शराब दुकानों में नहीं बना बिल का सिस्टम, देरी से बढ़ा विवाद
प्रशासनिक रिपोर्टर . रायपुर | शराब दुकानों में बिल देने का सिस्टम ही नहीं बन पा रहा है। एक-एक बोतल का बिल बनाने में काफी समय लगने की वजह से लोग बिल लेने से भी इंकार कर रहे हैं। इसका फायदा सेल्समैन उठा रहे हैं। वे लोगों को बिना बिल के ही शराब की बिक्री कर रहे हैं और बाद में अपनी सुविधा के अनुसार बिलिंग कर रहे हैं।
ज्यादा कीमत में शराब की बिक्री की शिकायतें फिर अफसरों तक पहुंच रही हैं। लोगों का कहना है कि बोतल में लिखी एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूल की जा रही है। इससे पहले भी शहर की आधा दर्जन शराब दुकानों में ज्यादा कीमत में शराब बेचने पर मामला दर्ज किया गया था। जिला आबकारी विभाग के दावा है कि शहर के सभी शराब दुकानों पर कंप्यूटराइज्ड सिस्टम लगा दिया गया है। देशी शराब दुकानों में भी यह सिस्टम लगा है, लेकिन अभी वहां एक-एक बोतल की बिलिंग नहीं की जा रही है। दुकानों में पहुंचने वाली पेटियों के हिसाब से बिलिंग हो रही है। स्टाफ बढ़ने के बाद चिल्हर बोतलों की बिक्री भी बिल से ही का जाएगी। विभाग ने अभी तक किसी भी देशी शराब दुकान के अंदर या बाहर अहाता खोलने की अनुमति नहीं दी है। इसके बावजूद देशी शराब दुकानों में अहाते चल रहे हैं। इस पर कोई कार्रवाई भी नहीं की जा रही है। विभाग के उड़नदस्तों ने इसकी जांच भी की, लेकिन कार्रवाई अब तक किसी पर नहीं की गई।
डूंडा और माना का टेंडर खुलेगा कल
डूंडा और माना की शराब दुकान का व्यापक विरोध होने के बाद अब इन दोनों शराब दुकानों की जगह बदली जाएगी। इसके लिए विभाग ने टेंडर मंगाए गए थे। इच्छुक लोगों ने अपनी दुकानों की जानकारी विभागों को दी है।