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बाघ का शव 15 दिन से जंगल मंे पड़ा था शरीर में मिले छर्रे, शिकार की आशंका

3 वर्ष पहले
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गौहरगंज तहसील के घाना के जंगलों में बाघ का शव मिलने के मामले में वन विभाग ने कार्रवाई कर एक डिप्टी रेेंजर और बीट गार्ड को सस्पेंड कर दिया है। बाघ की मौत के मामले में वन विभाग इन दोनों की लापरवाही मान रहा है।

जंगल में बनी नाली में 27 मार्च को बाघ मृत मिला था। लापरवाही यह सामने आई थी की बाघ की मौत होने के 15 दिन बाद उन्हें इसकी जानकारी मिल थी। तब तक मृत बाघ सड़ चुका था। शार्ट पीएम रिपोर्ट में उसके पैर में फ्रैक्चर के साथ नाली में गिरने से मौत होना बताया गया था। बाघ के शरीर से छर्रे भी निकले थे। इससे शिकार की संभावना भी जताई जा रही है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि बाघ की प्राकृतिक मौत हुई है। गौहरगंज रेंज के डिप्टी रेंजर कमल मालवीय और बीट गार्ड जितेंद्र शर्मा को जिम्मेदार मानते हुए सस्पेंड कर दिया गया है। डीएफओ डीके पालीवाल के मुताबिक इन्होंने बाघ के मरने की सूचना देरी से दी थी। लापरवाही मानतेे हुए सस्पेंड किया गया है।

गौहरगंज रेंज के घाना बीट के कम्पार्टमेंट 314 में एक बाघ 28 मार्च को मृत मिला था। उस समय बाघ का शव 15 दिन पुराना बताया जा रहा था। बाघ का पीएम करने वाले डॉक्टरों के अनुसार बाघ का एक पैर फ्रैक्चर पाया गया था , जिससे वह चलने में सक्षम नहीं था, इसलिए वन विभाग की खंती में गिरने से उसकी मौत होना बताया जा रहा है।

हैदराबाद,भोपाल और सागर भेजे हैं सैंपल, डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड निलंबित
तीन सवाल जिनके लिए जवाबदेह हैं विभाग के आला अधिकारी
1.बाघ की मौत हो गई और 15 दिन तक पता ही नहीं चला
वन्य प्राणियों की सुरक्षा पर वन अमला कितना सजग है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बाघ की मौत के 15 दिन बाद उन्हें जानकारी मिल पाई, जबकि अधिकारियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि उनके क्षेत्र में वन्य प्राणियों की पूरी सुरक्षा हो।

जिस नाली में मिला था बाघ का शव उसे विभाग ने ही खुदवाया था, पीएम में मौत का कारण प्राकृतिक
घाना बीट में वन विभाग द्वारा जो नाली खोदी गई थी, उसमें एक बाघ का शव पड़े होेने की सूचना 27 मार्च को वन विभाग के अधिकारियों को मिली। जानकारी मिलते ही औबेदुल्लागंज डीएफओ डीके पालीवाल रात में ही मौके पर पहुंचे। 28 मार्च की सुबह सतपुड़ा रिजर्व के डाॅ. गुरदत्त शर्मा और बुधनी के डाॅ. सुखवीर सिंह को पीएम के लिए बुलाया गया। इन दोनों डाॅक्टरों ने मृत बाघ का पीएम किया। शार्ट पीएम में उसकी मौत का कारण प्राकृतिक होना बताया गया है। उसका एक पैर फ्रैक्चर होेने की बात भी डाॅक्टरों ने पीएम रिपोर्ट में लिखी है।

2. वन्य प्राणियों के मूवमेंट पर रखी जाती है नजर
वन्य प्राणियों के मूवमेंट पर वन अमले को पूरी नजर रखना होती है, जिससे उनका शिकार न हो जाए। इसके साथ ही जंगल में कोई ऐसी स्थिति न बन पाए जिससे उनकी मौत हो जाए। इसके चलते वन अमले के मूवमेंट वाले क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर उनकी रोज की स्थिति देखना होती है।

3. सस्पेंड करने पर सवाल
बाघ की मौत के मामले में अभी कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं। सवाल यह उठता है कि यदि बाघ की मौत प्राकृतिक हुई है तो डिप्टी रेंजर कमल मालवीय और बीट गार्ड जितेंद्र शर्मा को किस लिए सस्पेंड किया गया है।

स्वाभाविक तरीके से हुई है बाघ की मौत
घाना के जंगल में बाघ की मौत तो प्राकृतिक हुई है। इस मामले में देरी से जानकारी देने को लेकर डिप्टी रेंजर कमल मालवीय और बीट प्रभारी जितेंद्र शर्मा काे सस्पेंड कर दिया गया है। डीके पालीवाल, डीएफओ ,औबेदुल्लागंज

रिपोर्ट के बाद कुछ कहा जा सकता है: डॉक्टर
बाघ के पीएम में शामिल बुधनी के वन्य प्राणी विशेषज्ञ डॉक्टर सुरजीतसिंह बाघ की मौत का कारण साफ-साफ बताने से बचते रहे। उन्होंने कहा कि बाघ का शव 15 दिन पुराना था, इसलिए सड़ चुका था। उसके कुछ सैंपल फारेंसिक जांच के लिए हैदराबाद, सागर और भोपाल भेज गए हैं। खाली आंखों से देखने पर कई चीजें समझ में नहीं आतीं। जांच रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

बरती गई लापरवाही
जांच के दौरान यह पाया गया कि बाघ की मौत 15 दिन पूर्व हो चुकी थी। इसके बावजूद रेंज के अमले को वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी कोई सूचना नहीं दी, जबकि नियमों के मुताबिक वन्य प्राणियों के मूवमेंट को लेकर उनकी निगरानी की जाती है, जिससे उनकी सुरक्षा को कोई खतरा न रहे, लेकिन इस मामले में गंभीर लापरवाही बरती गई।

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