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कोशिश करें, शायद 9 बार हारेंगे पर इतना सीख भी जाएंगे कि 10वीं बार जीत पक्की

3 वर्ष पहले
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कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

लोग छोटी-छोटी बातों से तनाव में आ जाते हैं। स्कूल की परीक्षा में पास नहीं होने वालों को टेंशन। पास हो गए तो अच्छे नंबरों का टेंशन और अच्छे नंबर आ भी गए तो क्लास में पोजिशन की टेंशन। इसी तरह कंपीटिशन एग्जाम नहीं निकाल पाए तो चिंता। निकल गया तो मनचाही पोस्टिंग नहीं मिलने से डिप्रेशन। तनाव किसी समस्या का समाधान नहीं है। सफलता पाने लगातार कोशिश करें। हो सकता है कि 10 में से 9 बार आप हार जाएं पर इन 9 हारों से आप इतना कुछ सीख जाएंगे कि 10वीं बार जीत पक्की है।

यह विचार शनिवार को चौबे कॉलोनी स्थित प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में आयोजित समर कैंप में मंजू दीदी ने रखे। उन्होंने कहा कि जिंदगी की किसी परीक्षा में फेल होने से नहीं डरना चाहिए। हमसे पहले बहुत से महापुरुष पैदा हुए। उनमें भी गलतियां थीं। वे भी गलतियां करते थे पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। लगातार खुद में बदलाव किए और खुद को बेहतर बनाने का प्रयास किया। इसी का नतीजा था कि आखिर में उन्हें सफलता मिली। कोशिश करते रहेंगे तो हो सकता है कि आपको कामयाबी ने मिले पर सीख जरूर मिलेगी। यह कुछ न करने से तो बेहतर है क्योंकि यही सीख बाद में आपकी कामयाबी की वजह भी बनेगी। मनुष्य पुरुषार्थ करे तो अपने हाथों की लकीरों को भी बदल सकता है। सिर्फ उसके अंदर लगन होना जरूरी है।

ब्रम्हकुमारी विश्वविद्यालय में शनिवार को भी स्कूली बच्चों को सफलता के टिप्स दिए गए।

दुनिया एक रंगमंच, जैसी कलाकारी, वैसा कर्मों का खाता और हिसाब भी

उन्होंने आगे कहा कि हमारे कर्मों का कार्मिक अकाउंट बनता है। इसी खाते के हिसाब के मुताबिक हमें सुख या दुख मिलते हैं। हर व्यक्ति अपने कर्मों के लिए खुद जिम्मेदार है। खुश रहना है तो अपने कर्मों को बेहतर बनाना होगा ताकि जिंदगी में सुख आए। हाथों से किए गए काम ही हमारे कर्म नहीं हैं बल्कि देखना, सुनना, खाना-पीना भी कर्म ही हैं। कोई भी व्यक्ति कर्मों के बंधन से छूट नहीं सकता। हमें जो दुख या सुख मिलता है उसके लिए हम खुद ही जिम्मेदार हैं। हमेशा समझो कि मैं एक्टर हूं और विश्व के रंगमंच पर अपनी भूमिका निभा रहा हूं। मुझे सब देख रहे हैं। इससे हमारा कर्मों पर अटेंशन बना रहेगा। कोई गलत काम नहीं होगा। हमारे कर्म ऐसे हों कि देखने वाले कहें- वंस मोर। इसके लिए यह याद रहे कि जो कर्म मैं करूंगा, मुझे देखकर ओर लोग भी वही करेंगे। अगर सुखी रहना है तो इस बात का ध्यान रखें कि मेरे कर्मों से किसी को दुख न पहुंचे। हमारे बोल भी सबको सुख देने वाले और मधुर होने चाहिए। न कि दूसरों को पीड़ा पहुंचाने वाले। माता-पिता के आशीर्वाद से बढ़कर दुनिया में कुछ नहीं है। सुबह उठकर सबसे पहले उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। उनकी दुआएं प्राप्त करने के लिए आज्ञाकारी बनिए।

10 दिवसीय कैंप का आज समापन

प्रजापिता ब्रह्मकुमारी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस 10 दिवसीय कैंप का रविवार शाम 5 बजे विधानसभा रोड स्थित शांति सरोवर में समापन होगा। समापन समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के डायरेक्टर भरत भास्कर और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. केसरी लाल वर्मा होंगे। अध्यक्षता क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी करेंगी। इस मौके पर विजयी प्रतियोगियों को पुरस्कार वितरण भी किया जाएगा।

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