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पंडरी मार्केट में 37 दुकानों पर चलाना था बुलडोजर, 11 तोड़कर खानापूर्ति कर दी

3 वर्ष पहले
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पंडरी कपड़ा मार्केट की 37 दुकानें तोड़नी थी, लेकिन निगम ने शनिवार को केवल 11 दुकानों पर ही बुलडोजर चलाया। बाकी दुकानों को खानापूर्ति के लिए सील कर दिया। मार्केट के भीतर के गलियारों और पार्किंग की जमीनों के अवैध कब्जों को भी नहीं हटाया गया। सोमवार 16 अप्रैल को हाईकोर्ट में निगम को अवैध कब्जों के संबंध में जवाब देना है। माना जा रहा है कि इसी वजह से शनिवार को कार्रवाई की गई।

निगम की कार्रवाई से बाजार की मुख्य सड़क की ओर खुली दुकानें अब बंद हो जाएंगी। इससे बाजार की मेन रोड पर जो गाड़ियां इन दुकानों के सामने खड़ी होती थीं, वे पार्क नहीं होंगी। इससे यहां जाम की समस्या दूर हो सकेगी, लेकिन भीतर की बाकी दुकानों को सील कर छोड़ देने से स्थिति वही रहेगी। कपड़ा मार्केट को रायपुर विकास प्राधिकरण ने बसाया था। पूरा बाजार एक परिसर के भीतर संचालित होना था। दुकानों की डिजाइन और शटर इसी के अनुसार बनाए गए थे। बाद में कारोबारियों ने नियमों को तोड़ते हुए खाली जमीनों पर निर्माण कर लिया। मेन रोड पर जिनकी दुकानें थीं, उन्होंने इस ओर की दीवार तोड़कर दुकान खोल ली। उसी के बाद दिक्कत शुरू हुई। इन दुकानों की वजह से पंडरी रोड पर ट्रैफिक जाम होने लगा। जांच होने पर पता चला कि ऐसी 84 दुकानें हैं, जिनका शटर सड़क की तरफ खुल गया है। निगम में शिकायतें होती रहीं लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

बाकी दुकानों को सील किया और कुछ को छोड़ा

कार्रवाई करते निगमकर्मी।

सिर्फ शटर निकाले अंदर कार्रवाई नहीं

निगम ने मेन रोड की तरफ शटर निकालने वाली 11 दुकानों के शटर तोड़ दिए। दरअसल, कारोबारियों ने एक ही दुकानों में बीच में पार्टीशन कर सड़क की तरफ शटर खोलकर उसे किराए पर दे दिया था। कुछ लोग थोक के साथ चिल्हर भी कारोबार करने लगे थे। निगम ने शनिवार को केवल शटर तोड़ा भीतर कोई कार्रवाई नहीं की। 26 उन दुकानों को फिर से सील किया गया, जिन दुकानों की सील व्यापारियों से शपथ-पत्र लेकर खोली गई थी।

भास्कर ने उठाया था मुद्दा

पंडरी में सड़क की तरफ दुकानों खोलने का मुद्दा दैनिक भास्कर ने सबसे पहले उठाया था। इसके बाद निगम ने जांच की तब पता चला कि 84 दुकानदारों ने नियम तोड़कर सड़क की तरफ शटर खोल लिया है। दुकानदारों को नोटिस जारी की गई, लेकिन फर्क नहीं पड़ा। चैंबर और रसूख रखने वाले व्यापारियों ने निगम और प्रशासन पर दबाव बनाया। इसकी वजह से कार्रवाई नहीं हुई।

कुछ दुकानों को छोड़ा।

हाईकोर्ट ने नियमानुसार कार्रवाई के लिए आदेश दिया है। जिन दुकानों से दिक्कत ज्यादा थी, उन्हें तोड़ा गया। कुछ दुकानों में भाई-भाई का विवाद और कुछ की आजीविका खत्म हो रही थी, इसलिए उनपर कार्रवाई नहीं की गई। भीतर अवैध निर्माणों पर भी कार्रवाई होगी। विनोद देवांगन, कमिश्नर जोन-2 निगम

कारोबारियों में विवाद गुटों में बंटे

पंडरी में तोड़फोड़ के बाद कारोबारी दो गुटों में बंट गए हैं। दोनों एक गुट एक-दूसरे पर व्यापारियों का पक्ष ठीक तरीके से नहीं रखने का आरोप लगा रहे थे। तोड़फोड़ की खबर सुनकर सुबह चैंबर अध्यक्ष जितेंद्र बरलोटा पदाधिकारियों के साथ पहुंच गए, लेकिन अफसरों ने उन्हें कोर्ट का आदेश दिखाया तो वे वापस लौट गए। इससे वहां के कारोबारी नाराज हो गए। इस मामले से पंडरी के दशकों तक अध्यक्ष रहे और चैंबर के वरिष्ठ नेता रमेश मोदी ने भी खुद को अलग कर लिया। वे व्यापारियों की बैठक में भी नहीं गए। ऐसे में नाराज कारोबारियों ने दोपहर को कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी को वहां बुलवा लिया। उन्होंने मौके से ही कुछ अफसरों से बात भी की। इसके बाद पंडरी के कारोबारियों की बैठक बुलाई गई, जिसमें पंडरी थोक कपड़ा मार्केट के अध्यक्ष महेंद्र धाड़ीवाल भी शामिल हुए। बैठक में कुछ व्यापारियों ने आरोप लगाया कि जिन दुकानों में कार्रवाई नहीं होनी थी कुछ लोग वहां भी कार्रवाई करवाना चाहते थे। इस पर अध्यक्ष धाड़ीवाल नाराज हुए और उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर काम करना है। बैठक में कई मुद्दों के लेकर बहस भी हुई। इसके बाद तय किया गया कि कैट के पारवानी के साथ प्रतिनिधिमंडल आगे की कार्रवाई के लिए अफसरों से मुलाकात करेगा। फिलहाल इस मामले को लेकर पंडरी में दिनभर कारोबारियों के बीच चर्चा होती रही। चैंबर का साथ नहीं मिलने की वजह से कारोबारी नाराज दिखाई दिए।

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