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अजा-अजजा कानून: कोर्ट के फैसले को सही बताया कमेटी बनाई, लोगों से आपत्ति मांगकर भेजेंगे केंद्र को

3 वर्ष पहले
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कर्नाटक चुनाव के दौरान केंद्रीय खाद्य व उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान ने अजा/अजजा कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एक बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट पुराने कानून की बहाली नहीं करती तो सरकार अध्यादेश लाएगी ताकि पिछड़े वर्ग के लोगों के हितों की अनदेखी न हो। इस मामले में सरकार द्वारा अध्यादेश देश लाने को लेकर शनिवार को बैरनबाजार स्थित आशीर्वाद भवन में गोष्ठी का आयोजन किया गया था।

कान्यकुब्ज सभा एवं शिक्षा मंडल और नागरिक समिति द्वारा आयोजित गोष्ठी में रिटायर्ड अफसरों, वकीलों, कानूनी जानकारों और बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया। शिक्षा मंडल के अध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय ने यहां कहा कि अजा/अजजा कानून में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए बदलावों का हम समर्थन करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक ऐसे मामलों में जिस व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उसकी तत्काल गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। वरिष्ठ अफसर की निगरानी में पूरी तरह जांच होने के बाद ही संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी। यह फैसला कई मायनों में महत्वपूर्ण है। हमें यह भी सोचना चाहिए कि आखिर सुप्रीम कोर्ट को ऐसा फैसला क्यों लेना पड़ा। इसके विरोध में 2 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया गया। कई जगह से हिंसा की खबरें सामने आईं। जान-माल का नुकसान हुआ। ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। अनारक्षित वर्ग के लोगों ने भी बंद के विरोध में 10 अप्रैल को बंद का आह्वान किया पर दूसरी बार लोगों ने समझदारी दिखाई और इसका समर्थन नहीं किया। समाजसेवी कुणाल शुक्ला ने कहा कि ऐसी स्थितियों से देश की सामाजिक समरसता प्रभावित होती है। केंद्र सरकार ने अजा/अजजा कानून के फैसले पर दोबारा विचार करने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। फिर भी कोर्ट ने पूर्व के फैसले को स्थिर रखा। सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मान रखना चाहिए।

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हफ्तेभर के भीतर बनेगी कमेटी

आयोजन समिति के ललित चंद्रनाहू ने बताया कि गोष्ठी के दौरान इस मामले को लेकर नागरिकों की एक कमेटी का गठन करने का फैसला लिया गया है। हफ्तेभर के भीतर कमेटी का गठन कर लिया जाएगा। इसमें अफसरों, कानूनी विषय के जानकारों, अलग-अलग समाज के प्रमुखों और बुद्धिजीवियों को शामिल किया जाएगा। माहभर के भीतर लोगों से आपत्ति मंगवाकर प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को भेजा जाएगा ताकि वे इस बारे में कोई अध्यादेश न लाएं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करें और देश की सामाजिक समरसता को बनाए रखने में मदद करें।

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