ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर | रायपुर
मुंबई से रायपुर होते हुए टाटानगर तक की अंत्योदय एक्सप्रेस को दिसंबर 2017 से 11 मई तक के लिए बंद किया गया, लेकिन इतनी भीड़ के बावजूद इस ट्रेन के एक-दो महीने और बंद रहने की संभावना है क्योंकि अब तक चलाने की तैयारी नजर नहीं आई। यही नहीं, इतनी भीड़ के बावजूद पांच माह पहले बंद की गई दुर्ग-जगदलपुर एक्सप्रेस और दुर्ग-वाल्टेयर पैसेंजर भी शुरू नहीं की गई हैं। रेल अफसरों का तर्क है कि वाल्टेयर लाइन में कुछ ब्रिज टूटने से ट्रेनें शुरू नहीं हुईं, लेकिन माना जा रहा है कि अंत्योदय में कम किराया और शेष दो ट्रेनों में भी कम कमाई ही इनके हमेशा के लिए बंद होने की वजह बन सकती हैं।
रेलवे ने दिसंबर में ही दुर्ग-जगदलपुर एक्सप्रेस और दुर्ग-विशाखापट्टनम पैसेंजर को मार्च तक कैंसिल किया था। दोनों ही ट्रेनें दुर्ग से रायपुर होकर महासमुंद होती हुई आगे जाती हैं। इनमें वाल्टेयर पैसेंजर तो खचाखच चल रही थी। इसी तरह, मुंबई से चलकर छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख स्टेशनों से गुजरनेवाली अंत्योदय एक्सप्रेस 23 मार्च 2017 से नियमित तौर पर चली। इस ट्रेन से रायपुर से मुंबई का किराया सिर्फ 335 रुपए है। दो महीने के भीतर ही रायपुर से इस ट्रेन में 35 फीसदी पैसेंजर बढ़ गए थे, लेकिन रेलवे ने मुंबई से टाटा का हिसाब लगाकर इसे दिसंबर में 11 मई 2018 तक के लिए रोक दिया। पिछले महीने रेल अफसरों ने दावा किया कि इसे 31 मई के बाद शुरू किया जा सकता है। लेकिन अब तक कोई तैयारी नहीं है, इसलिए जून तक इसके शुरू होने की संभावनाएं कम हैं।
मुंबई-रायपुर-टाटा अंत्योदय दिसंबर से 11 मई तक बंद और शुरू करने की कोई तैयारी नहीं
किराया और समय, दोनों कम
अंत्योदय से रायपुर से मुंबई का सफर 16.30 घंटे का है। अन्य ट्रेनें 20 से 22 घंटे लेती हैं। यह 9.30 घंटे में टाटा पहुंचाती है, जबकि दूसरी ट्रेनें को 11 से 12 घंटे लगते हैं। कम समय, बेहतर सुविधा और कम किराया होने की वजह से इस ट्रेन की डिमांड बढ़ रही थी।
वाल्टेयर वाले दिक्कत में
दुर्ग और रायपुर से वाल्टेयर की ओर जाने वाले यात्री बड़ी संख्या में दुर्ग-जगदलपुर और दुर्ग-विशाखापट्टनम को बंद करने की वजह से यात्रियों की दिक्कत बढ़ गई है। रेल अफसरों के मुताबिक पुल क्षतिग्रस्त होने से ये ट्रेनें बंद की गईं, जबकि यहीं से कुछ और एक्सप्रेस चल रही हैं।