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जंगल से महज पचास कदम की दूरी पर चल रही तरमीम से वंचित खदान

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | रायपुर मारवाड़

निकटवर्ती काणुजा ग्राम की सरहद में पिछले करीब 10 साल से अधिक समय से एेसी खदान से खनन हो रहा है, जिसकी आज तक तरमीम तक नहीं हुई। मामले में चौंकाने वाली बात तो यह है कि जिस जगह ये खान स्थित है, उस जगह से करीब पचास कदम की दूरी पर वन क्षेत्र है। एक तरफ आबादी इलाका और तीसरी तरफ सरकारी स्कूल मौजूद हैं। इसके बावजूद माइनिंग विभाग के आला अधिकारी और जिम्मेदार बिना तरमीमसुदा खदान से पत्थर निकाला जा रहा है। काणुजा निवासी रघुवीरसिंह के अनुसार पिछले कई सालों से इन खदान की वे हर स्तर पर सक्षम अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन खदान मालिक अपने राजनीतिक रसूखों के चलते हर शिकायत को दबा रहे हैं। रघुवीर सिंह ने अब आरटीआई के तहत खदान से जुडे सारे दस्तावेज निकलवाएं हैं ताकि ग्रीन ट्रिब्यूनल में शिकायत दर्ज करवाई जा सके।

पांच सौ मीटर की दूरी पर आबादी और कुछ सौ मीटर की दूरी पर मौजूद है स्कूल

कुछ ही दिन पहले हुई थी शिकायत

जिस पहाड़ी पर खनन किया जा रहा है उससे कुछ ही दूरी पर तलहटी के नीचे राजकीय विद्यालय स्थित है। खनन के लिए की गई ब्लास्टिंग के कारण विद्यालय की दीवारों में दरारें आ गईं और बच्चे भी सहम गए। एेसे में अध्यापकों ने बच्चों को खुले में बैठाकर अध्यापन प्रारंभ करवा दिया। विद्यालय प्रशासन ने उच्चाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की शिकायत की। इस पर प्रशासन ने मामले की जांच की। जांच के दौरान विद्यार्थियों के बयानों को आधार बनाकर ये लिखा गया कि बच्चों को तो सिर्फ कुछ देर खुले मैदान में बिठाकर सिर्फ फोटोग्राफी की गई।

एक तरफ जंगल दूसरी तरफ आबादी

जिस जगह खदान स्थित है वहां से करीब सौ मीटर की दूरी पर फॉरेस्ट एरिया स्थित है। नियमानुसार फारेस्ट एरिया से एक किलोमीटर की दूरी तक खनन नहीं किया जा सकता। खदान के दूसरे छोर पर आबादी इलाका मौजूद है जहां करीब सात आठ सौ लोगों की आबादी बसी हुई है। पांच सौ मीटर की दूरी पर बसी इस आबादी को आए दिन होने वाली ब्लास्टिंग से भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

बिना तरमीम ही चल रही माइन

राजस्व विभाग के अनुसार काणुजा क्षेत्र में स्थित इस लाइम स्टोन की माइन को अब तक तरमीम नहीं किया गया है। अब मामले में सवाल ये उठता है कि आबादी, फॉरेस्ट और विद्यालय सरीखे स्थानों के आस-पास स्थित खदान को तरमीम किए बिना कैसे इससे खनन किया जा सकता है। क्योंकि जिस खसरे में खनन का पट्टा दिया गया है, उस खसरे का क्षेत्रफल काफी लंबा चौड़ा है। एेसे में खनन के लिए निर्धारित स्थान की जानकारी सिर्फ तरमीम होने के बाद ही हो सकती है। 1998 में आवंटित इस खदान की आज तक तरमीम तक नहीं हो सकी है। ग्रामीणों की मानें तो खदान मालिक खान की खनन क्षमता से अधिक पत्थर इससे निकाल चुका है।

सारे नियम कायदे ताक पर रखे हुए हैं

आरटीआई के तहत इस खान से जुडे सभी दस्तावेज मैंने प्राप्त किए हैं। सब कुछ नियम विरूद्व चल रहा है। अधिकारी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन देते हैं, इसलिए अब ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला लेकर जाऊंगा। रघुवीर सिंह, निवासी काणुजा।

पुराने समय की आवंटित खदान का अमल दरामद हो चुकी हो तो तरमीम के बिना भी खनन किया जा सकता है। इस मामले में तो रिकार्ड देखकर ही बता पाऊंगा के अमल दरामद हुई है या नहीं। मनीष कुमार, फोरमैन, खनिज विभाग ब्यावर।

इस खदान की तरमीम नहीं हो रखी है। -पटवारी काणुजा।

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