रायपुर | राज्यों के बाहर और राज्य के अंदर कारोबार करने के लिए ई-वे बिल अनिवार्य होने और गाड़ियों की सख्ती से जांच के बाद कारोबारियों के पंजीयन में तेजी आ गई है। इंटरस्टेट कारोबार के लिए पांच हजार से ज्यादा कारोबारियों ने अपना रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। अंतरराज्यीय कारोबार के लिए 85 हजार से ज्यादा बिल जारी हो चुके हैं। इसके अलावा 364 ट्रांसपोर्टरों ने भी ई-वे बिल के साथ माल भेजने के लिए अपना पंजीयन करवा लिया है। राज्य के अंदर कारोबार करने के लिए 15 हजार से ज्यादा कारोबारियों के पंजीयन हो चुके हैं। हालांकि अफसरों का कहना है कि यह संख्या कम है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि 30 मई के पहले तक सभी कारोबारियों के रजिस्ट्रेशन हो जाएंगे। राज्य के अंदर ई-वे बिल को लागू करने को लेकर छत्तीसगढ़ चैंबर और कैट का विरोध लगातार जारी है। ई-वे बिल की जानकारी देने के लिए चैंबर ने 22 को राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया है।
बिल की विसंगतियों को दूर करने के लिए छत्तीसगढ़ कैट के पदाधिकारी शनिवार को एक बार फिर वाणिज्यकर आयुक्त के पास पहुंचे। उन्होंने दोबारा मांग करते हुए कि राज्य अंदर ई-वे बिल केवल कुछ चीजों पर ही लागू होना चाहिए। मध्यप्रदेश का फार्मूला छत्तीसगढ़ में भी लागू होना चाहिए। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, प्रवक्ता राजकुमार राठी के साथ पहुंचे पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य में एक जून से लागू होने वाले ई-वे बिल पर जीएसटी आयुक्त संगीता पी. से मुलाकात कर आटोमोबाइल कारोबारियों के डेमो वाहन एवं एफएमसीजी की वस्तु परिचालन करने पर हो रही दिक्कतों की जानकारी दी। आयुक्त ने कारोबारियों को रिटर्न की संख्या बढ़ाने की सलाह देते हुए दिक्कतों को दूर करने का आश्वासन दिया।