सचिन सक्सेना | बेेगमगंज (रायसेन)
आमतौर पर वर्टिकल फार्मिंग यानी खड़ी खेती की पद्धति का उपयोग कर कम जगह में खेती कर सकते हैं, लेकिन नगर से 18 किमी दूरी पर बड़गंवा के तीन किसान पृथ्वी सिंह, संतोष सिंह और कल्याण सिंह ने एक नया प्रयोग किया है। इन्होंने अपने खेतों में कम जगह में मिर्च उगाकर खेती को लाभ का व्यवसाय बना लिया है। पहले यह किसान गेहूं, चना और सोयाबीन आदि की खेती करते थे।
उत्पादन और आमदनी तो हो रही थी, लेकिन दिनों दिन खेती में बढ़ते खर्च के कारण मुनाफा कम होता जा रहा था। तब उन्होंने उद्यान विभाग अधिकारी एमएल सेन से सलाह ली और यूएस एग्रो सीड कंपनी एवं सीमेन्स व केलेक्स कंपनी की हायब्रिड मिर्च की खेती आधा एकड़ में शुरू की। जिसमें उन्हें करीब 30 से 40 हजार का लाभ हुआ। तब उन्होंने मसालों की खेती करने का निर्णय लिया और आज कई एकड़ में मसालों की खेती कर अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं। किसान पृथ्वीसिंह ने बताया पिछले साल प्रत्येक सप्ताह लगभग 5 हजार से 10 हजार रु. तक की मिर्च की बिक्री हुई थी। जबकि इस बार प्रति सप्ताह 10 हजार से 12 हजार रुपए की मिर्च बाजार में बिक रही है। उनका कहना है कि यदि किसान सही समय पर बाजार की मांग अनुसार सब्जी की उन्नत किस्मों की खेती करें तो हजारों नहीं लाखों का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
उद्यान अधिकारी एमएल सेन का कहना है शासन की योजनाओं के तहत उद्यान विभाग से अनुदान पर ड्रिप स्प्रिंकलर,मल्चिंग एवं पोली हाऊस इत्यादि लगवाए जा रहे हैं। कई किसानों ने योजनाओं का लाभ लेकर मुनाफा भी कमाया है। अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती से हटकर मसालों की खेती पर जोर देना चाहिए।
आधा एकड़ में लगाई मिर्च, कम जगह में प्रयोग सफल होने पर दूसरे किसानों को भी सिखा रहे तकनीक
कम जगह में मिर्च की भरपूर पैदावार ले रहा किसान पृथ्वीसिंह।  98931-01018
मिर्च, टमाटर, भिंडी की खेती पर लागत व मुनाफा
एक एकड़ में उक्त सब्जी एवं मसालों की खेती करने पर लगभग पांच से दस हजार रुपए का खर्च आता है। जबकि खर्च निकाल कर 30 से 40 हजार रुपए तक का लाभ किसान प्राप्त कर सकता है। इसमें अधिक देखरेख भी किसान को नहीं करना पड़ती साथ ही आधुनिक तकनीक से और अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।