पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • मंदिर परिसर में दाल बाटी बनाकर लगाते हैं भोग

मंदिर परिसर में दाल-बाटी बनाकर लगाते हैं भोग

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
शहर से 10 किमी दूर स्थित परवरिया वाली मैया के दरबार में वार्षिक मेला शुरू हो गया है। इस मेले में विदिशा और रायसेन जिले के लोग परिवार के साथ पहुंचते हैं और मंदिर में परिसर में दाल-बाटी बनाकर पहले मां को भोग लगाते हैं। फिर मंदिर परिसर में ही प्रसाद ग्रहण करते हैं।

परवरिया स्थित सिद्धि दात्री माता के दरबार में वैशाख की पूर्णिमा से वार्षिक मेला प्रारंभ हो गया है, जो ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलेगा। इस दौरान मंदिर में हवन यज्ञ, अनुष्ठान सहित कई धार्मिक कार्यक्रम हाेंगे। ऐसी मान्यता है कि जो यहां पर एक बार आकर प्रसाद चढ़ाकर उसे ग्रहण कर लेता है, उसे साल में एक बार आना पड़ता है या फिर अपना प्रसाद मां के दरबार में भेजना पड़ता है। इस मान्यता के चलते भी हर साल लोग परिवार सहित यहां पर आकर मां को प्रसाद चढ़ाते हैं। मंगलवार को कलेक्टर भावना वालिंबे ने मंदिर पहुंचकर पहले पूजा की। इसके बाद निर्माण कार्याें का जायजा लिया।

नवाबी शासन में परवरिया से चलता था प्रशासन: ऐसा बताया जाता है कि वार्षिक मेले के दौरान नवाबी शासन काल में एक माह तक तहसील कार्यालय और थाना का संचालन परवरिया से ही होता था। यहां पर तहसीलदार और थाना प्रभारी मौजूद रहकर आसपास के गांव के लोगों की समस्याएं भी सुनते थे और उनका निराकरण मौके पर ही कर देते थे।

वार्षिक मेला

साल में एक बार विदिशा और रायसेन जिले के लोग परवरिया वाली मैया के दरबार में पहुंच कर चढ़ाते हैं प्रसाद

मंदिर परिसर में दाल बाटी बनाते श्रद्धालु।

400 साल पुराना है मंदिर

परवरिया गांव के 89 साल के बुजुर्ग लाल साहब बताते हैं कि यह मंदिर 400 साल से भी ज्यादा पुराना है। ऐसा सुनते आ रहे हैं कि राजा विक्रमादित्य मां सिद्धी दात्री काे उज्जैन लेकर जा रहे थे। तब उनके द्वारा परवरिया में मां के चरण, तारावली में मध्य भाग और उज्जैन में मां का शीश को विराजमान किया गया है। तब से इन तीनों स्थानों पर मां सिद्धिदात्री का आशीर्वाद क्षेत्र के लाेगों पर बना हुआ है।

ट्रस्ट बनने के बाद हुए कई निर्माण कार्य

आठ साल पहले प्रशासन द्वारा इस मंदिर का एक ट्रस्ट बनवा दिया है। तब से ट्रस्ट की देखरेख में यहां पर कई निर्माण कार्य कराए गए है, जिससे मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को कई प्रकार की सुविधाएं भी मिलने लगी है। ट्रस्ट के अध्यक्ष ऋषिनाथ कुशवाह, सचिव कामता प्रसाद राठौर, कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश दुबे, उपाध्यक्ष धीरज सिंह, संरक्षक कन्हैयालाल सूरमा, कमर सिंह बघेल, लाल साहब के मार्गदर्शन में मंदिर में भाेग प्रसाद भवन बनकर तैयार हो गया है, जबकि मंदिर के परिसर में मार्बल भी लगवा दिया गया है।

खबरें और भी हैं...