पिता बखारी (45) निवासी कुई और झूलीबाई पति गलीराम गोंड (50) निवासी काशीपानी की मौके पर ही मौत गई। कवर्धा एएसपी अनंत साहू ने बताया, फरार मेटाडोर चालक पर जुर्म दर्ज कर उसकी तलाश की जा रही है।

चिल्हाटी गांव... अतिसूखा होने के बाद भी बीमा क्लेम नहीं मिला तो किसानों ने कंपनी के नाम पर पोता गोबर

किसानों को एक से दो रुपए मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका : सूखे से नुकसान की भरपाई के लिए राज्य के 62,525 किसानों ने 92 हजार हेक्टेयर में लगी धान की फसल का बीमा कराया था। 6.60 करोड़ रुपए बतौर प्रीमियम दिए गए। केंद्र व राज्य शासन ने भी अंशदान दिया। लेकिन कंपनी ने हजारों खातों में एक से दो रुपए जमा किए। अब कम क्षतिपूर्ति मिलने के मामले में हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई गई है।

चर्च में 600, गार्डन में 2500, रोड पर 1 लाख लोग शादी देखने जुटे

शाही शादी की सबसे ज्यादा उत्सुकता भारत में: सर्वे

रॉयल ब्रिटिश वेडिंग को लेकर किसी देश में इतनी उत्सुकता नहीं रही, जितनी कि भारत में। यूके की मार्केट रिसर्च फर्म मोरी ने दुनिया के 28 देशों में एक सर्वे किया। इससे पता चला कि- जबसे शादी की तारीख घोषित की गई है, 55% भारतीयों ने इससे जुड़ी खबरों को दिलचस्पी के साथ पढ़ा। खुद ब्रिटेन में ये आंकड़ा 34% ही रहा।

सर्जरी के बाद जांच हुई तो खराब निकलीं 7 की आंखें

रायपुर में एम्स और उसके पहले बालोद में मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद मरीजों की आंखों की रौशनी जा चुकी है। इसी वजह से गरियाबंद में मोतियाबिंद के बाद आंखों की रौशनी जाने का केस सामने आने से पूरा अमला हरकत में आ गया है। गरियाबंद जिला प्रशासन ने भी अपने स्तर पर पिछले दो साल में जितने भी मरीजों के आंखों की सर्जरी हुई, उन सभी की जांच करवाने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन की प्रारंभिक जांच में ही 7 मरीजों की आंखों में किसी न किसी तरह का इंफेक्शन निकला। दो आंखों की रौशनी तो पूरी तरह जा चुकी है। उनका अंबेडकर अस्पताल में इलाज चल रहा है। कुछ मरीज अभी वहीं हैं। खबर है कि कुछ मरीज तो इलाज करवाने ओडिशा जा चुके हैं। उनका रिकार्ड यहां नहीं है। स्वास्थ्य संचालक ने उस इलाके के सभी प्राइवेट अस्पतालों से जानकारी मांगी है उन्होंने कितने मरीजों का इलाज किया और कितनी बार उन्हें फालोअप के लिए बुलवाया।

स्मार्ट कार्ड में ज्यादा लापरवाही

देवभोग में अभी तक जिन मरीजों की आंखों की राैशनी जाने की बात सामने आई है, उन सभी का इलाज स्मार्ट कार्ड से किया गया है, लेकिन मरीजों को अस्पताल का नाम ही नहीं मालूम। वे नहीं जानते कि उन्हें किस अस्पताल में ले जाया गया था। मरीजों के पास अस्पताल की डिस्चार्ज टिकट या कोई पर्ची नहीं है, जबकि उनकी सर्जरी स्मार्ट कार्ड से हुई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्मार्ट कार्ड का संचालन करने वाली नोडल एजेंसी को जानकारी भेजी गई है। एजेंसी के माध्यम से पता चल जाएगा कि किस मरीज का इलाज किस प्राइवेट अस्पताल में हुआ है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से गरियाबंद क्षेत्र के कुछ अस्पतालों को नोटिस भेजकर जानकारी मांगी गई है कि उनके अस्पताल में किन मरीजों की कब मोतियाबिंद सर्जरी की गई है।

शिकायतों के बाद करवायी जांच- कलेक्टर गरियाबंद

गरियाबंद के कलेक्टर श्याम धावड़े का कहना है कि अभी तक 7 मरीज ऐसे हैं, जिनकी आंखों में इंफेक्शन मिला है। दो को रायपुर के अंबेडकर अस्पताल इलाज के लिए भेजा गया है। बाकी मरीजों का ट्रीटमेंट अभी यहीं चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग को पूरी रिपोर्ट भेज दी गई है।

स्कूल ने पैरेंट्स को होमवर्क दिया- बच्चों के साथ ही खाना खाएं

झुंझुनूं के टैगोर स्कूल ने यह पहल की है। स्कूल के संचालकों ने पहले ही तय कर लिया था कि वे इस बार कुछ अलग करेंगे। इसी के तहत स्कूल की ओर से 13 बिन्दुओं पर आधारित एक पत्र तैयार किया गया, जिसे पिछले दिनों समर वैकेशन से दो दिन पहले बच्चों को यह कह कर दिया गया कि वे इसे पैरेंट्स को आवश्यक रूप से दें। यह पत्र उन्हें मिल गया, इसकी फोन पर इत्तला दिलाएं। स्कूल की एकेडमिक डायरेक्टर पलक अहलावत बताती हैं कि बच्चों और पैरेंट्स दूरियां आ रही हैं। बच्चे ज्यादातर समय मोबाइल, इंटरनेट पर खर्च कर रहे हैं। माता-पिता के साथ ही दादा-दादी के पास ज्यादा नहीं बैठते। ऐसे में कई तरह की विषमताएं पैदा हो रही हैं। गैजेट्स ने दूरियां बढ़ा दी हैं। बच्चे अपनी बात पैरेंट्स से शेयर तक नहीं करते। हमारे यहां करीब 750 बच्चे हैं, हमने एक पत्र तैयार करवाया और उनके साथ भेजा। पत्र पढ़ कर अनेक पैरेंट्स ने इस पहल की सराहना की।

पत्र में लिखा- बच्चों को श्रम का महत्व समझाएं

समर्थन महत्वपूर्ण है। उनके साथ तस्वीरें खिंचवाएं। बच्चों को कभी-कभार अपने कार्यस्थल पर ले जाएं। बच्चे को यह समझने दें कि परिवार चलाने के लिए आपको कितनी कड़ी मेहनत करनी होती है। बच्चे को अपने घर का उद्यान लगाने के लिए प्रोत्साहित करें। पेड़-पौधों का महत्व और उनके विकास का ज्ञान उनके विकास की प्रक्रिया एवं उनके जीवन का अंग है। अपने बचपन की कहानियां, अपने संघर्ष और अपने परिवार के के बारे में बताएं। बच्चों को कई बार घर के बाहर खेलने दें, उन्हें चोटिल और गंदा होने दें। उनके लिए गिरना और थोड़ी देर दर्द का अनुभव होना ठीक है।

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